Samrat Choudhary : भागलपुर समाहरणालय परिसर स्थित समीक्षा भवन में रविवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में श्रावणी मेला-2026 की तैयारियों और विभिन्न विकास परियोजनाओं की प्रगति को लेकर विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई. बैठक में भागलपुर, बांका और मुंगेर जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से मेला तैयारियों, सुरक्षा व्यवस्था और विकास कार्यों की स्थिति से मुख्यमंत्री को अवगत कराया. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से सभी तैयारियां पूरी करने का निर्देश देते हुए कहा कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है.
मेला तैयारियों का विस्तृत खाका मुख्यमंत्री के सामने रखा गया
बैठक के दौरान भागलपुर के जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी, मुंगेर के जिलाधिकारी निखिल धनराज निप्पानिकर और बांका के जिलाधिकारी नवदीप शुक्ला ने संयुक्त रूप से श्रावणी मेला-2026 की तैयारियों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया. अधिकारियों ने साफ-सफाई, स्वच्छता, पेयजल, विद्युत व्यवस्था, सड़क चौड़ीकरण और मरम्मत, चिकित्सा सेवाएं, एंबुलेंस सुविधा, खाद्य सामग्री की उपलब्धता, मूल्य नियंत्रण, सुरक्षा निगरानी, आपातकालीन संचार व्यवस्था, बैरिकेडिंग, टेंट सिटी और आवासन प्रबंधन समेत विभिन्न बिंदुओं पर की जा रही तैयारियों की जानकारी दी.

प्रस्तुतीकरण में मेला क्षेत्र में नवाचारों से जुड़े प्रस्ताव भी रखे गए. इनमें कांवरियों और श्रद्धालुओं के लिए स्विस कॉटेज की व्यवस्था, कृष्णगढ़ चौक से मस्जिद की ओर जाने वाली पोखर का जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण, नए गेस्ट हाउस का निर्माण तथा म्यूजिकल फाउंटेन स्थापित करने की योजनाएं शामिल रहीं.
सुरक्षा, स्वास्थ्य और यातायात व्यवस्था पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि श्रावणी मेला के दौरान पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित की जाए. उन्होंने कहा कि हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों से भी यहां पहुंचते हैं, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था में किसी तरह की कमी नहीं होनी चाहिए.
उन्होंने मेला क्षेत्र और कांवरिया पथ पर पर्याप्त संख्या में चिकित्सकों की तैनाती सुनिश्चित करने को कहा. साथ ही सुल्तानगंज, तारापुर, बेलहर, सुईया, कटोरिया और चानन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल की व्यवस्था करने का निर्देश दिया ताकि जाम और भीड़ नियंत्रण की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके.

धर्मशालाओं को पर्यटन नीति से जोड़ने का सुझाव
मुख्यमंत्री ने सुईया, कटोरिया, चानन और अन्य क्षेत्रों में बने धर्मशालाओं को चेन सिस्टम के तहत विकसित करने का सुझाव दिया. उन्होंने कहा कि इन्हें पर्यटन नीति से जोड़ा जाए और पीपीपी मोड में व्यवस्थित किया जाए ताकि ये सिर्फ मेले के दौरान ही नहीं, बल्कि पूरे वर्ष उपयोग में रह सकें.
15 जून तक बंद चापाकल चालू करने का निर्देश
बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि कांवरिया पथ पर मौजूद जर्जर बिजली तारों को मेला शुरू होने से पहले बदला जाए. रास्तों की मरम्मत और सुगम आवागमन सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया. उन्होंने निर्देश दिया कि 15 जून तक सभी बंद पड़े चापाकलों को चालू कर दिया जाए.
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आपदा या किसी आकस्मिक स्थिति की सूचना श्रद्धालुओं तक तुरंत पहुंचाने के लिए मेला क्षेत्र और कांवरिया पथ पर माइकिंग व्यवस्था सुनिश्चित की जाए. साथ ही मौसम संबंधी चुनौतियों को देखते हुए अस्थायी संरचनाओं का निर्माण तूफान और वज्रपात की आशंका को ध्यान में रखकर किया जाए.
खाद्य गुणवत्ता और मूलभूत सुविधाओं की निगरानी के निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की रैंडम जांच कराने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि कांवर यात्रा मार्गों और गंगा घाटों पर शुद्ध पेयजल, स्वच्छ शौचालय, चेंजिंग रूम, पर्याप्त रोशनी, भीड़ प्रबंधन और सुरक्षित आवागमन जैसी बुनियादी सुविधाएं हर हाल में उपलब्ध होनी चाहिए.
गंगा पथ परियोजना की भी हुई समीक्षा
समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी भागलपुर ने मुंगेर (साफियाबाद)-सुल्तानगंज-सबौर चार लेन गंगा पथ परियोजना की प्रगति से भी मुख्यमंत्री को अवगत कराया. इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि भागलपुर और मुंगेर गंगा पथ परियोजनाओं से जुड़ी समस्याओं का जल्द समाधान किया जाए.
उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र डॉल्फिन संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण है, इसलिए परियोजना से जुड़े निर्णय पर्यावरणीय पहलुओं को ध्यान में रखकर लिए जाएं. मुख्यमंत्री ने कहा कि एलिवेटेड सड़क बनने से क्षेत्र में जलजमाव की समस्या कम करने में भी मदद मिलेगी.
विक्रमशिला विश्वविद्यालय पुनर्स्थापना पर तेजी लाने के निर्देश
बैठक के दौरान विक्रमशिला विश्वविद्यालय की पुनर्स्थापना योजना की भी समीक्षा की गई. जिलाधिकारी ने भूमि अधिग्रहण, भुगतान प्रक्रिया और विश्वविद्यालय के अस्थायी संचालन के लिए बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में प्रस्तावित व्यवस्था की जानकारी दी.
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेजी लाने और 15 जून से पहले भारत सरकार को आवश्यक पत्र भेजने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि विक्रमशिला विश्वविद्यालय का इतिहास गौरवशाली रहा है और इसके पुनर्स्थापन को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाना चाहिए.
विक्रमशिला सेतु पर 30 नवंबर तक परिचालन शुरू करने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने विक्रमशिला सेतु के पुनर्स्थापन और मरम्मत कार्य की भी समीक्षा की. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कार्य में तेजी लाकर 30 नवंबर तक हर हाल में सेतु पर वाहनों का परिचालन शुरू कराया जाए.
उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सेतु पर आवागमन सामान्य नहीं हो जाता, तब तक निजी दोपहिया और चारपहिया वाहनों से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाए.

203 करोड़ की 84 योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास
समीक्षा बैठक से पहले मुख्यमंत्री ने समाहरणालय परिसर में रिमोट के माध्यम से 203 करोड़ रुपये की लागत वाली 84 विकास योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया. इनमें 69 योजनाओं का उद्घाटन और 15 योजनाओं का शिलान्यास शामिल रहा.
विक्रमशिला सेतु का किया स्थल निरीक्षण
बैठक से पहले मुख्यमंत्री ने विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से पर चल रहे पुनर्स्थापन और मरम्मत कार्य का भी निरीक्षण किया. उन्होंने अधिकारियों को सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए कार्य को गति देने का निर्देश दिया.

पत्रकारों के सवाल पर क्या बोले मुख्यमंत्री
विक्रमशिला सेतु पर यातायात बहाली को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि 30 जून तक किसी भी स्थिति में वाहनों का परिचालन सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि क्षतिग्रस्त हिस्से पर पुनर्स्थापन कार्य तेजी से चल रहा है और सेतु के सुपर स्ट्रक्चर को लेकर निर्माण एजेंसी से दोबारा अध्ययन कराया जाएगा.
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि जब तक सेतु पर सामान्य आवागमन बहाल नहीं हो जाता, तब तक निजी दोपहिया और चारपहिया वाहनों से पार्किंग शुल्क की वसूली पूरी तरह बंद रहेगी.
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