🟡 Gold (10g) : ₹ 1,33,692.88 ⚪ Silver (1kg) : ₹ 1,98,622.92 💵 USD / INR : ₹ 95.60 📈 Sensex : 74,781.76 (-0.16%) 📊 Nifty 50 : 23,398.10 (-0.34%)
🟡 Gold (10g) : ₹ 1,33,692.88 ⚪ Silver (1kg) : ₹ 1,98,622.92 💵 USD / INR : ₹ 95.60 📈 Sensex : 74,781.76 (-0.16%) 📊 Nifty 50 : 23,398.10 (-0.34%)
विज्ञापन

वायरल वीडियो

Srijan Scam: अमरेंद्र कुमार यादव को बर्खास्त करने का आदेश, पहले करायी थी FIR फिर खुद बने घोटाले के आरोपी

Bhagalpur Srijan Scam : सृजन घोटाले की पहली प्राथमिकी कराने वाले तत्कालीन लिपिक सह नाजिर अमरेंद्र कुमार यादव अब सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिये गये हैं. जांच के दौरान वही इस मामले में आरोपी बने और नवंबर 2025 में विशेष अदालत से जेल की सजा भी मिली. करीब एक हजार करोड़ के घोटाले में कई लोगों पर कार्रवाई के बावजूद अब तक एक रुपये की भी वसूली नहीं हो सकी है.

विज्ञापन

Bhagalpur Srijan Scam : सृजन घोटाले की पहली प्राथमिकी कराने वाले तत्कालीन लिपिक सह नाजिर अमरेंद्र कुमार यादव अब सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिये गये हैं. जांच के दौरान वही इस मामले में आरोपी बने और नवंबर 2025 में विशेष अदालत से जेल की सजा भी मिली. करीब एक हजार करोड़ के घोटाले में कई लोगों पर कार्रवाई के बावजूद अब तक एक रुपये की भी वसूली नहीं हो सकी है.

विज्ञापन

Srijan Scam: सृजन घोटाले में एक दिलचस्प और अहम प्रशासनिक कार्रवाई सामने आयी है. जिस अमरेंद्र कुमार यादव ने वर्ष 2017 में जिला प्रशासन के निर्देश पर सृजन घोटाले की पहली प्राथमिकी दर्ज करायी थी, वही बाद में इस मामले में आरोपी बन गये और अब सरकारी सेवा से भी बर्खास्त कर दिये गये हैं. जिला नजारत शाखा में लिपिक सह नाजिर के पद पर कार्यरत अमरेंद्र कुमार यादव के खिलाफ संचालित विभागीय कार्यवाही में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप प्रमाणित पाये गये. जांच रिपोर्ट, उपलब्ध साक्ष्यों और उनके स्पष्टीकरण पर विचार के बाद जिलाधिकारी ने उनकी बर्खास्तगी का आदेश जारी किया है. नवंबर 2025 में विशेष अदालत द्वारा उन्हें इस मामले में जेल की सजा भी सुनायी जा चुकी है. बर्खास्तगी के बाद अब वह सरकार के अधीन भविष्य में किसी भी नियोजन के लिए भी अयोग्य होंगे.

Srijan Scam: पहली FIR कराने वाले अमरेंद्र ही बाद में बने आरोपी

सृजन घोटाला सामने आने के बाद जिला प्रशासन के निर्देश पर जिला नजारत शाखा की ओर से पहली प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी. इस प्राथमिकी के परिवादी तत्कालीन लिपिक सह नाजिर अमरेंद्र कुमार यादव ही थे.

मामले की जांच आगे बढ़ी तो अमरेंद्र कुमार यादव के खिलाफ ही आरोप लगाये गये और उन्हें इस मामले में आरोपी बनाया गया. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने भी मामले की जांच और अभियोजन की कार्रवाई की. इसके बाद नवंबर 2025 में विशेष अदालत ने उन्हें जेल की सजा सुनायी.

ग्रामीणों की जानकारी के बिना 72 सिम जारी, साइबर अपराधियों तक पहुंचाने का आरोप

अब विभागीय कार्यवाही में भी उनके खिलाफ लगे आरोप प्रमाणित होने के बाद जिला प्रशासन ने सरकारी सेवा से बर्खास्तगी की कार्रवाई की है.

विभागीय जांच में आरोप हुए प्रमाणित

अमरेंद्र कुमार यादव के खिलाफ संचालित विभागीय कार्यवाही में विभिन्न आरोपों, उपलब्ध साक्ष्यों और उनके द्वारा दिये गये स्पष्टीकरण पर विचार किया गया. संचालन पदाधिकारी की ओर से प्रस्तुत जांच रिपोर्ट में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप प्रमाणित पाये गये.

उनका बचाव भी सक्षम प्राधिकारी को संतोषजनक नहीं लगा. इसके बाद अंतिम निर्णय लेते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण व अपील) नियमावली, 2005 के प्रावधानों के तहत उन्हें सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया गया.

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि बर्खास्तगी के दंड के कारण भविष्य में सरकार के अधीन नियोजन के लिए उनकी अर्हता भी समाप्त हो गयी है.

2003 में शुरू हुई थी घोटाले की कहानी

सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड की शुरुआत गरीब और निःसहाय महिलाओं के उत्थान के उद्देश्य से हुई थी. लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार 16 दिसंबर 2003 से इसके जरिये सरकारी राशि के दुरुपयोग का सिलसिला शुरू हुआ और 31 जुलाई 2017 तक अलग-अलग सरकारी योजनाओं और विभागों की राशि को निशाना बनाया जाता रहा.

सृजन घोटाले की शुरुआत में जिला प्रशासन की नजारत शाखा को निशाना बनाया गया. करीब चार साल बाद वर्ष 2007 में घोटाले का दायरा और बढ़ा. इसी दौरान दंगा पीड़ितों को मिलने वाली पेंशन और उर्दू भाषी विद्यार्थियों को राज्य सरकार की ओर से दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि भी गबन के दायरे में आ गयी.

इसके बाद सहकारिता बैंक की राशि पर भी सृजन की नजर पड़ी. सहकारिता बैंक से हजारों-लाखों किसान जुड़े होते हैं और उनकी राशि को भी इस गोरखधंधे में निशाना बनाया गया.

2013 से जिला परिषद की राशि भी निशाने पर

वर्ष 2013 से जिला परिषद की योजनाओं की राशि पर भी सृजन की नजर थी. योजनाओं की जिन राशियों को निशाना बनाया गया, वह राशि संबंधित योजनाओं पर खर्च होती तो लोगों को कई सरकारी सुविधाएं मिल सकती थीं.

इसी वर्ष सृजन ने भागलपुर से बाहर दूसरे जिले की ओर भी रुख किया. सहरसा भू-अर्जन को निशाने पर लिया गया और वर्ष 2017 तक वहां भी यह सिलसिला चलता रहा.

इसके बाद भागलपुर में भू-अर्जन की राशि, नगर विकास योजना, जिला ग्रामीण विकास योजना, बच्चों की छात्रवृत्ति और अंत में स्वास्थ्य विभाग की राशि तक को नहीं छोड़ा गया.

करीब 14 साल तक चलता रहा गोरखधंधा

16 दिसंबर 2003 से 31 जुलाई 2017 तक करीब 14 वर्षों में घोटाले का दायरा लगातार बढ़ता गया. एक के बाद एक विभाग और सरकारी योजनाएं इसके निशाने पर आती गयीं. लंबे समय तक यह गोरखधंधा चलता रहा और बाद में वर्ष 2017 में मामला सामने आने के बाद इसकी जांच शुरू हुई.

इसी जांच के दौरान उन लोगों की भूमिका भी सामने आयी, जिन पर सरकारी राशि के संचालन और भुगतान की जिम्मेदारी थी. अमरेंद्र कुमार यादव का मामला भी इसी जांच और उसके बाद चली कानूनी व विभागीय कार्रवाई से जुड़ा है.

कई अधिकारी-कर्मचारी बर्खास्त, 25 से ज्यादा जेल गये

करीब एक हजार करोड़ रुपये के इस घोटाले में अब तक अरुण कुमार, राकेश कुमार झा और ओम कुमार श्रीवास्तव समेत कई लोगों को सरकारी सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है. मामले में 25 से अधिक लोगों को जेल भेजा गया है.

वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नौ आरोपितों की 34 मकानों और अन्य संपत्तियों पर रोक लगायी है. ईडी की कार्रवाई में 19 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की जा चुकी है.

सबसे बड़ा सवाल: सरकारी राशि वापस कब होगी?

सृजन घोटाले में कार्रवाई का दायरा लगातार बढ़ता गया. आरोपी जेल गये, कई सरकारी कर्मियों की सेवा समाप्त हुई और संपत्तियों पर भी कार्रवाई हुई. लेकिन करीब एक हजार करोड़ रुपये के इस घोटाले से जुड़ा सबसे बड़ा सवाल अब भी बना हुआ है.

घोटाले में गयी राशि में से अब तक एक रुपये की भी वसूली नहीं हो सकी है. यही इस पूरे मामले में प्रशासनिक कार्रवाई के बावजूद सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है.

जिला प्रशासन की ओर से अमरेंद्र कुमार यादव के खिलाफ की गयी कार्रवाई को सरकारी कार्यों में वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में कदम बताया गया है. प्रशासन ने भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्रवाई जारी रखने की बात कही है.

इसे भी पढ़ें-

भागलपुर में बनेगा म्युनिसिपल कोर्ट, जानिए किन मामलों की होगी सुनवाई
भागलपुर में बैंकिंग व्यवस्था ठप, 500 करोड़ का लेनदेन प्रभावित; 250 एटीएम भी रहे बंद
अधूरा सौंदर्यीकरण पूरा करने को नई एजेंसी, 9.61 करोड़ का टेंडर
विज्ञापन
Soni
सोनी कुमारी
सोनी कुमारी डिजिटल मीडिया क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार हैं और Hellocities24 में ऑथर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार समेत देशभर की ताजा खबरों, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक मुद्दों पर लेखन करती हैं. पाठकों तक तेज और भरोसेमंद खबरें पहुंचाना प्रमुख उद्देश्य है.
HelloCities24
जरूरी खबरें और खास अपडेट, सीधे आपके इनबॉक्स में
देश-दुनिया की अहम खबरें और चुनिंदा अपडेट अब सीधे आपके ईमेल पर।
संबंधित खबरें
विज्ञापन

जरूर पढ़ें

विज्ञापन
Patna
overcast clouds
31 ° C
31 °
31 °
74%
5.1m/s
86%
रवि
35 °
सोम
34 °
मंगल
34 °
बुध
34 °
गुरु
33 °

अन्य खबरें