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Bihar Monsoon Update:बिहार में तेज धूप, उमस और बढ़ते तापमान से परेशान लोगों के लिए राहत की उम्मीद बढ़ गई है. मौसम विभाग के संकेत बताते हैं कि राज्य में दक्षिण-पश्चिम मानसून की एंट्री अब ज्यादा दूर नहीं है. हालांकि इस बार मानसून सामान्य समय से कुछ दिन पीछे चल रहा है, लेकिन जून के दूसरे पखवाड़े में बारिश की गतिविधियों में तेजी आने की संभावना जताई गई है. इसके साथ ही किसानों और आम लोगों की नजरें मानसून की पहली बारिश पर टिकी हुई हैं.
18 से 20 जून के बीच हो सकती है मानसून की एंट्री
आमतौर पर बिहार में मानसून का आगमन 15 जून के आसपास माना जाता है, लेकिन इस वर्ष इसकी रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी है. मौसम विभाग के अनुसार 18 से 20 जून के बीच मानसून राज्य की सीमा में प्रवेश कर सकता है. इससे पहले कई हिस्सों में बादल छाने और हल्की प्री-मानसून बारिश की संभावना बनी रहेगी.
सीमांचल के जिलों में पहले पहुंचेगी बारिश
बिहार में मानसूनी हवाएं आमतौर पर पूर्वी क्षेत्र से प्रवेश करती हैं. इसी वजह से पूर्णिया, किशनगंज, अररिया और कटिहार जैसे सीमांचल के जिलों में सबसे पहले मानसून सक्रिय होने की संभावना है. इन इलाकों में जून के तीसरे सप्ताह की शुरुआत से बारिश का सिलसिला शुरू हो सकता है.
पटना और गया में कुछ दिन बाद पहुंचेगा मानसून
राजधानी पटना और गया सहित मध्य बिहार के जिलों में मानसून पहुंचने में कुछ अतिरिक्त समय लग सकता है. मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक इन क्षेत्रों में 22 जून के आसपास मानसून की दस्तक संभव है. इसके बाद बारिश का दायरा धीरे-धीरे पूरे राज्य में फैलने लगेगा.
उत्तर-पश्चिम बिहार में कब मिलेगी राहत
सीवान, सारण, छपरा, गोपालगंज और आसपास के जिलों में मानसून के 24 जून के आसपास सक्रिय होने की संभावना जताई गई है. लंबे समय से गर्मी और उमस का सामना कर रहे लोगों को इस दौरान अच्छी बारिश से राहत मिलने की उम्मीद है.
25 जून तक पूरे राज्य में फैल सकता है मानसून
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसमी परिस्थितियां अनुकूल बनी रहीं तो 25 जून तक मानसून बिहार के सभी जिलों को कवर कर सकता है. इसके बाद तापमान में गिरावट और मौसम में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकता है.
खेती-किसानी के लिए अहम साबित होगा मानसून
राज्य में खरीफ फसलों की खेती काफी हद तक मानसून पर निर्भर रहती है. धान की रोपाई सहित कई कृषि गतिविधियां बारिश शुरू होने के बाद ही गति पकड़ती हैं. ऐसे में किसानों को समय पर और पर्याप्त वर्षा का इंतजार है.
मानसून कैसे लाता है बारिश?
गर्मी के मौसम में धरती के अधिक गर्म होने से कम दबाव का क्षेत्र बनता है. इसके प्रभाव से समुद्री क्षेत्रों, खासकर बंगाल की खाड़ी से नमी युक्त हवाएं उत्तर भारत की ओर बढ़ती हैं. यही हवाएं बारिश कराती हैं और मानसून का निर्माण करती हैं.
एल नीनो पर भी बनी हुई है नजर
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रशांत महासागर में बनने वाली एल नीनो की स्थिति वर्षा के पैटर्न को प्रभावित कर सकती है. यदि इसका असर बढ़ता है तो कुछ इलाकों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना भी बन सकती है. फिलहाल मौसम विभाग लगातार इसकी निगरानी कर रहा है.
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