Rahul Gandhi Slams PM Modi: कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर युवाओं और छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि सरकार छात्रों की जायज मांगों को सुनने के बजाय उनके खिलाफ बल प्रयोग कर रही है. साथ ही उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग उठाई.
राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी युवाओं के हितों की अनदेखी कर रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर सवालों के बावजूद सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है. राहुल ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी इतने युवा-विरोधी हैं कि एक नाकाम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी नहीं ले सकते.”
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प्रधानमंत्री मोदी भारत के इतिहास के सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री हैं – इतने युवा विरोधी कि एक नाकाम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी नहीं ले सकते।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) July 20, 2026
152 पेपर लीक। 7.5 करोड़ छात्र पीड़ित। और सज़ा एक दोषी को भी नहीं। सजा किसे मिली? मेहनती युवाओं को।
और जब इन बच्चों ने… pic.twitter.com/DbX5L4Iq5C
‘152 पेपर लीक से 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित’
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि देशभर में 152 पेपर लीक की घटनाओं से करीब 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित हुए, लेकिन अब तक किसी दोषी को सजा नहीं मिली. उन्होंने कहा कि इसके उलट अपने अधिकारों की मांग करने वाले छात्रों को हिरासत में लिया जा रहा है और उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है.
राहुल गांधी ने कहा कि दिल्ली की सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे छात्र अपराधी नहीं हैं, बल्कि निष्पक्ष और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं. उनका कहना था कि छात्रों को ऐसी शिक्षा व्यवस्था मिलनी चाहिए, जो पारदर्शी हो और उनके भविष्य के साथ न्याय करे.
‘लाठीचार्ज लोकतांत्रिक तरीका नहीं’
राहुल गांधी ने छात्रों पर आंसू गैस के गोले दागने और लाठीचार्ज किए जाने की भी आलोचना की. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध की आवाज को बल प्रयोग से दबाना उचित नहीं है. सरकार को छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए.
आरएसएस पर भी साधा निशाना
राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उसने शिक्षा व्यवस्था और शैक्षणिक संस्थानों पर कब्जा कर लिया है. उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था की मौजूदा स्थिति से युवा निराश हैं और उनकी प्रतिक्रिया स्वाभाविक है. सरकार को युवाओं की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए.
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