विज्ञापन

वायरल वीडियो

Monsoon : मानसून की एंट्री का इंतजार खत्म? IMD ने दिया बड़ा अपडेट, 72 घंटे अहम

Monsoon: देशभर में मानसून का इंतजार अब अंतिम दौर में पहुंचता दिख रहा है. मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि अगले 48 से 72 घंटों में केरल में मानसून की एंट्री हो सकती है. हालांकि इस साल बारिश को लेकर जारी पूर्वानुमान किसानों और आम लोगों की चिंता भी बढ़ा रहा है.

विज्ञापन

Monsoon : दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन को लेकर मौसम विभाग ने नया पूर्वानुमान जारी किया है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का कहना है कि अगले 48 से 72 घंटों के भीतर मानसून देश के दक्षिणी हिस्सों में दस्तक दे सकता है. इसके लिए वातावरणीय परिस्थितियां तेजी से अनुकूल होती दिखाई दे रही हैं और केरल तट पर मानसूनी गतिविधियां बढ़ने के संकेत मिले हैं.

केरल समेत कई इलाकों में अनुकूल बने हालात

आईएमडी के अनुसार, आगामी दो से तीन दिनों के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून के केरल पहुंचने की संभावना है. इसके साथ ही दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व अरब सागर के अतिरिक्त हिस्सों, लक्षद्वीप तथा तमिलनाडु के कुछ क्षेत्रों में भी मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं. सामान्य तौर पर देश में मानसून की शुरुआत जून के पहले सप्ताह में मानी जाती है.

बंगाल की खाड़ी में भी बढ़ेगी मानसूनी गतिविधि

मौसम विभाग ने बताया है कि इसी अवधि में मानसून का प्रभाव बंगाल की खाड़ी के कई हिस्सों तक फैल सकता है.

  • दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी
  • पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी
  • पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी
  • उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी
  • दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी के शेष क्षेत्र

इन इलाकों में मानसून के आगे बढ़ने के संकेत दर्ज किए जा रहे हैं.

शुरुआती अनुमान से पीछे रहा मानसून

मौसम विभाग ने पहले केरल में मानसून पहुंचने की संभावित तिथि 26 मई बताई थी. हालांकि बाद में इसकी प्रगति अपेक्षित गति से नहीं हो सकी, जिसके कारण आगमन में देरी हुई. 29 मई को जारी ताजा अपडेट में विभाग ने संकेत दिया था कि मानसून अगले सप्ताह के दौरान केरल तट तक पहुंच सकता है.

इस वर्ष सामान्य से कम बारिश की आशंका

हाल में जारी मौसमी पूर्वानुमान में आईएमडी ने वर्ष 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून को लेकर चिंता जताई है. विभाग का अनुमान है कि इस बार देशभर में होने वाली कुल वर्षा दीर्घकालिक औसत (LPA) के लगभग 90 प्रतिशत के आसपास रह सकती है, जो सामान्य स्तर से कम मानी जाती है.

एलपीए का क्या होता है मतलब?

दीर्घकालिक औसत (Long Period Average-LPA) किसी क्षेत्र में लंबे समय तक दर्ज की गई औसत वर्षा को दर्शाता है. इसे आमतौर पर 30 से 50 वर्षों के वर्षा आंकड़ों के आधार पर तैयार किया जाता है.

  • 1971 से 2020 के आंकड़ों के अनुसार भारत का मौसमी एलपीए 87 सेंटीमीटर है.
  • यदि मानसून के दौरान कुल वर्षा एलपीए के 90 प्रतिशत से नीचे चली जाती है, तो उसे कम वर्षा वाला मानसून माना जाता है.

अल नीनो पर टिकी मौसम वैज्ञानिकों की नजर

मौसम विभाग के मुताबिक इस वर्ष बारिश कम रहने की आशंका के पीछे अल नीनो की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है. यह जलवायु प्रणाली प्रशांत महासागर के तापमान में बदलाव से जुड़ी होती है और कई बार भारत के दक्षिण-पश्चिम मानसून को कमजोर कर देती है. इसी वजह से वर्षा वितरण और कुल बारिश पर इसका सीधा असर पड़ सकता है.

इसे भी पढ़ें-

सोनी कुमारी
सोनी कुमारी
सोनी कुमारी डिजिटल मीडिया क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार हैं और Hellocities24 में ऑथर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार समेत देशभर की ताजा खबरों, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक मुद्दों पर लेखन करती हैं. पाठकों तक तेज और भरोसेमंद खबरें पहुंचाना प्रमुख उद्देश्य है.
संबंधित खबरें
विज्ञापन

जरूर पढ़ें

Patna
overcast clouds
28.6 ° C
28.6 °
28.6 °
80%
5.4m/s
98%
सोम
28 °
मंगल
34 °
बुध
34 °
गुरु
33 °
शुक्र
33 °

अन्य खबरें

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें