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Gumla Sarhul Mahotsav 2026: प्रकृति पूजा का संदेश देगा सरहुल, भव्य जुलूस की पूरी तैयारी

Gumla Sarhul Mahotsav 2026: गुमला में सरहुल महोत्सव को लेकर तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और 21 मार्च को भव्य जुलूस निकाला जाएगा. यह पर्व आदिवासी समाज की आस्था, परंपरा और प्रकृति से जुड़ाव का प्रतीक है. जानें जुलूस का रूट, नियम और सरहुल पर्व का महत्व.

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Gumla Sarhul Mahotsav 2026: गुमला में सरहुल महोत्सव को लेकर तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और 21 मार्च को भव्य जुलूस निकाला जाएगा. यह पर्व आदिवासी समाज की आस्था, परंपरा और प्रकृति से जुड़ाव का प्रतीक है. जानें जुलूस का रूट, नियम और सरहुल पर्व का महत्व.

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Gumla Sarhul Mahotsav 2026: गुमला में मनाया जाने वाला सरहुल पर्व आदिवासी समाज की आस्था, परंपरा और प्रकृति से जुड़ाव का प्रतीक माना जाता है. यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि सामाजिक एकता और पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश देता है. सरहुल को सूर्य और धरती के पवित्र मिलन के रूप में देखा जाता है, जिसमें सरना स्थल पर पूजा-अर्चना कर वर्षा और कृषि की संभावनाओं का आकलन किया जाता है. आदिवासी समुदाय के लिए यह पर्व नए वर्ष की शुरुआत का संकेत भी होता है, जिसे पूरे उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है.

सरहुल: परंपरा, एकता और प्रकृति का संगम

केंद्रीय सरहुल संचालन समिति के सचिव दीपनारायण उरांव के अनुसार सरहुल को स्थानीय भाषा में खद्दी भी कहा जाता है. इस पर्व की शुरुआत पूर्व संध्या कार्यक्रम से होती है, जिसमें समाज के लोग पारंपरिक वेशभूषा में एकत्र होकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं. यह आयोजन समाज को एकजुट करने का कार्य करता है और आपसी भाईचारे को मजबूत बनाता है. उन्होंने बताया कि सरहुल के माध्यम से आदिवासी समाज पूरी दुनिया को प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने का संदेश देता है.

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उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासी समाज सदियों से पर्यावरण संरक्षण की परंपरा का पालन करता आ रहा है. आज जब पूरी दुनिया प्रकृति को बचाने की बात कर रही है, तब यह समुदाय पहले से ही इस दिशा में कार्यरत है. प्रकृति के साथ छेड़छाड़ के दुष्परिणाम अब सामने आने लगे हैं, जिससे विभिन्न प्रकार की बीमारियां बढ़ रही हैं. ऐसे में सभी लोगों को पर्यावरण की रक्षा के लिए आगे आना चाहिए.

जुलूस की तैयारी पूरी, कई स्थानों पर होगी पूजा

केंद्रीय सरहुल संचालन समिति गुमला द्वारा 21 मार्च को सरहुल महोत्सव के तहत भव्य सांस्कृतिक जुलूस निकाला जाएगा. समिति की ओर से जानकारी दी गई है कि सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. दुंदुरिया उरांव सरना क्लब में सुबह 11 बजे पूजा-अर्चना होगी, जबकि दोपहर एक बजे प्रसाद वितरण किया जाएगा. इसके अलावा शहर के विभिन्न क्षेत्रों जैसे गुमला सरना पालकोट रोड, वन विभाग कॉलोनी, चेटर, करमटोली, मुरली बगीचा, शास्त्री नगर, शांति नगर, आदर्श नगर ढोढरीटोली और पुग्गू दाउद नगर में भी पूजा का आयोजन होगा.

दोपहर दो बजे से सांस्कृतिक जुलूस निकाला जाएगा, जो उरांव क्लब दुंदुरिया से शुरू होकर थाना चौक, चैनपुर चौक, मेन रोड, टावर चौक, पालकोट रोड, झंडा स्थल और पाट स्थल होते हुए वापस अपने प्रारंभिक स्थान पर समाप्त होगा. विभिन्न मार्गों से आने वाले जुलूस मुख्य जुलूस में शामिल होंगे. समिति की ओर से जुलूस में शामिल खोड़हा दलों को झंडा प्रदान किया जाएगा और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को सम्मानित भी किया जाएगा.

जुलूस में डीजे और नशापान पर सख्त रोक

समिति ने स्पष्ट निर्देश जारी किया है कि सांस्कृतिक जुलूस के दौरान डीजे, नशापान और अबीर के उपयोग पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध रहेगा. आयोजन को पारंपरिक और अनुशासित तरीके से संपन्न कराने पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि इसकी सांस्कृतिक गरिमा बनी रहे.

प्रकृति संरक्षण का संदेश दे रहा सरहुल

आदिवासी युवा नेता कृष्णा उरांव ने बताया कि इस वर्ष सरहुल पर्व को लेकर युवाओं में विशेष उत्साह है. शहर के विभिन्न छात्रावासों द्वारा पारंपरिक वेशभूषा में जुलूस निकालने की तैयारी की जा रही है. उन्होंने सभी लोगों से अपील की कि इस पर्व को मिलजुलकर मनाएं और प्रकृति के संरक्षण का संकल्प लें.

वहीं, युवा नेता मिशिर कुजूर ने कहा कि सरहुल प्रकृति पूजक आदिवासियों का प्रमुख पर्व है, जिसमें साल वृक्ष और सरई फूल का विशेष महत्व होता है. इस अवसर पर पहान और पहनाईन के माध्यम से धरती और सूर्य का प्रतीकात्मक विवाह कराया जाता है. यह पर्व प्रकृति के प्रति सम्मान और संरक्षण की भावना को मजबूत करता है. उन्होंने कहा कि सरहुल हमें यह सिखाता है कि प्रकृति की रक्षा करना ही मानव जीवन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है.

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Soni
सोनी कुमारी
सोनी कुमारी डिजिटल मीडिया क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार हैं और Hellocities24 में ऑथर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार समेत देशभर की ताजा खबरों, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक मुद्दों पर लेखन करती हैं. पाठकों तक तेज और भरोसेमंद खबरें पहुंचाना प्रमुख उद्देश्य है.
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