इस खबर में क्या है?
Samrat Choudhary : बिहार में महिलाओं को सिर्फ सरकारी सहायता तक सीमित रखने के बजाय उनकी आमदनी के स्थायी साधन तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है. ‘समृद्ध महिला-समृद्ध बिहार’ अभियान के जरिए सरकार ने वर्ष 2030 तक एक करोड़ अतिरिक्त जीविका दीदियों को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए महिलाओं को स्वरोजगार, छोटे कारोबार, पशुपालन और बाजार से जोड़ने की योजना है. अभियान के अगले पांच वर्षों में अलग-अलग योजनाओं के संसाधनों को मिलाकर करीब 20 हजार करोड़ रुपये जुटाने की परिकल्पना की गई है.
सरकार की योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने के साथ उनके लिए कमाई के ऐसे साधन विकसित करने की है, जिन्हें वे आगे भी जारी रख सकें.
आर्थिक मदद से आगे कमाई के साधन बनाने की तैयारी
अभियान में महिलाओं के लिए केवल वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के बजाय उन्हें आय अर्जित करने वाली गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया गया है. इसके तहत छोटे कारोबार, स्वरोजगार, पशुपालन और बाजार से जुड़ाव को बढ़ावा देने की योजना है.
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सरकार का लक्ष्य है कि महिलाएं अपनी कमाई बढ़ाने के साथ अपने कारोबार को भी आगे बढ़ा सकें. इसी सोच के तहत अगले पांच वर्षों में विभिन्न योजनाओं के संसाधनों को एक साथ लाकर करीब 20 हजार करोड़ रुपये जुटाने की परिकल्पना की गई है.
10 लाख महिला उद्यमियों को मिल सकती है पांच लाख तक की मदद
अभियान के तहत करीब 10 लाख महिला उद्यमियों को बैंक और वित्तीय संस्थानों के माध्यम से पांच लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की योजना है. इसका उद्देश्य महिलाओं को नया कारोबार शुरू करने या पहले से चल रहे काम का विस्तार करने में मदद देना है.
हालांकि, पांच लाख रुपये तक की सहायता का मतलब यह नहीं है कि हर महिला को निश्चित रूप से इतनी राशि मिलेगी. सहायता की पात्रता और शर्तें संबंधित योजनाओं के नियमों के अनुसार तय होंगी.
पशुपालन से जुड़ेंगी करीब 60 लाख महिलाएं
महिलाओं की आमदनी बढ़ाने के लिए पशुपालन को भी अभियान का अहम हिस्सा बनाया गया है. करीब 60 लाख महिलाओं को पशुपालन और इससे जुड़े क्षेत्रों में छोटे उद्यम स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करने की योजना है.
इसका मकसद महिलाओं को ग्रामीण स्तर पर ऐसे काम से जोड़ना है, जिससे परिवार की आय में उनकी सीधी भागीदारी बढ़े और वे पशुपालन को छोटे कारोबार के रूप में आगे बढ़ा सकें.
25 लाख महिला-केंद्रित उद्यमों पर जोर
अभियान में औद्योगिक और निर्माण क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की भी योजना है. इसके तहत करीब 25 लाख महिला-केंद्रित विनिर्माण और सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने का प्रस्ताव है.
इस पहल के जरिए महिलाओं को केवल स्वरोजगार तक सीमित रखने के बजाय उत्पादन और कारोबार की गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है. हालांकि, इन उद्यमों की स्थापना की विस्तृत समयसीमा और लक्ष्य को लेकर आधिकारिक जानकारी की पुष्टि जरूरी होगी.
लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य सबसे बड़ा हिस्सा
अभियान का सबसे बड़ा लक्ष्य वर्ष 2030 तक एक करोड़ अतिरिक्त महिलाओं को लखपति दीदी बनाना है. 27 अगस्त 2026 को अभियान की शुरुआत के समय राज्य में करीब 50 लाख महिलाओं के लखपति दीदी बनने की उपलब्धि का दावा किया गया था.
लखपति दीदी अभियान का उद्देश्य महिलाओं की आय बढ़ाकर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है. इसके लिए महिलाओं को ऐसे कामों से जोड़ने की योजना है, जिनसे नियमित कमाई हो और आगे कारोबार बढ़ाने की गुंजाइश भी बनी रहे.
जीविका के 20 साल में महिलाओं की भूमिका पर जोर
रोहतास के सासाराम स्थित पायलट बाबा धाम परिसर में ‘नीतीश संवाद-जीविका के 20 साल बेमिसाल’ कार्यक्रम के दौरान भी जीविका से जुड़ी महिलाओं के योगदान पर चर्चा हुई. कार्यक्रम में बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने जीविका से जुड़ी महिलाओं के योगदान की सराहना की.
उन्होंने कहा कि दो अक्टूबर 2006 को महिलाओं की स्थिति बदलने के उद्देश्य से जीविका की शुरुआत की गई थी. समय के साथ यह बिहार का बड़ा सामाजिक आंदोलन बन गया.
77 हजार से ज्यादा स्वयं सहायता समूहों का भी जिक्र
कार्यक्रम में स्वयं सहायता समूहों की संख्या 77 हजार से अधिक और उनसे जुड़ी जीविका दीदियों की संख्या 11 लाख 84 हजार बताई गई. ये दोनों अलग-अलग आंकड़े हैं, इसलिए इन्हें राज्य में जीविका से जुड़ी महिलाओं की कुल संख्या के समान नहीं माना जा सकता.
‘समृद्ध महिला-समृद्ध बिहार’ अभियान में अब महिलाओं की आय बढ़ाने के लिए स्वरोजगार, उद्यम, पशुपालन और बाजार से जुड़ाव को एक साथ आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है. सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक एक करोड़ अतिरिक्त महिलाओं को लखपति दीदी बनाना है.
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