Rohini Acharya : बिहार की राजनीति में दो निर्दलीय विधान पार्षदों के भाजपा के समर्थन में आने पर रोहिणी आचार्य ने तीखा हमला बोला है. राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी के फैसले को लेकर लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी ने इसे मतदाताओं के भरोसे और जनादेश के साथ धोखा बताया है.
उन्होंने आरोप लगाया कि निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतने वाले दोनों विधान पार्षद सत्ता के लोभ में भाजपा के साथ चले गए.
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जनादेश की पीठ में खंजर, स्वार्थ के लिए लोकतंत्र का सौदा .." हद है मौकापरस्ती की " मतदाताओं ने जिन्हें निर्दलीय चुनकर भेजा , वो जीतते ही सत्ता के लोभ में बीजेपी की गोद में जा बैठे। यह जनादेश के साथ सीधा धोखा है। जनता ने इन्हें बीजेपी के सिंबल पर नहीं जिताया था, बल्कि बीजेपी और सत्तापक्ष को सिरे से नकारते हुए इन्हें चुना था, मगर इन मौकापरस्तों ने ये साबित कर दिया कि इनके लिए अपने फायदे के लिए सत्ताधारी दल का साथ और निजी व् राजनीतिक स्वार्थ ही सर्वोपरि है l
— Rohini Acharya (@RohiniAcharya2) November 1, 2026
Rohini Acharya : रोहिणी बोलीं- स्वार्थ के लिए लोकतंत्र का सौदा
रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर दोनों नवनिर्वाचित विधान पार्षदों को निशाने पर लिया. उन्होंने लिखा कि मतदाताओं ने उन्हें निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनकर विधान परिषद भेजा था, लेकिन जीतने के बाद वे भाजपा की गोद में जा बैठे.
रोहिणी ने इसे जनादेश की पीठ में खंजर घोंपने जैसा बताते हुए कहा कि जनता ने उन्हें भाजपा के चुनाव चिह्न पर नहीं जिताया था. उन्होंने इसे निजी और राजनीतिक स्वार्थ को प्राथमिकता देने वाला फैसला बताया.
रोहिणी ने एक्स पर क्या लिखा?
रोहिणी आचार्य ने अपनी पोस्ट में लिखा, ‘जनादेश की पीठ में खंजर, स्वार्थ के लिए लोकतंत्र का सौदा. हद है मौकापरस्ती की. मतदाताओं ने जिन्हें निर्दलीय चुनकर भेजा, वो जीतते ही सत्ता के लोभ में बीजेपी की गोद में जा बैठे. यह जनादेश के साथ सीधा धोखा है. जनता ने इन्हें बीजेपी के सिंबल पर नहीं जिताया था, बल्कि बीजेपी और सत्तापक्ष को सिरे से नकारते हुए इन्हें चुना था.’
मनोज झा ने सदस्यता रद्द कराने की दी चेतावनी
रोहिणी आचार्य के हमले के बीच RJD सांसद मनोज झा ने भी इस मामले को लेकर भाजपा और दोनों विधान पार्षदों पर सवाल उठाए. पटना स्थित RJD कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन्होंने कहा कि निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतने के बाद किसी राजनीतिक दल की औपचारिक सदस्यता ग्रहण करना संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता का आधार बन सकता है.
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उन्होंने कहा कि RJD इस मामले को विधान परिषद के सभापति के सामने उठाएगी. उचित कार्रवाई नहीं होने पर पार्टी अदालत का दरवाजा खटखटाएगी. मनोज झा ने दावा किया कि दोनों नेताओं के भाजपा में शामिल होने से जुड़े वीडियो और अन्य सबूत भी मौजूद हैं.
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