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West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है. सोनारपुर में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और हुगली में सांसद कल्याण बनर्जी के साथ कथित हमले की घटनाओं के बाद तृणमूल कांग्रेस ने राज्यभर में व्यापक विरोध अभियान शुरू करने का फैसला लिया है. पार्टी नेतृत्व ने इस मुद्दे को लेकर सड़क से लेकर संगठन तक आंदोलन तेज करने की रणनीति बनाई है और इसके तहत विभिन्न स्तरों पर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं.
रानी रासमणि रोड पर ममता बनर्जी का विरोध प्रदर्शन
टीएमसी ने अपने आंदोलन का केंद्र कोलकाता को बनाया है. पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 2 जून को एस्प्लेनेड स्थित रानी रासमणि रोड पर एक दिवसीय धरना कार्यक्रम में शामिल होंगी. सत्ता परिवर्तन के बाद इसे ममता बनर्जी के सबसे बड़े सार्वजनिक राजनीतिक प्रदर्शनों में से एक माना जा रहा है. पार्टी इसे राज्य में लोकतांत्रिक अधिकारों और राजनीतिक हमलों के खिलाफ आवाज उठाने का मंच बता रही है.
वार्ड से ब्लॉक स्तर तक विरोध कार्यक्रम
सांसदों पर हुए कथित हमलों को लेकर टीएमसी ने पूरे राज्य में विरोध गतिविधियों का विस्तृत कार्यक्रम तैयार किया है. सोमवार से विभिन्न जिलों में कार्यकर्ता और स्थानीय नेता सड़कों पर उतरे.
- राज्य के नगर पालिका वार्डों में विरोध मार्च निकाले गए.
- ग्रामीण क्षेत्रों के विभिन्न ब्लॉकों में रैलियों का आयोजन किया गया.
- कार्यकर्ताओं ने काले झंडे लेकर प्रदर्शन किया.
- विभिन्न स्थानों पर सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की गई.
टीएमसी का आरोप है कि विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाकर भय का माहौल बनाया जा रहा है.
केवल हमले का मुद्दा नहीं, बुलडोजर कार्रवाई भी केंद्र में
पार्टी सूत्रों के अनुसार आंदोलन का फोकस सिर्फ अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी से जुड़ी घटनाएं नहीं हैं. टीएमसी ने हाल के दिनों में विभिन्न इलाकों में चलाए गए बुलडोजर अभियान को भी प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बना दिया है.
माना जा रहा है कि ममता बनर्जी अपने धरना कार्यक्रम के दौरान इस विषय को भी प्रमुखता से उठाएंगी और इसे आम लोगों की रोजी-रोटी से जोड़कर पेश करेंगी.
हॉकर्स और छोटे कारोबारियों के मुद्दे पर घेराबंदी
दमदम स्टेशन समेत कोलकाता के कई इलाकों में कथित तौर पर बिना पुनर्वास व्यवस्था के अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को टीएमसी ने मुद्दा बनाया है. पार्टी का कहना है कि विकास कार्यों का विरोध नहीं किया जा रहा, लेकिन छोटे दुकानदारों और फुटपाथ व्यवसायियों के रोजगार पर असर डालने वाली कार्रवाई स्वीकार्य नहीं है.
टीएमसी नेताओं का आरोप है कि हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित हुई है और सरकार को पहले पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए थी.
वोट बैंक के समीकरण पर भी नजर
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि शहरी क्षेत्रों में हॉकर्स और फुटपाथ व्यवसायी लंबे समय से टीएमसी के महत्वपूर्ण समर्थक माने जाते रहे हैं. ऐसे में पार्टी इस मुद्दे के जरिए अपने पारंपरिक समर्थक वर्ग को फिर से संगठित करने की कोशिश कर रही है.
नेताओं की मौजूदगी पर भी रहेगी नजर
धरना कार्यक्रम ऐसे समय आयोजित हो रहा है जब हाल ही में कालीघाट में हुई एक बैठक में अपेक्षा के अनुरूप विधायकों की उपस्थिति नहीं रही थी. दूसरी ओर कुछ पूर्व जनप्रतिनिधियों और स्थानीय निकायों से जुड़े नेताओं की गिरफ्तारी ने भी पार्टी के भीतर चर्चा का माहौल बनाया है.
इसी को देखते हुए टीएमसी नेतृत्व ने अपने सभी सांसदों, विधायकों और जिला अध्यक्षों को 2 जून के कार्यक्रम में शामिल होने का निर्देश दिया है.
संगठन की ताकत पर होगी परीक्षा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कार्यक्रम केवल विरोध प्रदर्शन नहीं बल्कि संगठनात्मक शक्ति का भी परीक्षण साबित हो सकता है. इससे यह संकेत मिलेगा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और विभिन्न जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बीच पार्टी नेतृत्व को कितना समर्थन प्राप्त है.
भाजपा ने आरोपों को किया खारिज
भारतीय जनता पार्टी ने टीएमसी के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है. भाजपा का कहना है कि जिन घटनाओं को हमला बताया जा रहा है, वे किसी सुनियोजित साजिश का हिस्सा नहीं थीं. पार्टी का दावा है कि यह स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया थी, जो कथित तौर पर लंबे समय से विभिन्न मुद्दों को लेकर नाराजगी जता रहे हैं.
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