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Navratri Day 1 : मां शैलपुत्री की पूजा से शुरू हुआ नवरात्र, जानें पहले दिन का भोग और पूजन विधि

Navratri Day 1: शारदीय नवरात्र की शुरुआत 11 अक्टूबर से हो रही है और पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी. इस अवसर पर कलश स्थापना, देवी के मंत्र जाप और विशेष भोग अर्पित करने की परंपरा निभाई जाती है. जानें मां शैलपुत्री की पूजा में किन सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है और पहले दिन की आराधना कैसे की जाती है.

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Navratri Day 1: शारदीय नवरात्र की शुरुआत 11 अक्टूबर से हो रही है और पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी. इस अवसर पर कलश स्थापना, देवी के मंत्र जाप और विशेष भोग अर्पित करने की परंपरा निभाई जाती है. जानें मां शैलपुत्री की पूजा में किन सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है और पहले दिन की आराधना कैसे की जाती है.

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Navratri Day 1: शारदीय नवरात्र की शुरुआत 11 अक्टूबर से हो रही है. नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व के पहले दिन मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाती है. धार्मिक मान्यताओं में मां शैलपुत्री को सुख-समृद्धि, आरोग्य और सौभाग्य प्रदान करने वाली देवी माना गया है. नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना के साथ पूजा का संकल्प लिया जाता है.

श्रद्धालु देवी की आराधना के लिए विशेष पूजन सामग्री, मंत्र जाप और भोग की तैयारी करते हैं. पहले दिन मां को सफेद फूल और गाय के घी से बनी चीजें अर्पित करने की परंपरा है.

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Navratri Day 1 : पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं मां शैलपुत्री

मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप का नाम शैलपुत्री है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, वह पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं. उनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का फूल सुशोभित रहता है. मां शैलपुत्री का वाहन वृषभ है, इसी वजह से उन्हें वृषारूढ़ा भी कहा जाता है.

सफेद फूल और घी का भोग अर्पित करने की परंपरा

नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा में सफेद रंग की वस्तुओं को विशेष महत्व दिया जाता है. श्रद्धालु देवी को सफेद फूल, अक्षत, चंदन और सफेद मिठाई अर्पित करते हैं. इस दिन गाय के घी से बनी चीजों का भोग लगाने की भी मान्यता है.

मां शैलपुत्री का मंत्र: ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः.

पूजा के दौरान श्रद्धालु इस मंत्र का जाप कर सकते हैं. इसके साथ दुर्गा सप्तशती का पाठ और मां दुर्गा का ध्यान करने की भी परंपरा है.

नवरात्र के पहले दिन कैसे करें कलश स्थापना

नवरात्र की पूजा में कलश स्थापना को महत्वपूर्ण माना जाता है. इसके लिए सबसे पहले पूजा की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाया जाता है. इसके बाद मिट्टी के पात्र में मिट्टी भरकर जौ बोये जाते हैं.

कलश में जल भरने के बाद उसमें सुपारी, अक्षत, सिक्का और दूर्वा आदि डाले जाते हैं. इसके मुख पर आम के पत्ते रखकर ऊपर नारियल स्थापित किया जाता है. कलश पर रोली और अक्षत से तिलक लगाया जाता है.

स्थापना के समय मां दुर्गा का ध्यान कर पूजा का संकल्प लिया जाता है. इसके बाद गणेश जी, कलश और मां दुर्गा की पूजा की जाती है. अंत में देवी की आरती कर प्रसाद वितरित किया जाता है.

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दुर्गा सप्तशती के पाठ में परंपरा का रखें ध्यान

नवरात्र के दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ करने की परंपरा है. कुछ पूजा पद्धतियों में इसके अध्यायों का पाठ सात दिनों में अलग-अलग हिस्सों में पूरा किया जाता है. पाठ का क्रम परिवार की परंपरा, पुरोहित के निर्देश और स्थानीय पूजा-विधि के अनुसार अलग हो सकता है.

श्रद्धालु अपनी परंपरा और सुविधा के अनुसार नियमित पाठ तथा मंत्र जाप कर सकते हैं. मंत्र जाप के लिए रुद्राक्ष की माला या अपनी पूजा पद्धति के अनुरूप दूसरी माला का उपयोग किया जा सकता है. इस दौरान मां दुर्गा का ध्यान करते हुए मन को शांत रखने पर जोर दिया जाता है.

नौ दिनों तक अलग-अलग स्वरूपों की पूजा

नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है. प्रत्येक दिन देवी के अलग-अलग स्वरूप की पूजा और भोग अर्पित करने की परंपरा है. पहले दिन मां शैलपुत्री को गाय के घी से बनी चीजें चढ़ाने की मान्यता है.

नवरात्र के दौरान फल, मिठाई, खीर, हलवा और अन्य सात्विक पकवान भी भोग के रूप में अर्पित किए जाते हैं. अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में भोग की परंपराएं भिन्न हो सकती हैं. इसलिए श्रद्धालु अपनी पारिवारिक पूजा पद्धति और पुरोहित के निर्देश के अनुसार देवी को भोग अर्पित करते हैं.

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Disclaimer: यह जानकारी केवल पारंपरिक मान्यताओं और प्रचलित स्रोतों पर आधारित है. HelloCities24 इसकी सत्यता या वैधता की पुष्टि नहीं करता.

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Soni
सोनी कुमारी
सोनी कुमारी डिजिटल मीडिया क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार हैं और Hellocities24 में ऑथर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार समेत देशभर की ताजा खबरों, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक मुद्दों पर लेखन करती हैं. पाठकों तक तेज और भरोसेमंद खबरें पहुंचाना प्रमुख उद्देश्य है.
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