Jharkhand Cyber Crime News: बोकारो जिले समेत कई इलाकों में साइबर अपराधियों ने लोगों को ठगने के लिए नया तरीका अपनाना शुरू कर दिया है. देश में प्रस्तावित जनगणना को आधार बनाकर शातिर गिरोह अब खुद को जनगणना कर्मी या सर्वे अधिकारी बताकर लोगों से संपर्क कर रहे हैं. चास क्षेत्र में ऐसी शिकायतें सामने आने के बाद प्रशासन और साइबर सेल ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है. अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल जनगणना के नाम पर किसी भी तरह की गोपनीय जानकारी साझा करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है.
डिजिटल फॉर्म पूरा कराने के बहाने किया जा रहा संपर्क
जानकारी के अनुसार साइबर अपराधी लोगों को फोन कर दावा करते हैं कि उनके घर का सूचीकरण कार्य पूरा हो चुका है और प्रारंभिक चरण की सूचनाएं मोबाइल एप में दर्ज कर दी गई हैं. इसके बाद वे कहते हैं कि प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए मोबाइल पर एक ओटीपी भेजा जाएगा, जिसे तुरंत साझा करना होगा.
कई लोग सरकारी प्रक्रिया समझकर उनकी बातों पर भरोसा कर लेते हैं. जैसे ही ओटीपी साझा किया जाता है, ठग बैंक खाते तक पहुंच बनाने या मोबाइल डिवाइस पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश करते हैं. इसके बाद आर्थिक नुकसान होने की आशंका बढ़ जाती है.
जनगणना कार्य में नहीं मांगी जाती वित्तीय जानकारी
चास के प्रखंड विकास पदाधिकारी डॉ. प्रदीप कुमार ने स्पष्ट किया है कि जनगणना से जुड़े प्रगणक, सर्वेयर और सुपरवाइजर केवल अधिकृत सर्वे कार्य कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि किसी भी आवासधारी से बैंक खाते की जानकारी, वित्तीय विवरण, आधार संख्या या अन्य गोपनीय सूचनाएं नहीं मांगी जाती हैं.
उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि कोई व्यक्ति जनगणना का हवाला देकर निजी या वित्तीय जानकारी मांगता है, तो उसकी बातों में न आएं और तत्काल इसकी सूचना संबंधित प्रखंड कार्यालय को दें.
मोबाइल नंबर का इस्तेमाल सिर्फ पुष्टि संदेश के लिए
डॉ. प्रदीप कुमार ने बताया कि जनगणना कर्मियों द्वारा मोबाइल नंबर केवल एक विशेष उद्देश्य से लिया जा रहा है. जनगणना प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित आवासधारी को आधिकारिक पुष्टि संदेश भेजा जाता है, ताकि उन्हें जानकारी मिल सके कि उनके घर का सर्वेक्षण कार्य पूरा हो चुका है. इसके अलावा किसी अन्य उद्देश्य से मोबाइल नंबर का उपयोग नहीं किया जाता.
लंबे समय तक कॉल पर रहना भी हो सकता है खतरनाक
बोकारो साइबर थाना के इंस्पेक्टर एवं साइबर विशेषज्ञ अनिल कच्छप ने भी इस नए साइबर ट्रेंड को लेकर लोगों को सावधान किया है. उन्होंने कहा कि अनजान कॉलर के साथ किसी भी स्थिति में ओटीपी साझा नहीं करना चाहिए. कई मामलों में अपराधी बातचीत के दौरान ही लोगों को मानसिक रूप से भ्रमित कर जानकारी हासिल कर लेते हैं.
साइबर विशेषज्ञ ने दी ये महत्वपूर्ण सलाह
- किसी भी व्यक्ति को मोबाइल पर प्राप्त ओटीपी न बताएं, चाहे वह खुद को सरकारी अधिकारी ही क्यों न बताए.
- यदि कोई जनगणना या अन्य सरकारी प्रक्रिया का हवाला देकर बार-बार ओटीपी मांग रहा हो, तो तुरंत कॉल समाप्त कर दें.
- संदिग्ध कॉल करने वालों से अनावश्यक रूप से लंबी बातचीत न करें.
- साइबर अपराधी आधुनिक तकनीकों और टूल्स का इस्तेमाल कर लंबे समय तक बातचीत के दौरान मोबाइल को निशाना बनाने की कोशिश कर सकते हैं.
- किसी भी संदिग्ध कॉल, संदेश या गतिविधि की जानकारी तुरंत निकटतम थाना या साइबर पुलिस स्टेशन को दें.
- शिकायत दर्ज कराने से ऐसे नंबरों पर कार्रवाई करने और अन्य लोगों को ठगी का शिकार होने से बचाने में मदद मिलती है.
प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की
प्रशासन और साइबर विभाग का कहना है कि जनगणना के नाम पर सामने आया यह नया साइबर तरीका तेजी से फैल सकता है. ऐसे में लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है. अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी सरकारी प्रक्रिया में ओटीपी, बैंकिंग जानकारी या अन्य संवेदनशील डेटा फोन पर साझा नहीं करना चाहिए. थोड़ी सी सतर्कता लोगों को बड़े आर्थिक नुकसान से बचा सकती है.
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