Bihar Electricity Investment : बिहार के बिजली क्षेत्र में सुधार के बाद अब सरकार बड़े निवेश को जमीन पर उतारने की तैयारी में जुट गई है. क्रिलोस्कर ब्रदर लिमिटेड, हिंदुस्तान पावर एक्सचेंज, इंडियन एनर्जी एक्सचेंज समेत करीब छह कंपनियों ने राज्य के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश में रुचि दिखाई है. सरकार की योजना अगले पांच वर्षों में बिजली क्षेत्र में 1,33,541 करोड़ रुपये का निवेश लाने की है. खास बात यह है कि निवेशकों के सामने बिजली कंपनियों की सुधरती वित्तीय स्थिति को भी एक महत्वपूर्ण आधार के तौर पर रखा गया है.
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साल 2022 में बिजली वितरण कंपनियों को 2,218 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था, जबकि 2026 में 2,375 करोड़ रुपये का अस्थायी लाभ दर्ज किया गया है. इसी बदलती तस्वीर के बीच सरकार सौर और हरित ऊर्जा के साथ उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण व्यवस्था को विस्तार देने की तैयारी कर रही है.
1.33 लाख करोड़ के निवेश का पूरा खाका
बिहार सरकार ने बिजली क्षेत्र के लिए अगले पांच वर्षों का निवेश खाका तैयार किया है. इसके तहत कुल 1,33,541 करोड़ रुपये निवेश करने की योजना है. इसमें बिजली उत्पादन के लिए 32,679 करोड़ रुपये, ट्रांसमिशन के लिए 24,603 करोड़, वितरण व्यवस्था के लिए 25,909 करोड़ और रखरखाव पर 2,370 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.
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सरकार ने इससे जुड़े निवेश को बढ़ावा देने के लिए औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज 2025 भी तैयार किया है. लक्ष्य बिजली क्षेत्र के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के साथ औद्योगिक विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाना है.
2030 तक रिन्यूएबल एनर्जी पर बड़ा लक्ष्य
बिहार ने साल 2030 तक 24 हजार मेगावाट रिन्यूएबल एनर्जी और 6 गीगावॉट घंटे स्टोरेज क्षमता का लक्ष्य रखा है. इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए निजी और बड़े निवेश की जरूरत है. इसी वजह से ऊर्जा विभाग संभावित निवेशकों के साथ लगातार बातचीत कर रहा है.
छह कंपनियों ने दिखाई निवेश में रुचि
ऊर्जा क्षेत्र में निवेश को लेकर करीब छह कंपनियों ने रुचि जाहिर की है. इनमें क्रिलोस्कर ब्रदर लिमिटेड, हिंदुस्तान पावर एक्सचेंज और इंडियन एनर्जी एक्सचेंज शामिल हैं. इनके साथ अगले चरण की बातचीत जल्द होने की उम्मीद है.
इसी साल छह और सात अगस्त को नई दिल्ली में सीआईआई की ओर से आयोजित कॉन्फ्रेंस, छह अगस्त को भुवनेश्वर और 10 अगस्त को नई दिल्ली में हुए कार्यक्रमों के दौरान ऊर्जा मंत्री, ऊर्जा सचिव और अन्य अधिकारियों ने निवेशकों से बातचीत की थी. इसके बाद कुछ और बड़े निवेशकों ने भी बिहार में निवेश की दिशा में रुचि दिखाई है.
मुफ्त बिजली के बावजूद सुधरी वित्तीय स्थिति
बिहार के बिजली क्षेत्र में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकार ने वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति में हुए सुधार को भी सामने रखा है. राज्य में प्रति महीने 125 यूनिट मुफ्त बिजली देने के बावजूद बिजली वितरण कंपनियां घाटे से निकलकर लाभ की स्थिति में पहुंची हैं.
साल 2022 में 2,218 करोड़ रुपये के घाटे के मुकाबले 2026 में 2,375 करोड़ रुपये का अस्थायी लाभ दर्ज किया गया है. वहीं राज्य सरकार मुफ्त बिजली योजना पर हर साल करीब 2,300 करोड़ रुपये खर्च कर रही है.
निवेश से बिजली क्षेत्र और रोजगार को बढ़ावा
सरकार का मानना है कि प्रस्तावित निवेश से बिजली उत्पादन से लेकर ट्रांसमिशन और वितरण तक के ढांचे को मजबूती मिलेगी. इसके साथ सौर और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में भी विस्तार होगा. बड़े निवेश के जरिए राज्य में औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार के अवसर बढ़ाने की भी योजना है.
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