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आखिर भगवान कृष्ण को क्यों चढ़ाया जाता है 56 भोग? सात दिन भूखे रहने से जुड़ी है दिलचस्प कथा

Govardhan Puja 2026 : गोवर्धन पूजा 10 नवंबर को मनाई जाएगी. इस दिन भगवान श्रीकृष्ण को अन्नकूट और छप्पन भोग अर्पित करने की परंपरा है. इसके पीछे सात दिनों तक गोवर्धन पर्वत उठाने और भगवान के भोजन नहीं करने की धार्मिक मान्यता जुड़ी है.

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Govardhan Puja 2026 : गोवर्धन पूजा 10 नवंबर को मनाई जाएगी. इस दिन भगवान श्रीकृष्ण को अन्नकूट और छप्पन भोग अर्पित करने की परंपरा है. इसके पीछे सात दिनों तक गोवर्धन पर्वत उठाने और भगवान के भोजन नहीं करने की धार्मिक मान्यता जुड़ी है.

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Govardhan Puja 2026: गोवर्धन पूजा के दिन भगवान श्रीकृष्ण को छप्पन भोग लगाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. इस दिन मंदिरों और घरों में तरह-तरह के पकवान तैयार कर कान्हा को अर्पित किए जाते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भगवान श्रीकृष्ण को 56 ही पकवानों का भोग क्यों लगाया जाता है, 50 या 60 का क्यों नहीं? इसके पीछे भगवान कृष्ण की एक ऐसी कथा जुड़ी है, जिसमें सात दिनों तक गोवर्धन पर्वत उठाने और उनके भोजन नहीं करने का प्रसंग आता है.

इस साल गोवर्धन पूजा 10 नवंबर, मंगलवार को मनाई जाएगी. आइए जानते हैं छप्पन भोग की परंपरा के पीछे की धार्मिक मान्यता और अन्नकूट का अर्थ.

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Govardhan Puja 2026: सात दिन तक नहीं किया भोजन, फिर ऐसे तैयार हुआ छप्पन भोग

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण दिन में आठ बार भोजन करते थे. लेकिन एक बार ब्रजवासियों को इंद्र देव के प्रकोप से बचाने के लिए उन्होंने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया.

कथा के अनुसार, भगवान कृष्ण ने लगातार सात दिनों तक गोवर्धन पर्वत को उठाए रखा. इस दौरान उन्होंने भोजन नहीं किया. जब सातवें दिन बारिश रुकी और ब्रजवासी सुरक्षित हो गए, तब माता यशोदा और ब्रज के लोगों ने कान्हा के लिए 56 तरह के पकवान तैयार किए.

मान्यता है कि भगवान कृष्ण दिन में आठ बार भोजन करते थे. सात दिनों तक भोजन नहीं करने के कारण उनके आठों पहर के भोजन की भरपाई करने के लिए 56 व्यंजन तैयार किए गए.

इसका गणित भी बेहद आसान है. सात दिन × आठ बार भोजन = 56 भोग. इसी मान्यता से भगवान श्रीकृष्ण को छप्पन भोग लगाने की परंपरा शुरू हुई.

इंद्र देव के अहंकार को तोड़ने से जुड़ी है गोवर्धन पूजा की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, ब्रज में हर साल इंद्र देव को प्रसन्न करने के लिए पूजा की जाती थी. भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को समझाया कि उन्हें गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए, क्योंकि इससे उन्हें पशुओं के लिए चारा और जीवन के लिए जरूरी संसाधन मिलते हैं.

ब्रजवासियों ने कृष्ण की बात मानकर गोवर्धन पर्वत की पूजा की. इससे इंद्र देव क्रोधित हो गए और उन्होंने ब्रज में मूसलाधार बारिश शुरू कर दी.

ब्रजवासियों को इस संकट से बचाने के लिए भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठा लिया. सभी ब्रजवासी अपने पशुओं के साथ पर्वत के नीचे सुरक्षित रहे. सात दिनों बाद इंद्र देव को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने वर्षा रोक दी.

इसी घटना की याद में गोवर्धन पूजा मनाई जाती है.

अन्नकूट का क्या होता है अर्थ?

अन्नकूट दो शब्दों से मिलकर बना है. इसमें ‘अन्न’ का अर्थ भोजन और ‘कूट’ का अर्थ पर्वत या ढेर होता है. यानी अन्नकूट का शाब्दिक अर्थ है तरह-तरह के खाद्य पदार्थों का ढेर.

गोवर्धन पूजा के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण को अलग-अलग प्रकार के व्यंजन, मिठाइयां, फल, सब्जियां और अनाज अर्पित किए जाते हैं. इसी सामूहिक भोग को अन्नकूट कहा जाता है.

इस दिन मंदिरों में विशेष रूप से अन्नकूट का आयोजन किया जाता है. भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार भगवान को विभिन्न प्रकार के पकवान अर्पित करते हैं.

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गोवर्धन पूजा पर छप्पन भोग का क्या है धार्मिक महत्व?

धार्मिक मान्यताओं में छप्पन भोग को भगवान श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम, श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक माना जाता है. भक्त अपनी सामर्थ्य के अनुसार तरह-तरह के व्यंजन बनाकर कान्हा को अर्पित करते हैं.

वहीं, अन्नकूट की परंपरा प्रकृति और गोवर्धन पर्वत के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने से भी जुड़ी है. इस पर्व के माध्यम से भगवान कृष्ण की उस लीला को याद किया जाता है, जिसमें उन्होंने ब्रजवासियों को प्राकृतिक संकट से बचाया था.

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Disclaimer: यह जानकारी केवल पारंपरिक मान्यताओं और प्रचलित स्रोतों पर आधारित है. HelloCities24 इसकी सत्यता या वैधता की पुष्टि नहीं करता.

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Soni
सोनी कुमारी
सोनी कुमारी डिजिटल मीडिया क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार हैं और Hellocities24 में ऑथर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार समेत देशभर की ताजा खबरों, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक मुद्दों पर लेखन करती हैं. पाठकों तक तेज और भरोसेमंद खबरें पहुंचाना प्रमुख उद्देश्य है.
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