All Party Meeting Walkout : संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक एक दिन पहले रविवार को केंद्र सरकार की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक राजनीतिक विवाद की भेंट चढ़ गई. बैठक शुरू होते ही विपक्षी दलों ने एनसीपीआई (NCPI) को आमंत्रित किए जाने का विरोध किया और सामूहिक रूप से बैठक का बहिष्कार करते हुए वॉकआउट कर दिया. इस घटनाक्रम के बाद सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और तेज हो गया है.
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#WATCH | Delhi: All-party meeting underway at the Parliament Annexe building ahead of the Monsoon session of Parliament that begins tomorrow, 20th July. pic.twitter.com/oZwogND8bU
— ANI (@ANI) July 19, 2026
सरकार ने मानसून सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही, विधायी कार्यक्रम और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए यह बैठक बुलाई थी. बैठक में शामिल होने के लिए कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, जेएमएम, आम आदमी पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, वाम दलों और शिवसेना (यूबीटी) समेत कई विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेता पहुंचे थे.
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हालांकि, बैठक की शुरुआत में ही एनसीपीआई को आमंत्रित किए जाने का मुद्दा उठ गया. विपक्षी दलों ने इसे लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया और कहा कि इस मामले पर उनकी आपत्ति के बावजूद सरकार ने संबंधित दल को बैठक में शामिल किया. इसके बाद सभी प्रमुख विपक्षी दलों के नेताओं ने एक साथ बैठक से बाहर निकलने का फैसला किया.
एनसीपीआई को बुलाने पर विपक्ष की आपत्ति
वॉकआउट के बाद तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि जिन 20 सांसदों को एनसीपीआई के नाम पर बैठक में बुलाया गया, उनके विलय को अब तक लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी नहीं मिली है. उन्होंने कहा कि इन सांसदों की अयोग्यता से जुड़ी याचिकाएं भी अभी लंबित हैं.
महुआ मोइत्रा ने सवाल उठाया कि जब विलय और अयोग्यता से जुड़े मामले लंबित हैं तो संसदीय कार्य मंत्री ने उन्हें किस आधार पर सर्वदलीय बैठक का निमंत्रण दिया. उन्होंने कहा कि विपक्ष ने इसी मुद्दे पर अपना विरोध दर्ज कराने के लिए बैठक से वॉकआउट किया.
VIDEO | Lok Sabha MP Kakoli Ghosh Dastidar says, "Our 20 MPs have merged with NCPI. Speaker has accepted us and will make arrangements to give us separate seats." pic.twitter.com/tBYtQgrjRC
— Press Trust of India (@PTI_News) July 19, 2026
काकोली घोष दस्तिदार ने किया अलग दावा
उधर, लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तिदार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया. उन्होंने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों का एनसीपीआई में विलय हो चुका है और लोकसभा अध्यक्ष ने इस विलय को स्वीकार भी कर लिया है.
उन्होंने कहा कि सदन में एनसीपीआई के सांसदों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था भी की जाएगी. उनके इस बयान के बाद एनसीपीआई की वैधता और सर्वदलीय बैठक में उसकी मौजूदगी को लेकर विवाद और गहरा गया है.
बैठक का एजेंडा पीछे छूटा
केंद्र सरकार ने संसद के मानसून सत्र के दौरान सदन के सुचारु संचालन, विधायी कार्यों और विभिन्न मुद्दों पर राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाने के उद्देश्य से सर्वदलीय बैठक बुलाई थी. लेकिन बैठक शुरू होने के कुछ ही मिनटों बाद विपक्ष के वॉकआउट के कारण मूल एजेंडा पीछे छूट गया और पूरा फोकस एनसीपीआई को आमंत्रित किए जाने के विवाद पर आ गया.
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