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Bihar Tourism: बिहार के जंगल, पहाड़, झरने और प्राकृतिक पर्यटन स्थल अब नए स्वरूप में नजर आएंगे. राज्य सरकार ने प्रदेश में ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए सात जिलों के लिए ईको टूरिज्म मास्टर प्लान तैयार करने का निर्णय लिया है. पहले चरण में नालंदा, पश्चिम चंपारण, अररिया, किशनगंज, बांका, कैमूर और सहरसा को शामिल किया गया है.
पर्यटन विभाग इन जिलों की प्राकृतिक और पर्यावरणीय पर्यटन क्षमता का पहले वैज्ञानिक आकलन कराएगा. इसके बाद चरणबद्ध तरीके से विकास कार्य शुरू किए जाएंगे. सरकार की योजना इन जिलों को मॉडल ईको टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित करने की है.
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नालंदा पर सबसे ज्यादा रहेगा फोकस
पर्यटकों की सबसे अधिक आवाजाही होने के कारण नालंदा को योजना में सबसे अधिक प्राथमिकता दी गई है. यहां राजगीर की पहाड़ियां, नेचर सफारी, जू सफारी, घोड़ाकटोरा झील समेत आसपास के हरित क्षेत्रों को आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित किया जाएगा. सरकार चाहती है कि पर्यटक यहां अधिक समय तक ठहरें, जिससे स्थानीय व्यापार और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिले.
सर्वे के बाद बनेगी विकास की रूपरेखा
पर्यटन विभाग पहले सभी चयनित जिलों की प्राकृतिक संपदा और पर्यटन संभावनाओं का वैज्ञानिक सर्वे कराएगा. सर्वे रिपोर्ट के आधार पर प्रत्येक जिले के लिए अलग-अलग विकास योजना तैयार की जाएगी. विकास कार्यों में पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जाएगी.
पर्यटकों के लिए बढ़ाई जाएंगी सुविधाएं
मास्टर प्लान के तहत पर्यटन स्थलों पर आधारभूत सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा. बेहतर सड़क संपर्क, पार्किंग, सूचना केंद्र, स्वच्छता व्यवस्था, ट्रैकिंग पथ, विश्राम स्थल और पर्यटकों के लिए अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, ताकि पर्यटन अनुभव बेहतर हो सके.
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रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी रहेगा जोर
पर्यटन विभाग का मानना है कि ईको टूरिज्म का लाभ केवल पर्यटन तक सीमित नहीं रहेगा. इससे स्थानीय युवाओं, स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और छोटे उद्यमियों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे. साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी.
11 जल स्रोतों को भी किया गया चिह्नित
डीएफओ राजकुमार मोहन ने बताया कि जिले में ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए 11 जल स्रोतों का चयन किया गया है. इन सभी स्थलों के विकास का प्रस्ताव विभाग को भेज दिया गया है. अब विभागीय स्तर पर मास्टर प्लान तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है.
सरकार का मानना है कि इस योजना के लागू होने से बिहार के प्राकृतिक पर्यटन को नई पहचान मिलेगी. इसके साथ ही स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिलेगा और राज्य में पर्यटन गतिविधियों का दायरा भी तेजी से बढ़ेगा.
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