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Jitiya Vrat Paran Time 2026: जितिया यानी जीवित्पुत्रिका व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए अब पारण का समय सबसे महत्वपूर्ण है. शनिवार को संतान की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि की कामना से महिलाओं ने निर्जला व्रत रखा है. रविवार यानी 4 अक्टूबर को पूजा-पाठ और निर्धारित नियमों का पालन करने के बाद व्रत का पारण किया जाएगा.
सुबह 7:28 बजे के बाद पारण का समय
पंचांग के अनुसार, 4 अक्टूबर को सुबह 7 बजकर 28 मिनट के बाद जितिया व्रत का पारण किया जा सकता है. व्रत खोलने से पहले महिलाओं द्वारा पूजा करने की परंपरा है. हालांकि पारण का समय स्थानीय पंचांग और स्थान के अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है, इसलिए अपने क्षेत्र के पंचांग को भी जरूर देख लेना चाहिए.
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पारण से पहले सूर्यदेव को दें अर्घ्य
पारण वाले दिन महिलाओं को सुबह जल्दी उठकर स्नान कर साफ कपड़े पहनने की परंपरा है. इसके बाद पूजा की तैयारी की जाती है.
पूजा के लिए तांबे के लोटे में पानी लेकर उसमें लाल फूल और अक्षत डालें. इसके बाद सूर्यदेव को अर्घ्य देकर उनकी पूजा करें. पूजा स्थल पर दीपक और धूप जलाने के बाद भगवान जीमूतवाहन का स्मरण किया जाता है.
जीमूतवाहन के साथ चील और सियारिन का भी स्मरण
जितिया व्रत की पूजा में भगवान जीमूतवाहन के साथ चील और सियारिन का भी ध्यान करने की परंपरा बताई गई है. इस दौरान उन्हें जल और प्रसाद अर्पित किया जाता है.
पूजा पूरी होने के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांटने की परंपरा है. इसके बाद भगवान को चढ़ाया गया जल और प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण किया जाता है.
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पारण के बाद सात्विक भोजन की परंपरा
व्रत खोलने के बाद सात्विक भोजन करने की परंपरा है. कई जगहों पर जितिया व्रत के पारण के दिन नोनी का साग और झिंगनी यानी तोरी की सब्जी खाने की परंपरा भी बताई जाती है.
संतान की लंबी उम्र से जुड़ी है जितिया की मान्यता
जितिया व्रत को मां और संतान के बीच प्रेम का प्रतीक माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, राजा जीमूतवाहन ने एक नागवंशी बालक की जान बचाने के लिए खुद को गरुड़ के सामने समर्पित कर दिया था.
राजा जीमूतवाहन के इसी त्याग की कथा से जुड़ी मान्यता के अनुसार, माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि की कामना से यह कठिन निर्जला व्रत रखती हैं. व्रत पूरा होने के बाद विधि-विधान से पूजा कर प्रसाद ग्रहण करने के बाद पारण किया जाता है.
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Disclaimer: यह जानकारी केवल पारंपरिक मान्यताओं और प्रचलित स्रोतों पर आधारित है. HelloCities24 इसकी सत्यता या वैधता की पुष्टि नहीं करता. पारण का समय स्थानीय पंचांग और स्थान के अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है. अपने क्षेत्र के पंचांग को भी जरूर देख लें.



