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Ganga Riverfront Plan : भागलपुर में गंगा किनारे विकास की दिशा बदलने वाली एक महत्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू हो गया है. इस बार फोकस चौड़ी सीढ़ियां, कंक्रीट दीवारें और सिर्फ सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि नदी के प्राकृतिक तंत्र को बचाते हुए विकास करने पर है. करीब 170 करोड़ रुपये की अर्बन रिवर मैनेजमेंट योजना में गंगा, दियारा, वेटलैंड और नदी से जुड़ी आजीविका को एक साथ जोड़ने का ब्लूप्रिंट तैयार किया गया है.
मंगलवार को भागलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के सभागार में हुई बैठक में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ लोकल सेल्फ गवर्नमेंट और कंसल्टेंसी आईसीएफ की टीम ने प्रस्तावित योजना पर प्रस्तुति दी.
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पहली बार ‘नेचर बेस्ड’ रिवर मैनेजमेंट पर जोर
योजना के अनुसार गंगा तट को कटाव से बचाने के लिए बड़े पैमाने पर कंक्रीट संरचनाएं नहीं बनेंगी. उनकी जगह सॉफ्ट इंजीनियरिंग और बायो-इंजीनियरिंग तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा.
इसके तहत कोयर मैटिंग, बांस आधारित संरचनाएं, जैव-अवक्रमणीय जियोटेक्सटाइल और स्थानीय पत्थरों से बने गेबियन बॉक्स के जरिए नदी किनारे को मजबूत किया जाएगा, ताकि कटाव भी रुके और गंगा का प्राकृतिक बहाव भी बना रहे.
दियारा को अब ‘खाली जमीन’ नहीं माना जाएगा
अर्बन रिवर मैनेजमेंट प्लान का सबसे अहम प्रस्ताव दियारा, सैंडबार और वेटलैंड को संरक्षण क्षेत्र घोषित करने का है. इन इलाकों को भविष्य में शहरी विस्तार की जमीन मानने के बजाय गंगा के जीवित पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा माना जाएगा.
यही वजह है कि नगर विकास के बायलॉज में भी इनके संरक्षण से जुड़े प्रावधान जोड़ने की तैयारी की जा रही है.
मछलियों से लेकर बाढ़ तक, सबका रखा गया ध्यान
योजना केवल नदी किनारे घूमने की जगह बनाने तक सीमित नहीं है. उथले जल क्षेत्रों को मछलियों के प्रजनन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा. साथ ही इकोलॉजिकल बफर जोन तैयार होगा, जहां देशी और बाढ़ सहन करने वाली वनस्पतियां लगाई जाएंगी.
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इससे जैव विविधता बढ़ने के साथ बाढ़ के दौरान नदी तट की प्राकृतिक सुरक्षा भी मजबूत होगी.
10 महीने के सर्वे के बाद तैयार हुआ मॉडल
करीब 10 महीने तक नदी, जल निकायों और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का अध्ययन करने के बाद यह कार्ययोजना तैयार की गई है. भागलपुर बिहार के उन छह शहरों में शामिल है, जहां अर्बन रिवर मैनेजमेंट प्लान लागू किया जाना प्रस्तावित है.
योजना लागू होने पर गंगा तट का विकास केवल निर्माण परियोजना नहीं रहेगा, बल्कि नदी संरक्षण, जल निकासी, मत्स्य पालन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को जोड़ने वाला एक समग्र मॉडल बनेगा.
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