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Bihar MLC Election: बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी के भीतर उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया निर्णायक दौर में पहुंचती दिख रही है. टिकट के लिए कई नेताओं ने दावेदारी पेश की है, लेकिन प्रदेश संगठन में हालिया नियुक्तियों के बाद संभावित उम्मीदवारों की सूची सीमित होती नजर आ रही है. पार्टी सूत्रों के अनुसार इस बार चयन प्रक्रिया में सामाजिक संतुलन को प्रमुख आधार बनाया जा रहा है.
बीजेपी नेतृत्व एक ऐसा समीकरण तैयार करने में जुटा है जिसमें सवर्ण, पिछड़ा और अतिपिछड़ा वर्ग को प्रतिनिधित्व दिया जा सके. प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी की नई टीम के गठन के बाद कई नेताओं की राजनीतिक भूमिका बदल गई है, जिसका असर एमएलसी की संभावित सूची पर भी पड़ता दिख रहा है.
सवर्ण वर्ग में कई नामों पर चर्चा
सबसे अधिक चर्चा सवर्ण वर्ग से आने वाले संभावित उम्मीदवारों को लेकर हो रही है. पार्टी के भीतर राजपूत, ब्राह्मण और कायस्थ समाज से जुड़े नेताओं के नाम लगातार सामने आ रहे हैं.
राजपूत समाज से राजेंद्र सिंह और लाजवंती झा के नाम चर्चा में बताए जा रहे हैं. वहीं ब्रजेश रमन, अमृता भूषण और धीरेन्द्र सिंह भी संभावित दावेदारों में गिने जा रहे हैं. इन नेताओं के समर्थक संगठन और नेतृत्व स्तर पर अपनी-अपनी दावेदारी मजबूत करने में लगे हुए हैं.
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कायस्थ समाज से संजय मयूख को प्रमुख नामों में शामिल किया जा रहा है. हालांकि पार्टी के भीतर यह भी चर्चा है कि भविष्य में उन्हें बांकीपुर विधानसभा सीट से मैदान में उतारा जा सकता है. ऐसी स्थिति में परिषद चुनाव के लिए उनकी दावेदारी प्रभावित हो सकती है. दूसरी ओर संगठन में नई जिम्मेदारी मिलने के बाद राजेश वर्मा का नाम भी पहले की तुलना में कमजोर माना जा रहा है.
ब्राह्मण समाज में भी कई चेहरे सक्रिय
ब्राह्मण वर्ग से लाजवंती झा का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है. हालांकि हाल ही में संगठनात्मक फेरबदल के दौरान संतोष पाठक और राजेश झा को प्रदेश महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि सीमा झा और प्रभाकर मिश्र को प्रदेश मंत्री बनाया गया है. इसके बाद पार्टी के भीतर यह चर्चा शुरू हो गई है कि ब्राह्मण समाज को संगठन में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलने से परिषद टिकट के समीकरण बदल सकते हैं.
पिछड़ा वर्ग में प्रेम रंजन पटेल की चर्चा
पिछड़ा वर्ग की बात करें तो पूर्व विधायक प्रेम रंजन पटेल का नाम तेजी से उभरता दिखाई दे रहा है. पार्टी संगठन में उनकी सक्रियता और लंबे समय से जुड़ाव को उनके पक्ष में माना जा रहा है.
सरोज रंजन पटेल को प्रदेश महासचिव बनाए जाने के बाद प्रेम रंजन पटेल की संभावनाओं को और बल मिला है. वहीं ललन मंडल को संगठन में स्थान मिलने के बाद उनके परिषद उम्मीदवार बनने की संभावना कम मानी जा रही है.
बलराम मंडल और शीला कुशवाहा को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाए जाने के बाद उनके नाम भी संभावित उम्मीदवारों की चर्चा से लगभग बाहर बताए जा रहे हैं. इसी तरह यादव समाज से प्रवीण यादव को संगठनात्मक जिम्मेदारी मिलने के बाद इस वर्ग से परिषद टिकट की संभावनाएं भी कमजोर हुई हैं.
अतिपिछड़ा वर्ग में सकलदेव बिंद मजबूत दावेदार
अतिपिछड़ा वर्ग में सकलदेव बिंद का नाम सबसे प्रमुख माना जा रहा है. पार्टी के अंदर उन्हें गंभीर दावेदार के रूप में देखा जा रहा है.
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि तारापुर विधानसभा उपचुनाव के दौरान उन्होंने अपना नामांकन वापस लेकर वर्तमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के लिए रास्ता आसान किया था. पार्टी में उनके योगदान और लंबे राजनीतिक जुड़ाव को देखते हुए उनके नाम पर गंभीरता से विचार किए जाने की बात कही जा रही है.
अंतिम फैसले पर टिकी निगाहें
फिलहाल पार्टी की ओर से किसी नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. लेकिन संगठन में हालिया बदलावों और सामाजिक समीकरणों को देखते हुए संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. आने वाले दिनों में बीजेपी नेतृत्व उम्मीदवारों के नामों पर अंतिम मुहर लगा सकता है, जिसके बाद बिहार विधान परिषद चुनाव का राजनीतिक गणित और स्पष्ट हो जाएगा.
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