Singhnan Durga Temple : बांका जिले के रजौन अंचल के सिंहनान गांव स्थित ऐतिहासिक दुर्गा मंदिर में बंगाली परंपरा के अनुसार बोधनवमी कलश की विधिवत स्थापना की गई. करीब 1855 में चोवालाल दत्ता द्वारा स्थापित इस मंदिर में आज भी कायस्थ समाज की ओर से बांग्ला विधि-विधान से दुर्गा पूजा संपन्न कराई जाती है. मंदिर की विशिष्ट पूजा परंपरा और मान्यताओं के कारण इसे क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में विशेष स्थान प्राप्त है.
Singhnan Durga Temple : बेटी के रूप में मां दुर्गा को दिया मायके आने का निमंत्रण
बंगाली परंपरा में मां दुर्गा को देवी के साथ बेटी के रूप में भी मायके आने का निमंत्रण देने की मान्यता है. इसी परंपरा के तहत कलश स्थापना से एक दिन पहले ‘लियावन’ की रस्म निभाई गई. मेढपति खानदान की महिला लवली दत्ता ने विधि-विधान से मां दुर्गा का ‘लियावन’ पूजन कर उन्हें दुर्गा पूजा के लिए आमंत्रित किया.
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इसी दौरान मंदिर के नवनिर्मित द्वार पर द्वारपाल की तेल और सिंदूर से पूजा की गई. इसके बाद चानन नदी से बोधनवमी का कलश लाकर मंदिर में विधिवत स्थापित किया गया.
नौ कौड़ियां लुटाने की है परंपरा
कलश पूजा के दौरान नौ कौड़ियां लुटाई गईं. मान्यता है कि इन कौड़ियों को पाना शुभ होता है. श्रद्धालु इन्हें घर में सिंदूर की डिबिया में रखते हैं और इसे सुहाग की लंबी उम्र एवं सुख-समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है.
प्रथम पूजा से सात दिन पहले होती है कलश स्थापना
सिंहनान मंदिर में बोधनवमी कलश स्थापना का विशेष महत्व है. सामान्य तौर पर दुर्गा पूजा के दौरान कलश स्थापना प्रथम पूजा के दिन होती है, लेकिन इस मंदिर में प्रथम पूजा से सात दिन पहले बोधनवमी के दिन ही कलश स्थापित करने की परंपरा है.
नवमी तक चलेगा चंडी पाठ
कलश स्थापना के साथ ही लगातार 16 दिनों तक चंडी पाठ का आयोजन होगा. पुजारी शंभु झा ने चंडी पाठ शुरू किया, जो नवमी तक चलेगा. नवमी के दिन हवन के साथ विधिवत अनुष्ठान संपन्न होगा.
250 साल से अधिक पुराना है मंदिर का श्रृंगार
मंदिर का प्राचीन श्रृंगार भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है. इसे पुराने मंदिर से लाया गया था और इसकी परंपरा करीब 250 वर्षों से अधिक पुरानी बताई जाती है.
पूजा व्यवस्था में स्थानीय कायस्थ समाज की समिति सक्रिय भूमिका निभा रही है. समिति में जग नारायण दत्ता संरक्षक, मनोज कुमार घोष अध्यक्ष और राजेश कुमार दत्ता सचिव हैं. इनके साथ समाज के कई सदस्य पूजा की तैयारियों और आयोजन व्यवस्था में जुटे हुए हैं.
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