इस खबर में क्या है?
Rohini Acharya Patna Return: लालू प्रसाद के बुलावे पर रोहिणी आचार्य का पटना लौटना बिहार की राजनीति में चर्चा का नया विषय बन गया है. विधानसभा चुनाव में आरजेडी की हार के बाद तेजस्वी यादव के साथ विवाद की चर्चाओं के बीच रोहिणी सिंगापुर चली गई थीं. अब उनकी वापसी ऐसे समय हुई है, जब आरजेडी विधान परिषद चुनाव की तैयारियों में जुटी है और पार्टी ने आठ में से छह सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं.
रोहिणी ने पटना पहुंचते ही अपनी वापसी को पारिवारिक मामला बताया और कहा कि इसे राजनीति के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए. इसके बावजूद पार्टी के भीतर उनकी संभावित भूमिका को लेकर चर्चा शुरू हो गई है. पार्टी सूत्रों का दावा है कि आरजेडी उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी देने पर विचार कर रही है.
इसे भी पढ़ें-जन सुराज को बड़ा झटका, भूषण झा ने लौटाया टिकट; तिरहुत शिक्षक सीट पर बदला उम्मीदवार
लालू-राबड़ी से मुलाकात ने बदली चर्चा की दिशा
पटना एयरपोर्ट पर रोहिणी आचार्य का स्वागत करने लालू प्रसाद और राबड़ी देवी पहुंचे. मीसा भारती भी इस दौरान मौजूद थीं. रोहिणी अपने पिता और मां से गले मिलती नजर आईं. लालू प्रसाद का खुद बेटी को रिसीव करने पहुंचना इस वापसी को लेकर चर्चा का अहम हिस्सा बन गया.
एयरपोर्ट की इस मुलाकात के बाद परिवार के भीतर पहले से चल रही विवाद की चर्चाओं पर भी लोगों की नजर गई. हालांकि, तेजस्वी यादव एयरपोर्ट पर मौजूद नहीं थे. आरजेडी प्रवक्ता चितरंजन गगन ने इसकी वजह बताते हुए कहा कि तेजस्वी यादव दिल्ली में थे, इसलिए वह पटना एयरपोर्ट नहीं पहुंच सके.
वापसी के वक्त ही पार्टी में बड़ी भूमिका की चर्चा
रोहिणी ने भले ही अपनी पटना वापसी को राजनीति से अलग बताया हो, लेकिन पार्टी सूत्रों के मुताबिक आरजेडी में उनकी भूमिका को लेकर विचार-विमर्श चल रहा है. सूत्रों का दावा है कि लालू प्रसाद ने इस संबंध में पार्टी के शीर्ष नेताओं और परिवार के सदस्यों से बातचीत भी की है.
अभी तक रोहिणी आचार्य को कोई नई जिम्मेदारी दिए जाने की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. इसलिए पार्टी में उनकी संभावित भूमिका को लेकर चल रही चर्चाएं फिलहाल औपचारिक फैसले में तब्दील नहीं हुई हैं.
इसे भी पढ़ें-दिल्ली में अब उतरेंगे प्रशांत किशोर, जन सुराज की राष्ट्रीय राजधानी में एंट्री की तैयारी
एमएलसी चुनाव के बीच क्यों अहम हुई वापसी
रोहिणी आचार्य की वापसी का समय भी राजनीतिक चर्चा की वजह बना है. बिहार में विधान परिषद की आठ सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान होना है. आरजेडी ने इनमें से छह सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं.
तीन सीटों पर आरजेडी और कांग्रेस के उम्मीदवार आमने-सामने हैं. दोनों दलों के अलग-अलग प्रत्याशी उतारने के बाद महागठबंधन के भीतर चुनावी तालमेल को लेकर सवाल उठ रहे हैं. ऐसे समय में रोहिणी का पटना लौटना उनकी संभावित राजनीतिक सक्रियता को लेकर चर्चा का आधार बन गया है.
सीधे बोलने वाली छवि से बढ़ी राजनीतिक दिलचस्पी
रोहिणी आचार्य को करीब से जानने वाले लोगों के मुताबिक वह अपनी बात सीधे तौर पर रखने के लिए जानी जाती हैं. सिंगापुर में रहते हुए भी उनके सोशल मीडिया पोस्ट राजनीतिक मुद्दों से जुड़े रहे हैं.
उन्होंने आरजेडी में हुई नई नियुक्तियों और पार्टी से जुड़े कुछ फैसलों पर सवाल उठाए थे. ऐसे में पटना लौटने के बाद उनके अगले कदम पर नजरें टिक गई हैं. हालांकि, वह खुद फिलहाल राजनीति में सक्रिय होने की बात नहीं कह रही हैं.
‘राजनीति के लिए नहीं आई हूं’, आगे क्या होगा?
पटना पहुंचने के बाद रोहिणी ने कहा कि वह अपने माता-पिता के साथ रहने के लिए आई हैं. उन्होंने साफ कहा कि उनके आने को राजनीति के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए.
इसे भी पढ़ें-ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग के बीच BJP नेता बोले- मुख्य चुनाव आयुक्त को मिले पद्म भूषण
अब असली सवाल उनकी आगे की भूमिका को लेकर है. यदि आरजेडी उन्हें कोई जिम्मेदारी देती है तो उनकी पटना वापसी का राजनीतिक अर्थ अलग होगा. फिलहाल ऐसी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है और इसलिए पार्टी के अगले फैसले का इंतजार है.
इसे भी पढ़ें-



