Muskan Rastogi Death Sentence : मेरठ के ब्लू ड्रम हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद अब निगाहें आगे की कानूनी प्रक्रिया पर हैं. अदालत से मौत की सजा मिलना और दोषी को फांसी दिया जाना दो अलग-अलग चरण हैं. इसी संदर्भ में आजाद भारत में महिलाओं को फांसी दिए जाने के इतिहास और रतनबाई जैन के मामले का भी जिक्र हो रहा है.
Muskan Rastogi Death Sentence : सौरभ राजपूत की हत्या में मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड
मेरठ की जिला अदालत ने मर्चेंट नेवी से जुड़े रहे सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को 14 अक्टूबर को मौत की सजा सुनाई. अभियोजन पक्ष के मुताबिक, मार्च 2025 में सौरभ की हत्या के बाद उनके शव के टुकड़ों को नीले प्लास्टिक के ड्रम में रखा गया और सीमेंट से ढक दिया गया था. इसी वजह से यह मामला नीला ड्रम हत्याकांड के नाम से चर्चित हुआ.
राहुल गांधी की याचिका में कहां फंसा पेंच? 14 आपत्तियां, फीस से लेकर दस्तावेजों तक में गड़बड़ी
रतनबाई जैन का मामला फिर चर्चा में क्यों?
मुस्कान को मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद आजाद भारत में महिलाओं को फांसी दिए जाने का इतिहास भी चर्चा में है. मीडिया रिपोर्टों में रतनबाई जैन का उल्लेख मिलता है, जिन्हें 3 जनवरी 1955 को दिल्ली की तिहाड़ जेल में फांसी दिए जाने की बात कही गई है. हालांकि, इस ऐतिहासिक मामले से जुड़ी जानकारी को प्रमाणित तथ्यों के आधार पर ही प्रस्तुत करना जरूरी है.
तीन महिलाओं की हत्या के मामले से जुड़ा था नाम
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, रतनबाई जैन पर तीन महिलाओं की हत्या करने का आरोप था. बताया जाता है कि उन्हें अपने पति के दूसरी महिलाओं से संबंध होने का संदेह था और इसी शक के चलते उन्होंने कथित तौर पर तीन महिलाओं को जहर दिया था. इस मामले का जिक्र स्वतंत्र भारत में महिला दोषियों को फांसी दिए जाने के दुर्लभ उदाहरण के रूप में किया जाता है.
मौत की सजा मिलते ही नहीं हो जाती फांसी
मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद दोषी को तुरंत फांसी नहीं दी जाती. सत्र अदालत के फैसले में दी गई मौत की सजा की संबंधित हाई कोर्ट से पुष्टि होना आवश्यक है. इसके बाद कानून के तहत अपील और अन्य उपलब्ध न्यायिक उपायों की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होती है.
इसलिए मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड सुनाए जाने को फांसी दिए जाने के बराबर नहीं माना जा सकता. आगे की कानूनी प्रक्रिया ही तय करेगी कि इस मामले में सजा का अंतिम परिणाम क्या होगा.
यूपी में 1.16 लाख गरीब परिवारों को मिली बड़ी राहत, दूसरी किश्त के ₹816.66 करोड़ जारी
मुस्कान को कब दी जा सकती है फांसी?
मुस्कान और साहिल को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद फांसी की तारीख को लेकर सवाल उठ सकते हैं, लेकिन केवल निचली अदालत के फैसले के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि उन्हें तुरंत फांसी दे दी जाएगी. हाई कोर्ट में सजा की पुष्टि और कानून के तहत उपलब्ध आगे की प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है. ऐसे में मृत्युदंड का फैसला और उसके क्रियान्वयन के बीच का अंतर समझना इस मामले में अहम है.
इसे भी पढ़ें-
राहुल गांधी की याचिका में कहां फंसा पेंच? 14 आपत्तियां, फीस से लेकर दस्तावेजों तक में गड़बड़ी
दिल्ली में प्रदर्शन से बढ़ी सख्ती, यूपी बॉर्डर सील जैसे हालात; 250 ट्रेनें रद्द, स्कूल-कॉलेजों पर भी असर
रामपुर में हिस्ट्रीशीटर सनी की हत्या, ठेके पर घेरकर बरसाईं गोलियां; बाइक से आए थे 3 हमलावर
इसे भी पढ़ें-



