इस खबर में क्या है?
Tamil Nadu Delimitation : केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन के मुद्दे पर तमिलनाडु में राजनीतिक एकजुटता की कोशिश को बड़ा झटका लगा है. मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की ओर से सांसदों की बुलाई गयी बैठक में DMK और AIDMK समेत राज्य के 37 सांसद शामिल नहीं हुए. बैठक से दूरी बनाने वाले दलों ने इसे बिना मुद्दे की कवायद बताते हुए ‘नाटक’ और ‘ढोंग’ तक करार दिया.
बैठक का मकसद ही सवालों के घेरे में
मुख्यमंत्री विजय ने प्रस्तावित परिसीमन को लेकर तमिलनाडु के सांसदों को एक मंच पर लाने की कोशिश की थी. लेकिन प्रमुख विपक्षी दलों की गैरमौजूदगी ने बैठक की पूरी कवायद पर सवाल खड़े कर दिये.
PM मोदी का पोस्ट हटाने पर झुकी मेटा, मार्क जुकरबर्ग ने मांगी माफी
DMK की संसदीय दल की नेता कनिमोझी ने कहा कि संसद सत्र खत्म होने में कुछ ही दिन बाकी हैं और केंद्र की ओर से परिसीमन को लेकर न कोई नया विधेयक आया है और न ही कोई नई चर्चा शुरू हुई है. ऐसे में अभी इस तरह की बैठक बुलाने का औचित्य समझ से परे है.
कनिमोझी का आरोप- मेकेदातु मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश
कनिमोझी ने मुख्यमंत्री विजय की पहल पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि बैठक का मकसद राज्य के महत्वपूर्ण मेकेदातु बांध मुद्दे से लोगों का ध्यान हटाना है.
उन्होंने कहा कि DMK निष्पक्ष परिसीमन की पक्षधर है और राज्य के अधिकारों की रक्षा के लिए उसे किसी राजनीतिक दल से सीख लेने की जरूरत नहीं है.
बढ़ती भीड़ के बीच रेलवे का बड़ा फैसला, 7 जोड़ी स्पेशल ट्रेनों के बढ़े फेरे; कई रूटों पर मिलेगी राहत
DMK सांसद ए राजा ने भी TVK सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि जिस विषय को लेकर सरकार के पास स्पष्ट समझ नहीं है, उस पर चर्चा आयोजित कर सिर्फ राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की जा रही है.
AIDMK ने भी बैठक को बताया राजनीतिक कवायद
अन्नाद्रमुक ने भी बैठक से दूरी बनाते हुए मुख्यमंत्री पर निशाना साधा. पार्टी का कहना है कि परिसीमन को लेकर संसद में न कोई नया विधेयक आया है और न ही केंद्र की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा हुई है.
AIDMK ने सवाल उठाया कि जब परिसीमन को लेकर कोई नया घटनाक्रम ही नहीं हुआ है, तो इतनी जल्दबाजी में सांसदों की बैठक बुलाने की जरूरत क्यों पड़ी?
सांसदों पर दबाव बनाने का भी आरोप
बैठक को लेकर विवाद सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा. DMK ने राज्य के प्रशासनिक तंत्र के कथित इस्तेमाल पर भी सवाल उठाया.
पार्टी का आरोप है कि मुख्य सचिव के स्तर से सांसदों को पत्र और फोन भेजकर बैठक में शामिल होने के लिए कहा गया. DMK ने इसे TVK के राजनीतिक एजेंडे को प्रशासनिक माध्यम से आगे बढ़ाने की कोशिश बताया.
57 में से अधिकांश सांसद बैठक से बाहर
तमिलनाडु के कुल 57 सांसदों में से बड़ी संख्या में सांसद बैठक में शामिल नहीं हुए.
- DMK: 22 लोकसभा और 8 राज्यसभा सांसद, कुल 30 अनुपस्थित
- AIDMK: 4 राज्यसभा सांसद अनुपस्थित
- PMPK: 1 राज्यसभा सांसद अनुपस्थित
- DMDK: 1 राज्यसभा सांसद अनुपस्थित
- MNM: 1 राज्यसभा सांसद अनुपस्थित
इसके मुकाबले कांग्रेस, VCK, CPI, CPI(M), MDMK और IUML से जुड़े करीब 19 से 21 सांसद बैठक में पहुंचे.
परिसीमन पर एकजुटता की कोशिश, लेकिन बढ़ा राजनीतिक विवाद
मुख्यमंत्री विजय की बैठक का उद्देश्य परिसीमन जैसे संवेदनशील मुद्दे पर तमिलनाडु के सांसदों के बीच साझा रणनीति तैयार करना था. लेकिन DMK और AIDMK जैसे प्रमुख दलों के शामिल नहीं होने से यह पहल राजनीतिक विवाद में घिर गयी.
अब सवाल सिर्फ परिसीमन को लेकर केंद्र की नीति का नहीं, बल्कि तमिलनाडु में इस मुद्दे पर विपक्षी दलों के बीच साझा रणनीति बनाने की कोशिशों का भी है. बैठक में बहुमत सांसदों की गैरमौजूदगी ने विजय की पहल को शुरुआती चरण में ही चुनौती दे दी है.
इसे भी पढ़ें-



