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Bhagalpur News: बिहार सरकार की ओर से प्रस्तावित बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-2026 के विरोध में सोमवार को तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) में शिक्षकों ने मोर्चा खोल दिया. टीएमबीयू अतिथि शिक्षक संघ के बैनर तले प्रशासनिक भवन परिसर में महाधरना शुरू हुआ. आंदोलन को विश्वविद्यालय के शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों का भी समर्थन मिला. वहीं जिले के कॉलेजों और पीजी विभागों में शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर ड्यूटी करते हुए विरोध दर्ज कराया.
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100 से अधिक शिक्षक महाधरना में हुए शामिल
सुबह करीब 11:30 बजे अतिथि शिक्षक संघ के नेतृत्व में 100 से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाएं विश्वविद्यालय पहुंचे और प्रशासनिक भवन परिसर में धरने पर बैठ गए. प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर नया विश्वविद्यालय अधिनियम जबरन लागू करने का आरोप लगाया. उनका कहना था कि इस फैसले का विरोध केवल टीएमबीयू तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बिहार के सभी विश्वविद्यालयों में आंदोलन चलाया जाएगा.
महाधरना में पीएचडी डिग्रीधारक, शोधार्थी, सिंडिकेट व सीनेट सदस्य, नियमित एवं सेवानिवृत्त शिक्षक तथा शिक्षकेत्तर कर्मचारी भी शामिल हुए.
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यूजीसी के 2018 के विनियमों की अनदेखी का आरोप
अतिथि शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. आनंद आजाद ने कहा कि बिहार सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली-2026 में यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) के वर्ष 2018 के विनियमों की अनदेखी की गई है. इसके अलावा बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-1976 को समाप्त कर नया अधिनियम लागू करने की तैयारी विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को प्रभावित करेगी.
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और यूजीसी के प्रावधानों की रक्षा के लिए यह आंदोलन आगे भी जारी रहेगा.
कॉलेजों और पीजी विभागों में भी दिखा विरोध
नए विश्वविद्यालय अधिनियम के विरोध की गूंज सोमवार को जिले के कॉलेजों और पीजी विभागों में भी सुनाई दी. शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर अपने-अपने कार्यस्थलों पर ड्यूटी की और सरकार के प्रस्तावित विधेयक के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया.
टीएनबी कॉलेज शिक्षक संघ के सचिव निर्लेश कुमार ने कहा कि बिहार सरकार की प्रस्तावित व्यवस्था से कॉलेजों की स्वायत्तता प्रभावित होगी. यह उच्च शिक्षा की स्वतंत्र व्यवस्था के हित में नहीं है. उन्होंने कहा कि शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर सरकार तक अपना विरोध शांतिपूर्ण तरीके से पहुंचाने का प्रयास किया है.
पूरे बिहार में आंदोलन तेज करने की चेतावनी
धरना में शामिल शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने प्रस्तावित बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-2026 पर पुनर्विचार नहीं किया, तो आंदोलन को राज्यव्यापी बनाया जाएगा. उनका कहना था कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और यूजीसी के मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा.
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