Railway Mega Plan: देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों पर अब ट्रेनों की रफ्तार और क्षमता दोनों बढ़ाने की तैयारी शुरू हो गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में 7 हाई-डेंसिटी रेलवे कॉरिडोर को 4 लाइन वाला बनाने और 5 मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी गई. सरकार का कहना है कि इन रूटों पर भारतीय रेलवे का करीब 40 प्रतिशत ट्रैफिक चलता है.
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि यह फैसला रेलवे के क्षमता विस्तार की सबसे अहम योजनाओं में से एक है. इससे यात्री ट्रेनों के साथ मालगाड़ियों के संचालन में भी बड़ा सुधार होगा.
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#WATCH | Union Cabinet briefing | Delhi: Union Minister Ashwini Vaishnaw says, "If we look at the most important Railway corridors: 11,000 kms long, 7 high-density corridors, quadrupling, 4-lining of these high-density corridors plus many other corridors are being done; these are… pic.twitter.com/VpP7GcbhWF
— ANI (@ANI) September 9, 2026
11 हजार किमी के कॉरिडोर पर बढ़ेगी क्षमता
सरकार के मुताबिक जिन 7 हाई-डेंसिटी कॉरिडोर को चरणबद्ध तरीके से 4 लाइन में विकसित किया जा रहा है, उनकी कुल लंबाई करीब 11,000 किलोमीटर है. इनमें दिल्ली-कोलकाता, चेन्नई-कोलकाता, दिल्ली-मुंबई, मुंबई-चेन्नई और बिलासपुर-कटनी जैसे प्रमुख रेल मार्ग शामिल हैं.
इन कॉरिडोर पर देश का सबसे अधिक रेल यातायात होता है, इसलिए अतिरिक्त लाइनें जोड़कर ट्रैफिक का दबाव कम करने की योजना बनाई गई है.
2000 किमी पर काम पूरा, 5000 किमी पर निर्माण जारी
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि हाई-डेंसिटी नेटवर्क के लगभग 2,000 किलोमीटर हिस्से पर पहले ही 4 लाइन का काम पूरा हो चुका है. वहीं करीब 5,000 किलोमीटर रेल मार्ग पर निर्माण कार्य चल रहा है या उसे पहले ही मंजूरी मिल चुकी है.
बाकी लगभग 4,000 किलोमीटर हिस्से के लिए अंतिम स्वीकृति की प्रक्रिया जारी है. यानी पूरा नेटवर्क अलग-अलग चरणों में विकसित किया जाएगा.
पांच नए मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट को मिली हरी झंडी
कैबिनेट ने दक्षिण भारत के चार राज्यों में रेलवे नेटवर्क मजबूत करने के लिए 5 बड़ी परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है. इन योजनाओं पर कुल 10,021 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है और इन्हें 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
Delhi | Union Minister Ashwini Vaishnaw briefs the media: Union Cabinet approves 5 multitracking projects covering 17 Districts across the states of Tamil Nadu, Andhra Pradesh, Karnataka and Telangana.
— ANI (@ANI) September 9, 2026
The projects will increase the existing network of Indian Railways by about… pic.twitter.com/pUTW1HPgE9
इन परियोजनाओं से तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के 17 जिलों में रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी.
किन रूटों पर बनेगी नई रेल लाइन
| रेल परियोजना | कार्य | लंबाई |
|---|---|---|
| अरक्कोनम-रेनिगुंटा | तीसरी और चौथी लाइन | 77 किमी |
| व्हाइटफील्ड-बंगारपेट | तीसरी और चौथी लाइन | 47 किमी |
| होसुर-ओमलूर | दोहरीकरण | 147 किमी |
| सेलम-करूर-दिंडीगुल | डबल लाइन | 159 किमी |
| घटकेसर-काजीपेट | अतिरिक्त रेल लाइन | 110 किमी |
इन सभी परियोजनाओं के पूरा होने के बाद रेलवे नेटवर्क में करीब 540 किलोमीटर की अतिरिक्त क्षमता जुड़ जाएगी.
2121 गांव और 52 लाख लोगों को होगा लाभ
रेल मंत्रालय के अनुसार इन परियोजनाओं का सीधा लाभ 17 जिलों के 2,121 गांवों तक पहुंचेगा. इन क्षेत्रों में रहने वाले लगभग 52 लाख लोगों को बेहतर रेल संपर्क और अधिक ट्रेन संचालन का फायदा मिलेगा.
सरकार का मानना है कि अतिरिक्त लाइन बनने से ट्रेनों की लेटलतीफी कम होगी और नए रेल संचालन की संभावनाएं भी बढ़ेंगी.
माल ढुलाई में भी आएगा बड़ा बदलाव
रेलवे का यह विस्तार केवल यात्रियों के लिए नहीं, बल्कि माल परिवहन के लिए भी अहम माना जा रहा है. मंत्रालय के अनुसार परियोजनाओं के पूरा होने के बाद भारतीय रेलवे की माल ढुलाई क्षमता में करीब 47 MTPA यानी सालाना 47 मिलियन टन की अतिरिक्त क्षमता जुड़ सकती है.
सरकार ने सभी परियोजनाओं को चरणबद्ध तरीके से पूरा करने का लक्ष्य तय किया है और 2029-30 तक इन्हें पूरा करने की योजना बनाई गई है.
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