Delhi Electricity Bill Hike : दिल्ली में बिजली उपभोक्ताओं पर जल्द अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है. बिजली खरीद और उत्पादन लागत में आई बढ़ोतरी के बाद नियामक स्तर पर ऐसा निर्णय लिया गया है, जिससे राजधानी के एक बड़े वर्ग के मासिक बिजली बिल में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल सकती है. नई व्यवस्था के तहत निजी वितरण कंपनियों को पहले से अधिक ईंधन एवं बिजली खरीद समायोजन शुल्क (FPPAS) वसूलने की अनुमति दी गई है.
बिजली उत्पादन लागत बढ़ने का असर
बिजली दरों पर दबाव की मुख्य वजह उत्पादन और खरीद लागत में आई वृद्धि बताई जा रही है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोयले की कीमतों में बढ़ोतरी और उसके परिवहन पर बढ़े खर्च का असर बिजली क्षेत्र पर पड़ा है. इसी अतिरिक्त लागत को संतुलित करने के लिए दिल्ली की बिजली वितरण कंपनियों ने नियामक आयोग से राहत मांगी थी, जिसे मंजूरी मिल गई है.
पुरानी सीमा हटने से बढ़ेगा सरचार्ज
पहले कंपनियों पर अतिरिक्त शुल्क वसूली की एक निर्धारित सीमा लागू थी. नए आदेश के बाद यह सीमा समाप्त कर दी गई है. इसके चलते कई उपभोक्ताओं के बिजली बिल में 16 से 18 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होने की संभावना जताई जा रही है.
अलग-अलग क्षेत्रों में अलग होगा अतिरिक्त शुल्क
नई स्वीकृति के बाद विभिन्न बिजली वितरण कंपनियों के उपभोक्ताओं पर अलग-अलग दर से अतिरिक्त शुल्क लागू होगा.
- टाटा पावर (TPDDL): उत्तरी दिल्ली के उपभोक्ताओं से 16 प्रतिशत FPPAS वसूला जाएगा.
- बीएसईएस राजधानी (BRPL): दक्षिण और पश्चिमी दिल्ली के उपभोक्ताओं पर 17.94 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लागू होगा.
- बीएसईएस यमुना (BYPL): पूर्वी और मध्य दिल्ली के उपभोक्ताओं को 17.43 प्रतिशत सरचार्ज देना होगा.
अगले आदेश तक जारी रहेगी व्यवस्था
आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था फिलहाल मासिक आधार पर लागू रहेगी. जब तक कोई नया निर्देश जारी नहीं किया जाता, तब तक कंपनियां स्वीकृत दरों के अनुसार अतिरिक्त शुल्क वसूल सकेंगी.
किन उपभोक्ताओं को मिलेगी राहत?
बिजली बिल में होने वाली इस वृद्धि का असर सभी उपभोक्ताओं पर समान रूप से नहीं पड़ेगा.
- सब्सिडी पाने वाले उपभोक्ता: 200 यूनिट तक मुफ्त या 400 यूनिट तक आंशिक सब्सिडी का लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं पर इस बढ़ोतरी का असर नहीं होगा.
- गैर-सब्सिडी उपभोक्ता: जो उपभोक्ता नियमित रूप से पूरा बिजली बिल जमा करते हैं, उन्हें बढ़े हुए सरचार्ज का सीधा प्रभाव झेलना पड़ सकता है.
मासिक बजट पर पड़ सकता है असर
बिजली खरीद लागत में बढ़ोतरी का असर अब उपभोक्ताओं तक पहुंचने लगा है. ऐसे में सब्सिडी दायरे से बाहर रहने वाले परिवारों के मासिक खर्च में वृद्धि होने की संभावना है, खासकर ऐसे समय में जब गर्मी के कारण बिजली की खपत पहले से अधिक बनी हुई है.
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