Bhagalpur News: भागलपुर: भागलपुर में गंगा का पानी घर-घर पहुंचाने की योजना के सामने अब पैसों की नहीं, जमीन के कागजों की दीवार खड़ी हो गई है. सरकार ने परियोजना के लिए 7 करोड़ 56 लाख 24 हजार 523 रुपये जारी कर दिए. अप्रोच चैनल के लिए जरूरी जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया भी पूरी हो गई. इसके बावजूद वह काम शुरू नहीं हो पा रहा है, जिसके बिना पूरी जलापूर्ति व्यवस्था आगे नहीं बढ़ सकती.
मामला रैयतों के बीच मुआवजे और जमीन के मालिकाना हक को लेकर उलझा हुआ है. एक ही जमीन पर अलग-अलग दावों के कारण प्रशासन विवादित भूखंडों का मुआवजा रोकने को मजबूर है. यही रुकावट अब निर्माण की राह में भी अड़चन बन गई है.
करोड़ों रुपये खाते में, लेकिन जमीन पर नहीं उतर रही योजना
इस परियोजना की मौजूदा स्थिति सरकारी योजनाओं की सामान्य तस्वीर से अलग है. यहां फंड की कमी का हवाला नहीं है. राशि उपलब्ध है और जिन रैयतों के दस्तावेज स्पष्ट हैं, उन्हें भुगतान भी किया जा रहा है.
अड़चन सिर्फ उन जमीनों पर है, जहां यह तय करना मुश्किल हो रहा है कि मुआवजा आखिर किसे दिया जाए.
भू-अर्जन विभाग के अनुसार कई रैयतों के दस्तावेज पूरे नहीं हैं. कहीं रजिस्ट्री है, लेकिन एग्रीमेंट नहीं है तो कहीं स्वामित्व से जुड़े जरूरी कागजात अधूरे हैं. ऐसे मामलों में भुगतान करना प्रशासन के लिए आसान नहीं है.
एक जमीन, कई दावे… इसलिए थम गया भुगतान
विवादित भूखंडों में दो या उससे अधिक पक्ष जमीन पर अपना दावा कर रहे हैं. ऐसे मामलों में प्रशासन ने मुआवजा फिलहाल रोक दिया है.
जिला भू-अर्जन पदाधिकारी राकेश कुमार के अनुसार जिन रैयतों के पास दखल-कब्जा प्रमाण पत्र या LPC (Land Possession Certificate) उपलब्ध था, उन्हें भुगतान किया गया है. लेकिन जिन मामलों में जमीन के मालिकाना हक को लेकर विवाद है, वहां पहले स्थिति साफ करना जरूरी है.
यही विवाद अब सिर्फ मुआवजे तक सीमित नहीं रह गया है. इसका असर सीधे परियोजना के निर्माण पर पड़ रहा है.
असली पेच यहीं है: अप्रोच चैनल नहीं तो पानी आगे नहीं जाएगा
हर घर गंगा जल योजना में गंगा से पानी उठाकर इंटकवेल तक पहुंचाने की पूरी व्यवस्था बनाई जानी है. इसके लिए नदी किनारे से इंटकवेल तक अप्रोच चैनल बनाया जाना जरूरी है.
भागलपुर : हड़ताल खत्म, सरकार ने खोला राहत का पिटारा; सफाईकर्मियों को मिलेंगी कई नई सुविधाएं
इंटकवेल तक पानी पहुंचेगा, तभी आगे लिफ्ट सिस्टम के जरिए उसे शुद्धिकरण और वितरण व्यवस्था तक ले जाया जा सकेगा.
इसलिए अप्रोच चैनल को महज एक निर्माण कार्य नहीं माना जा सकता. यही वह कड़ी है, जिसके बिना गंगा से निकला पानी शहर की जलापूर्ति व्यवस्था तक पहुंच ही नहीं पाएगा.
एक साल की कवायद के बाद भी खत्म नहीं हुई मुश्किल
अप्रोच चैनल के लिए निजी जमीन की जरूरत थी. इसी वजह से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया करीब एक वर्ष तक चली. प्रक्रिया पूरी होने के बाद उम्मीद थी कि अब निर्माण शुरू हो जाएगा.
लेकिन मुआवजा वितरण के दौरान सामने आए स्वामित्व विवाद ने पूरी तस्वीर बदल दी.
यानी जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद हर भूखंड पर प्रशासनिक रूप से रास्ता पूरी तरह साफ नहीं हो सका है.
पैसेंजर ट्रेन के बैटरी बॉक्स से विदेशी व देसी शराब की बड़ी खेप बरामद
अब फैसला कागजों पर, असर शहर के पानी पर
प्रशासन के सामने फिलहाल प्राथमिकता विवादित जमीनों के स्वामित्व और मुआवजे के मामलों को सुलझाना है. जब तक पात्र रैयतों को भुगतान और जमीन का हस्तांतरण पूरा नहीं होता, अप्रोच चैनल का निर्माण शुरू करना मुश्किल है.
इसका मतलब साफ है—भागलपुर को गंगा का शुद्ध पानी उपलब्ध कराने वाली योजना की रफ्तार अब फाइलों और जमीन के दस्तावेजों पर निर्भर है.
शहरवासियों के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि परियोजना से स्थायी जलापूर्ति व्यवस्था की उम्मीद जुड़ी है. लेकिन करोड़ों रुपये जारी होने और अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद यदि जमीन का विवाद नहीं सुलझा, तो योजना को धरातल पर उतरने में अभी और वक्त लग सकता है.
फिलहाल सवाल यही है कि जब पैसा आ चुका है और जमीन अधिग्रहण भी हो चुका है, तो गंगा का पानी भागलपुर के घरों तक पहुंचने से पहले जमीन के विवाद में और कितना समय अटकेगा?
इसे भी पढ़ें-



