विज्ञापन

वायरल वीडियो

प्राइवेट कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले, अब 1 साल की नौकरी पर भी मिलेगी ग्रेच्युटी, जानिए नए नियम

New Gratuity Rules Labor Code : नए लेबर कोड के तहत प्राइवेट कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है. अब फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को सिर्फ एक साल नौकरी के बाद भी ग्रेच्युटी का लाभ मिल सकेगा.

विज्ञापन

New Gratuity Rules Labor Code : प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी को लेकर अहम बदलाव किए गए हैं. नए लेबर कोड लागू होने के बाद ग्रेच्युटी से जुड़े कई पुराने नियम बदल गए हैं. खासतौर पर कॉन्ट्रैक्ट और फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को इससे बड़ा फायदा मिलने वाला है. हालांकि इसके साथ अनुशासन और कंपनी के नियमों को लेकर सख्ती भी बढ़ाई गई है.

अब कम समय की नौकरी पर भी मिलेगा फायदा

पहले किसी कर्मचारी को ग्रेच्युटी पाने के लिए एक ही कंपनी में लगातार 5 साल तक नौकरी करना जरूरी होता था. लेकिन नए प्रावधानों में फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को राहत दी गई है. अब तय अवधि के कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारी सिर्फ एक साल सेवा देने के बाद भी ग्रेच्युटी के पात्र माने जाएंगे.

बेसिक सैलरी बढ़ने से बढ़ेगी ग्रेच्युटी

नए नियमों के तहत कंपनियों के लिए यह जरूरी किया गया है कि कर्मचारी की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता (DA) उसकी कुल CTC का कम से कम 50 प्रतिशत हो. पहले कई कंपनियां अलाउंस ज्यादा दिखाकर बेसिक वेतन कम रखती थीं, जिससे ग्रेच्युटी की राशि भी कम बनती थी. अब बेसिक वेतन बढ़ने से कर्मचारियों को भविष्य में ज्यादा ग्रेच्युटी मिल सकेगी.

किन परिस्थितियों में रुक सकती है ग्रेच्युटी

सरकार ने साफ किया है कि ग्रेच्युटी कर्मचारी का अधिकार जरूर है, लेकिन गंभीर अनुशासनहीनता की स्थिति में कंपनी कार्रवाई कर सकती है. कुछ मामलों में ग्रेच्युटी रोकी या काटी जा सकती है.

  • यदि कर्मचारी वित्तीय गड़बड़ी, धोखाधड़ी या फर्जी दस्तावेज के मामले में दोषी पाया जाता है
  • कार्यालय में हिंसा, बदसलूकी या महिला सहकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार साबित होने पर
  • कर्मचारी की लापरवाही या जानबूझकर की गई गलती से कंपनी को आर्थिक नुकसान होने पर

ऐसी स्थिति में कंपनी नुकसान की भरपाई ग्रेच्युटी राशि से कर सकती है.

बिना प्रक्रिया के नहीं रोक सकती कंपनी पैसा

किसी कर्मचारी की ग्रेच्युटी रोकने के लिए कंपनी को तय कानूनी प्रक्रिया अपनानी होगी. केवल आरोप लगाने भर से भुगतान नहीं रोका जा सकता. कंपनी को सबूत पेश करने होंगे और कर्मचारी को अपना पक्ष रखने का अवसर देना होगा. यदि आरोप सही साबित नहीं होते हैं, तो कंपनी को बकाया राशि के साथ ब्याज भी देना पड़ सकता है.

इसे भी पढ़ें-राशन सिस्टम में बड़ा बदलाव, AI और QR टेक्नोलॉजी से होगी हर बोरे की निगरानी

इसे भी पढ़ें-Byju’s के संस्थापक बायजू रवींद्रन को बड़ा झटका, अदालत ने सुनाई 6 महीने की जेल

इसे भी पढ़ें-LPG के दाम में बड़ा उछाल, कमर्शियल सिलेंडर महंगा, जानिए कीमत; घरेलू कीमतें जस की तस

Disclaimer: शेयर बाजार में निवेश से जुड़े किसी भी तरह के खरीद-फरोख्त का सुझाव HelloCities24 द्वारा नहीं दिया जाता है. यहां प्रकाशित बाजार विश्लेषण विभिन्न मार्केट एक्सपर्ट्स और ब्रोकरेज संस्थानों के आकलन पर आधारित होते हैं. निवेश से पहले प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें.

सोनी कुमारी
सोनी कुमारी
सोनी कुमारी डिजिटल मीडिया क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार हैं और Hellocities24 में ऑथर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार समेत देशभर की ताजा खबरों, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक मुद्दों पर लेखन करती हैं. सरल भाषा और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पहचान मानी जाती है. डिजिटल पत्रकारिता में समाचार लेखन और कंटेंट प्रेजेंटेशन का अच्छा अनुभव है. पाठकों तक तेज और भरोसेमंद खबरें पहुंचाना प्रमुख उद्देश्य है.
संबंधित खबरें
विज्ञापन

जरूर पढ़ें

Patna
broken clouds
35.2 ° C
35.2 °
35.2 °
48%
1m/s
74%
मंगल
38 °
बुध
40 °
गुरु
38 °
शुक्र
29 °
शनि
35 °

अन्य खबरें