Amitabh Bachchan Comeback Story : 11 अक्टूबर को अमिताभ बच्चन का जन्मदिन होता है. हिंदी सिनेमा में दशकों तक राज करने वाले महानायक की जिंदगी में एक ऐसा दौर भी आया, जब फिल्मी शोहरत उनके आर्थिक संकट को दूर नहीं कर सकी. अमिताभ बच्चन कॉरपोरेशन लिमिटेड (ABCL) की नाकामी, करीब 90 करोड़ रुपये का कर्ज और दर्जनों कानूनी मामलों ने उन्हें मुश्किल हालात में पहुंचा दिया था. उस वक्त उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी पहचान बचाने के साथ-साथ देनदारियों से बाहर निकलने की थी.
उन्होंने इसके लिए अपने पुराने स्टारडम पर भरोसा करने के बजाय फिर से अभिनय के रास्ते पर लौटने का फैसला किया. यश चोपड़ा से काम मांगने से लेकर टेलीविजन पर ‘कौन बनेगा करोड़पति’ की मेजबानी स्वीकार करने तक, अमिताभ के कई फैसलों ने उनके करियर को नई दिशा दी.
Amitabh Bachchan : जब फिल्मों का महानायक कारोबार में लगा बैठा बड़ा दांव
1970 और 1980 के दशक में ‘जंजीर’, ‘दीवार’, ‘शोले’, ‘डॉन’ और ‘मुकद्दर का सिकंदर’ जैसी फिल्मों ने अमिताभ बच्चन को हिंदी सिनेमा का बड़ा सितारा बना दिया था. पर्दे पर अन्याय के खिलाफ खड़े होने वाले उनके किरदारों ने दर्शकों के बीच अलग पहचान बनाई. लेकिन फिल्मी दुनिया में मिली कामयाबी को दूसरे कारोबार में दोहराना उनके लिए आसान नहीं रहा.

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1995 में अमिताभ ने अमिताभ बच्चन कॉरपोरेशन लिमिटेड (ABCL) की शुरुआत की. कंपनी के जरिये फिल्म निर्माण, मनोरंजन और इवेंट से जुड़े कारोबार को कॉरपोरेट तरीके से आगे बढ़ाने की योजना थी. हालांकि, कंपनी को उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली. मिस वर्ल्ड आयोजन समेत कई व्यावसायिक चुनौतियों ने आर्थिक स्थिति को और मुश्किल बना दिया.
राजनीति से दूरी और बोफोर्स विवाद ने बढ़ाई मुश्किलें
1984 में करीबी दोस्त राजीव गांधी के आग्रह पर अमिताभ बच्चन ने राजनीति में कदम रखा. कांग्रेस के टिकट पर इलाहाबाद लोकसभा सीट से चुनाव लड़कर उन्होंने हेमवती नंदन बहुगुणा को बड़े अंतर से हराया. लेकिन राजनीति में उनका सफर ज्यादा लंबा नहीं चला.

1987 में बोफोर्स विवाद के दौरान अमिताभ और उनके भाई अजिताभ का नाम भी सामने आया. अमिताभ ने आरोपों को खारिज किया और बाद में उन्हें इस मामले में क्लीन चिट मिली. हालांकि, इस विवाद का असर उनकी सार्वजनिक छवि पर पड़ा. जुलाई 1987 में उन्होंने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और फिल्मों की ओर लौट आए.
‘शहंशाह’ के बाद वह दौर आया, जब हिट फिल्मों का इंतजार रहा
1988 में ‘शहंशाह’ को सफलता मिली, लेकिन इसके बाद ‘तूफान’, ‘जादूगर’ और ‘गंगा जमुना सरस्वती’ जैसी फिल्में अपेक्षित कामयाबी हासिल नहीं कर सकीं. 1990 के दशक में भी उनके करियर में उतार-चढ़ाव जारी रहा.
इसी बीच कारोबारी मोर्चे पर ABCL की मुश्किलें बढ़ती गईं. अमिताभ के सामने अब सिर्फ फिल्मों में अपनी जगह बनाए रखने की चुनौती नहीं थी, बल्कि कंपनी की देनदारियों का सामना करना भी जरूरी हो गया था.
करीब 90 करोड़ रुपये का कर्ज, 55 कानूनी मामले
अमिताभ बच्चन ने अपने कठिन दौर के बारे में बताया था कि उन पर करीब 90 करोड़ रुपये का कर्ज था और लगभग 55 कानूनी मामले चल रहे थे. उनकी संपत्तियां भी कंपनी की देनदारियों से जुड़ गई थीं. कर्ज वसूलने वाले उनके घर तक पहुंचने लगे थे.
यह उनके लिए आर्थिक संकट के साथ व्यक्तिगत और पेशेवर स्तर पर भी कठिन समय था. जिन लोगों के बीच कभी उनका स्टारडम चर्चा में रहता था, उनमें से कई ने मुश्किल दौर में दूरी बना ली. ऐसे हालात में उन्हें तय करना था कि वह अपनी पुरानी प्रतिष्ठा के सहारे इंतजार करेंगे या फिर काम की तलाश में खुद पहल करेंगे.
यश चोपड़ा से काम मांगने का फैसला बना वापसी की शुरुआत
अमिताभ बच्चन ने अपने मुश्किल दौर में यह समझा कि उनकी सबसे बड़ी ताकत अभिनय है. वह फिल्म निर्देशक यश चोपड़ा के पास पहुंचे और उनसे काम मांगा. यह फैसला उनके लिए इसलिए अहम था, क्योंकि उन्हें अपने पुराने सुपरस्टार वाले रुतबे से आगे बढ़कर दोबारा काम हासिल करने की पहल करनी पड़ी.
यश चोपड़ा ने उन्हें साल 2000 में रिलीज हुई फिल्म ‘मोहब्बतें’ में भूमिका दी. फिल्म में अमिताभ एक सख्त और अनुशासनप्रिय संस्थान प्रमुख के किरदार में नजर आए. इस भूमिका ने दर्शकों के सामने उनके अभिनय का एक अलग रूप रखा और उनके करियर को नई दिशा देने में मदद की.
‘कौन बनेगा करोड़पति’ ने घर-घर तक पहुंचाया
साल 2000 में अमिताभ बच्चन ने टेलीविजन शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ की मेजबानी भी शुरू की. बड़े पर्दे पर अपनी पहचान बना चुके अभिनेता का टीवी पर आना उनके करियर का एक अहम फैसला था. इस शो के जरिये दर्शकों ने उन्हें एक नए अंदाज में देखा.

KBC की लोकप्रियता ने अमिताभ को छोटे पर्दे पर भी मजबूत पहचान दिलाई. उन्होंने अपने इंटरव्यू में बताया था कि शो से मिली कमाई ने उन्हें कर्ज चुकाने में मदद की. उन्होंने देनदारियों को अपनी जिम्मेदारी मानते हुए उन्हें लौटाने पर जोर दिया.
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महानायक की वापसी सिर्फ एक फिल्म की कामयाबी नहीं
अमिताभ बच्चन की वापसी के पीछे कई फैसले रहे. यश चोपड़ा से काम मांगना, ‘मोहब्बतें’ में नई भूमिका स्वीकार करना और KBC के जरिये टेलीविजन पर उतरना उनके करियर के महत्वपूर्ण पड़ाव बने. उन्होंने कठिन दौर में काम से दूरी बनाने के बजाय अपने अनुभव और अभिनय को फिर से अपनी ताकत बनाया.
उनकी कहानी का अहम पहलू यही है कि दशकों तक सुपरस्टार रहने के बावजूद उन्हें अपने करियर को दोबारा संभालने के लिए पहल करनी पड़ी. आर्थिक संकट और कारोबारी असफलता के बाद उन्होंने जिस तरह काम की ओर वापसी की, वह उनके जीवन के सबसे उल्लेखनीय मोड़ों में से एक है.
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