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लिलुआ कारखाने में बायो-टैंक सफाई का बदला तरीका, मैनुअल काम खत्म कर अपनाई मशीनीकृत व्यवस्था

Lilua Coach Factory : पूर्व रेलवे के लिलुआ कारखाने में कोचों के बायो-टैंकों की ओवरहॉलिंग के लिए जोखिमपूर्ण मैनुअल सफाई की जगह मशीनीकृत और मानकीकृत व्यवस्था शुरू की गई है. कस्टम मोटराइज्ड मैनिपुलेटर्स और 40 किलोलीटर प्रतिदिन क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की मदद से श्रमिक सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत किया गया है. कारखाना आगे स्मार्ट ऑटोमेशन, जल पुनर्चक्रण, तकनीकी प्रशिक्षण और राष्ट्रीय स्तर के मानकीकरण की दिशा में भी काम कर रहा है.

Edited By :Soni Kumari
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Lilua Coach Factory : पूर्व रेलवे के लिलुआ कारखाने में कोचों के बायो-टैंकों की ओवरहॉलिंग के लिए जोखिमपूर्ण मैनुअल सफाई की जगह मशीनीकृत और मानकीकृत व्यवस्था शुरू की गई है. कस्टम मोटराइज्ड मैनिपुलेटर्स और 40 किलोलीटर प्रतिदिन क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की मदद से श्रमिक सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत किया गया है. कारखाना आगे स्मार्ट ऑटोमेशन, जल पुनर्चक्रण, तकनीकी प्रशिक्षण और राष्ट्रीय स्तर के मानकीकरण की दिशा में भी काम कर रहा है.

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Lilua Coach Factory: पूर्व रेलवे के सवारी एवं मालडिब्बा कारखाना, लिलुआ में कोचों के बायो-टैंकों की आवधिक ओवरहॉलिंग को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है. जोखिमपूर्ण मैनुअल सफाई की जगह अब मानकीकृत और मशीनीकृत प्रणाली अपनाई गई है. इसके साथ 40 किलोलीटर प्रतिदिन क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को जोड़ा गया है, जिससे श्रमिकों की सुरक्षा बढ़ाने के साथ अपशिष्ट जल के सीधे उत्सर्जन को रोकने की व्यवस्था की गई है.

यह पहल पूर्व रेलवे की महाप्रबंधक गीतिका पांडेय के नेतृत्व और मार्गदर्शन में शुरू की गई है. कस्टम मोटराइज्ड मैनिपुलेटर्स को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़कर लिलुआ कारखाने ने बायो-टैंक ओवरहॉलिंग की पूरी प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने की दिशा में कदम उठाया है.

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Lilua Coach Factory: चार क्षेत्रों में किया गया बड़ा बदलाव

मुख्य कारखाना प्रबंधक/लिलुआ यतीश कुमार के निर्देशन में कारखाने ने परिचालन व्यवस्था में चार प्रमुख स्तरों पर बदलाव किया है.

सफाई प्रक्रिया में रोगजनक स्लज की पारंपरिक मैनुअल स्क्रैपिंग को हटाकर 360 डिग्री मोटराइज्ड रोटेशनल मैनिपुलेटर्स और हाई-प्रेशर जेट्स का इस्तेमाल शुरू किया गया है.

पर्यावरण सुरक्षा के लिए खुले और अनियंत्रित अपवाह की जगह क्लोज्ड-लूप ड्रेनेज सिस्टम लगाया गया है, जिसे ऑन-साइट 40 किलोलीटर प्रतिदिन क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ा गया है.

कंपोनेंट रिफर्बिशमेंट में केवल सतही पैचिंग के बजाय स्ट्रक्चरल आर्क वेल्डिंग, लीकरहित नियोप्रीन रबर गैस्केट और नए पॉली ग्रास मैट्रिक्स का इस्तेमाल किया जा रहा है.

वहीं, जैविक पुनर्भरण को नियमित अवायवीय बैक्टीरिया डोजिंग के जरिए मानकीकृत किया गया है. इससे अपशिष्ट के तत्काल प्रभावी अपघटन में मदद मिलती है.

1000 किलो की क्षमता वाला मोटराइज्ड मैनिपुलेटर

बायो-टैंक की सफाई के लिए इस्तेमाल होने वाले मोटराइज्ड मैनिपुलेटर की सुरक्षित कार्य क्षमता 1000 किलोग्राम है. यह 3 से 4 RPM की गति से संचालित होता है और इसमें 5 HP, 3-फेज, 415 वोल्ट मोटर लगाई गई है.

मशीन में 250 मिमी ग्राउंड क्लीयरेंस है. इसके साथ 500 लीटर टैंक क्षमता वाला दो-चरणीय एयर कंप्रेसर इस्तेमाल किया जाता है, जिसकी अधिकतम कार्य-दाब क्षमता 9.0 किग्रा/सेमी² है.

छह चरणों में पूरी होती है ओवरहॉलिंग

लिलुआ कारखाने में बायो-टैंकों की ओवरहॉलिंग प्रक्रिया को छह अलग-अलग क्षेत्रों में बांटा गया है.

  • चरण 1: अलग किए गए बायो-टैंकों को ‘अनक्लीन सर्विसेबल/रिपेयरेबल जोन’ में लाया जाता है. निरीक्षण के लिए टॉप कवर को न्यूमैटिक पावर नट-रनर्स की मदद से खोला जाता है.
  • चरण 2: टैंकों को फोर्कलिफ्ट की सहायता से ‘क्लीनिंग जोन’ में ले जाकर मैनिपुलेटर में क्लैंप किया जाता है. इसके बाद टैंक को 360 डिग्री घुमाते हुए हाई-प्रेशर जेट से साफ किया जाता है.
  • चरण 3: ‘रिपेयरिंग जोन’ में तकनीशियन आर्क वेल्डिंग, एंगल ग्राइंडिंग और नियोप्रीन गैस्केट लगाने का काम करते हैं.
  • चरण 4: ‘पॉली ग्रास चेंजिंग जोन’ में पुराने और समाप्त हो चुके सब्सट्रेट को हटाकर नए PVC मैट्रिक्स लगाए जाते हैं.
  • चरण 5: ‘बैक्टीरिया टॉप अप जोन’ में उच्च-सक्रियता वाले अवायवीय बैक्टीरियल इनोकुलम को डाला जाता है. यह अपशिष्ट को पानी, मीथेन और कार्बन डाई ऑक्साइड में बदलने में मदद करता है.
  • चरण 6: अंत में टैंकों को दोबारा असेंबल किया जाता है, उन पर स्टेंसिलिंग की जाती है और फिर उन्हें कोच के अंडरफ्रेम पर वापस स्थापित कर दिया जाता है.

40 किलोलीटर प्रतिदिन STP में वॉश वॉटर का उपचार

लिलुआ कारखाने में स्थापित 40 किलोलीटर प्रतिदिन क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में रासायनिक फ्लोक्युलेशन के जरिए वॉश वॉटर को अलग किया जाता है.

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इसके एरेशन टैंकों का आकार 2.00 मीटर × 1.00 मीटर × 2.25 मीटर है, जिसमें 0.5 मीटर फ्रीबोर्ड रखा गया है.

पूरी सुविधा में रंग-कोडेड पाइपिंग मानकों का भी पालन किया गया है. इसमें हरा रंग जल, लाल अग्निशमन, पीला गैस, भूरा सीवेज/एफ्लुएंट, नीला कंप्रेस्ड एयर और नारंगी या ग्रे विद्युत कंड्यूट के लिए निर्धारित किया गया है.

राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र बनाने की तैयारी

लिलुआ कारखाना आगे चलकर एक राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की दिशा में भी काम कर रहा है. इसके लिए चार रणनीतिक स्तंभ तय किए गए हैं.

  • स्मार्ट ऑटोमेशन: IoT/SCADA मॉनिटरिंग के साथ स्वचालन.
  • जीरो लिक्विड डिस्चार्ज सर्कुलैरिटी: 100 प्रतिशत उपचारित जल का पुनर्चक्रण.
  • टेक्निकल ट्रेनिंग हब: स्किल डेवलपमेंट के लिए तकनीकी प्रशिक्षण केंद्र.
  • नेशनल टर्नकी स्टैंडर्डाइजेशन ब्लूप्रिंट: जोनल वर्कशॉप के लिए मानकीकृत मॉडल तैयार करना.

पूर्व रेलवे ने अपनी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि लिलुआ कारखाने की स्वचालित बायो-टैंक सुविधा और 40 किलोलीटर प्रतिदिन क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट ने औद्योगिक स्वच्छता, श्रमिक सुरक्षा और सतत इंजीनियरिंग के क्षेत्र में नए मानक स्थापित किए हैं.

लिलुआ, हावड़ा से जारी विज्ञप्ति में रोगजनक स्लज के साथ मानव संपर्क समाप्त करने के साथ स्मार्ट मॉनिटरिंग, पूर्ण जल पुनर्चक्रण और देशभर में तकनीकी प्रशिक्षण को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी रेखांकित की गई है. यह पहल मुख्य कारखाना प्रबंधक के कार्यालय के मार्गदर्शन में आगे बढ़ाई जा रही है.

पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझि ने इस उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि लिलुआ कारखाने की यह परिवर्तनकारी परियोजना हरित प्रौद्योगिकी, परिचालन उत्कृष्टता और कार्यबल की गरिमा एवं सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के प्रति पूर्व रेलवे की प्रतिबद्धता को दर्शाती है.

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सोनी कुमारी
सोनी कुमारी डिजिटल मीडिया क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार हैं और Hellocities24 में ऑथर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार समेत देशभर की ताजा खबरों, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक मुद्दों पर लेखन करती हैं. पाठकों तक तेज और भरोसेमंद खबरें पहुंचाना प्रमुख उद्देश्य है.
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