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Bihar Nagar Nikay : बिहार में नगर निकायों के पुनर्गठन की तैयारी शुरू हो गई है. राज्य सरकार ने नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों के गठन, विस्तार, विलय और उत्क्रमण को लेकर सभी जिलाधिकारियों से 30 अगस्त तक विस्तृत प्रस्ताव मांगे हैं. नगर विकास एवं आवास विभाग के इस निर्देश के बाद भागलपुर समेत कई जिलों में प्रशासनिक बदलाव की संभावना बढ़ गई है. भागलपुर में बिहपुर, जगदीशपुर, सुलतानगंज और कहलगांव जैसे क्षेत्रों की स्थिति बदल सकती है.
30 अगस्त तक मांगे गए प्रस्ताव
नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने सभी डीएम को भेजे पत्र में कहा है कि भारत की जनगणना-2027 के मद्देनजर प्रशासनिक सीमाओं में बदलाव पर लगी रोक 31 मार्च 2027 को समाप्त हो जाएगी. ऐसे में सरकार पहले से तैयारी करना चाहती है, ताकि जनगणना पूरी होने के बाद नगर निकायों के पुनर्गठन की प्रक्रिया में किसी तरह की देरी नहीं हो.
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सरकार का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में कई ग्रामीण क्षेत्रों का तेजी से शहरीकरण हुआ है. ऐसे इलाकों को नए नगर निकाय का दर्जा देने या मौजूदा नगर निकायों में शामिल करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है.
भागलपुर में इन इलाकों पर रहेगी खास नजर
भागलपुर जिले में यह कवायद काफी अहम मानी जा रही है. हाल ही में भागलपुर प्लानिंग एरिया का विस्तार कर इसका क्षेत्रफल 359 वर्ग किलोमीटर कर दिया गया है. अब इसके दायरे में 384 राजस्व गांव शामिल हैं.
इसी वजह से शहर से सटे तेजी से विकसित हो रहे ग्रामीण इलाकों को भागलपुर नगर निगम, सबौर नगर पंचायत या हबीबपुर नगर पंचायत की सीमा में शामिल करने का प्रस्ताव तैयार किया जा सकता है. इसके अलावा जिले के कुछ प्रमुख बाजार और प्रखंड मुख्यालय भी नगर निकाय बनने या अपग्रेड होने की दौड़ में शामिल हो सकते हैं.
बिहपुर और जगदीशपुर को मिल सकता है नया दर्जा
नगरपालिका अधिनियम की धारा-3 और धारा-7 के तहत निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले बाजार क्षेत्रों को नगर पंचायत का दर्जा दिया जा सकता है.
भागलपुर जिले में बिहपुर और जगदीशपुर ऐसे संभावित क्षेत्र माने जा रहे हैं, जिनके संबंध में जिला प्रशासन प्रस्ताव भेज सकता है. हालांकि अंतिम फैसला राज्य सरकार द्वारा सभी मानकों की जांच और स्वीकृति के बाद ही लिया जाएगा.
सुलतानगंज और कहलगांव के उत्क्रमण पर भी नजर
सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि जो नगर पंचायतें जनसंख्या, कार्यबल और शहरी विकास के तय मानकों को पूरा कर रही हैं, उन्हें नगर परिषद या बड़े नगर निकाय के रूप में उत्क्रमित करने पर विचार किया जाएगा.
भागलपुर जिले के सुलतानगंज और कहलगांव इस श्रेणी के संभावित दावेदार माने जा रहे हैं. यदि दोनों क्षेत्र निर्धारित मानकों पर खरे उतरते हैं तो उनकी प्रशासनिक स्थिति में बदलाव संभव है.
वैज्ञानिक रिपोर्ट के आधार पर होगा फैसला
राज्य सरकार ने जिलाधिकारियों से केवल सामान्य अनुशंसा नहीं, बल्कि विस्तृत और तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है. प्रस्ताव में संबंधित क्षेत्र की जनसंख्या, जनघनत्व, कुल कार्यबल, कृषि कार्यबल, क्षेत्रफल, प्रशासनिक सीमा, संबंधित थाना, नक्शा और अन्य जरूरी जानकारियां शामिल करनी होंगी.
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इन्हीं आंकड़ों के आधार पर तय किया जाएगा कि किसी क्षेत्र को नया नगर निकाय बनाया जाए, किसी मौजूदा निकाय का विस्तार किया जाए या दो निकायों का विलय किया जाए.
आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर
यदि सरकार इन प्रस्तावों को मंजूरी देती है तो संबंधित क्षेत्रों में शहरी सुविधाओं के विकास को गति मिलेगी. नगर निकाय बनने के बाद सड़क, नाली, पेयजल, स्ट्रीट लाइट, कचरा प्रबंधन, पार्क और अन्य नागरिक सुविधाओं के लिए अलग बजट और योजनाओं का लाभ मिलेगा.
हालांकि इसके साथ ही नगर निकाय क्षेत्र में शामिल होने पर संपत्ति कर, भवन निर्माण नियम और अन्य शहरी प्रशासनिक प्रावधान भी लागू होंगे. यानी विकास के साथ लोगों की प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी बढ़ेंगी.
फिलहाल सभी जिलों से 30 अगस्त तक प्रस्ताव मांगे गए हैं. इसके बाद राज्य सरकार रिपोर्टों की समीक्षा करेगी और जनगणना-2027 की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नगर निकायों के पुनर्गठन पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा.


