Eastern Railway Farakka Track: फरक्का क्षेत्र में लगातार हुई भारी बारिश ने रेल परिचालन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी. 3 सितंबर की रात न्यू फरक्का और तिलडांगा के बीच तटबंध में भूधंसाव के बाद अप ट्रैक धंस गया. मानसून गश्ती पर तैनात रेलकर्मियों की सतर्कता से समय रहते ट्रैक में आई गड़बड़ी का पता चला, जिसके बाद सुरक्षा के लिए तत्काल परिचालन रोक दिया गया.
Eastern Railway Farakka Track: पानी के रिसाव से नरम हुई जमीन, धंसा ट्रैक
भारी बारिश के कारण अप और डाउन लाइनों के बीच बने तटबंध में पानी रिसने लगा. अप दिशा में मौजूद एक तालाब से आए पानी ने स्थिति को और गंभीर कर दिया. पानी के संयुक्त दबाव से मिट्टी का तेज कटाव हुआ और कीचड़ वाली जमीन कमजोर पड़ गई. इसके चलते अप ट्रैक धंस गया.
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ट्रैक में विचलन की जानकारी मिलते ही परमानेंट वे इंस्पेक्टर और आपातकालीन टीमें मौके पर पहुंचीं. इसके बाद युद्धस्तर पर बहाली का काम शुरू किया गया.
जीएम की निगरानी में रातभर चला काम
पूर्व रेलवे की महाप्रबंधक गीतिका पांडे के प्रत्यक्ष मार्गदर्शन में बहाली अभियान को तेज किया गया. प्रधान मुख्य इंजीनियर विक्रम गुप्ता, मालदा मंडल के अधिकारी, वरिष्ठ रेलकर्मी और ग्राउंड स्टाफ भी मौके पर लगातार जुटे रहे.
गीतिका पांडे ने कहा कि विपरीत मौसम में रेलवे की पहली प्राथमिकता परिचालन की सुरक्षा और सेवाओं की जल्द बहाली है. गश्ती टीम की सतर्कता और कर्मचारियों की चौबीसों घंटे की मेहनत यात्री सुरक्षा के प्रति रेलवे की प्रतिबद्धता को दिखाती है.
6 पाइलिंग रिग और 200 कर्मचारी पहले लगाए गए
ट्रैक को स्थिर करने के लिए रेल पाइलिंग और स्टोन डस्ट पैकिंग का काम शुरू किया गया. शुरुआती चरण में 6 पाइलिंग रिग और करीब 200 फ्रंटलाइन कर्मचारियों को लगाया गया.
रात में काम तेज करने के लिए 100 स्थानीय श्रमिकों और हावड़ा मंडल के अजीमगंज से 100 अतिरिक्त कर्मचारियों को भी बुलाया गया. बहाली के लिए स्टोन डस्ट के 7 वैगन मौके पर उतारे गए, जबकि सुजनीपारा मानसून रिजर्व से 10 वैगन और जमालपुर, भागलपुर व मालदा टाउन में तैयार 18 अतिरिक्त वैगन भी उपलब्ध रखे गए.
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वैकल्पिक व्यवस्था से जारी रहा ट्रेनों का परिचालन
ट्रैक प्रभावित होने के बावजूद रेलवे ने वैकल्पिक व्यवस्था, नियंत्रित गति, डायवर्जन और लोको रिवर्सल के जरिए ट्रेनों का परिचालन जारी रखा. इससे यात्रियों को राहत मिली और रेल संपर्क पूरी तरह बाधित होने से बचाया गया.
फंसे यात्रियों के लिए शुरू हुई इमरजेंसी कैटरिंग
रेलवे के वाणिज्यिक विभाग ने प्रभावित स्टेशनों पर यात्रियों के लिए तत्काल खान-पान और पेयजल की व्यवस्था की.
तिलडांगा स्टेशन: यहां कम समय में अस्थायी कैटरिंग काउंटर बनाया गया, जहां स्नैक्स, भोजन और पैकेज्ड पानी उपलब्ध कराया गया.
बल्लालपुर (BPBS): स्थानीय कैटरिंग की व्यवस्था कर केले, अंकुरित चना, खीरा, बादाम मसाला, पैक्ड भोजन और पेयजल उपलब्ध कराया गया. मालदा से अतिरिक्त कैटरिंग स्टाफ और सामग्री भी भेजी गई.
न्यू फरक्का जंक्शन: रेलवे के दोनों मौजूदा कैटरिंग स्टॉल रातभर और सुबह तक खुले रहे. यात्रियों की बढ़ी मांग को देखते हुए पर्याप्त खाद्य सामग्री का स्टॉक रखा गया.
IIT और AI की मदद से भविष्य में रोकथाम की तैयारी
पूर्व रेलवे मानसून के बाद जल निकायों से जुड़ी मिट्टी की स्थिति का विस्तृत अध्ययन कराने की तैयारी में है. इसके लिए IIT के साथ सहयोग और AI आधारित तकनीक के इस्तेमाल की योजना बनाई जा रही है, ताकि भविष्य में भूस्खलन और जमीन धंसने जैसी घटनाओं की पहचान और रोकथाम बेहतर तरीके से की जा सके.
पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझी ने कहा कि प्राकृतिक आपदा के समय रेलवे का प्राथमिक लक्ष्य यात्रियों की सुरक्षा, ट्रेनों की सुचारू बहाली और प्रभावित यात्रियों को तत्काल मानवीय सहायता उपलब्ध कराना है.
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