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Bhagalpur News: भागलपुर: शहर के बहुप्रतीक्षित भोलानाथ रेलवे ओवरब्रिज (ROB) के निर्माण की राह में अब जमीन अधिग्रहण नहीं, बल्कि मुआवजे की रकम सबसे बड़ी अड़चन बन गई है. परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन बिहार राज्य पुल निर्माण निगम की ओर से करीब 54 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण रैयतों को अब तक मुआवजा नहीं मिल पाया है.
मुआवजे का भुगतान नहीं होने का असर सिर्फ जमीन मालिकों तक सीमित नहीं है. जब तक रैयतों को मुआवजा नहीं मिलेगा, तब तक अधिग्रहित जमीन का औपचारिक हस्तांतरण पुल निर्माण निगम के नाम नहीं हो सकेगा. और जमीन निगम को हस्तांतरित नहीं होने के कारण संबंधित स्थानों पर ओवरब्रिज का निर्माण कार्य आगे बढ़ाना भी संभव नहीं है.
जमीन अधिग्रहण पूरा, लेकिन प्रक्रिया वहीं अटकी
भोलानाथ ROB के लिए जरूरी भूखंडों के अधिग्रहण की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है. परियोजना के लिए करीब 12 से 14 स्थानों पर जमीन ली गई है.
अब इस प्रक्रिया का अगला महत्वपूर्ण चरण रैयतों को मुआवजा देना और इसके बाद जमीन को बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के नाम हस्तांतरित करना है.
यहीं से पूरी प्रक्रिया रुक गई है.
मुआवजे के लिए जरूरी राशि उपलब्ध नहीं होने के कारण रैयतों को भुगतान नहीं किया जा सका है. इसका नतीजा यह हुआ कि जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई पूरी होने के बावजूद जमीन का अंतिम हस्तांतरण नहीं हो पाया.
छह महीने पहले मांगे गए थे 54 करोड़
जिला भू-अर्जन पदाधिकारी राकेश कुमार के अनुसार मुआवजा भुगतान के लिए करीब 54 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने को लेकर पुल निर्माण निगम को लगभग छह महीने पहले पत्र भेजा गया था.
इसके बाद विभाग की ओर से कई बार अनुस्मारक भी भेजे गए, लेकिन अब तक राशि उपलब्ध नहीं कराई गई है.
यानी प्रशासन की ओर से जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है, लेकिन मुआवजा भुगतान के लिए जरूरी रकम नहीं आने के कारण अगली कड़ी शुरू नहीं हो पा रही है.
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मुआवजा नहीं तो जमीन हस्तांतरण नहीं
भोलानाथ ROB परियोजना में सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि जमीन अधिग्रहण और जमीन हस्तांतरण को एक साथ नहीं माना जा सकता.
रैयतों को मुआवजा दिए जाने के बाद ही अधिग्रहित जमीन को पुल निर्माण निगम के नाम हस्तांतरित किया जाएगा. जब तक यह हस्तांतरण नहीं होता, संबंधित भूखंड पर निर्माण कार्य आगे बढ़ाने में बाधा बनी रहेगी.
इस तरह 54 करोड़ रुपये की कमी ने पूरी परियोजना की अगली कड़ी को रोक दिया है.
रैयत इंतजार में, निर्माण की रफ्तार भी थमी
जिन रैयतों की जमीन परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई है, वे मुआवजे का इंतजार कर रहे हैं. दूसरी ओर, जमीन का हस्तांतरण नहीं होने के कारण निर्माण एजेंसी को संबंधित स्थानों पर काम आगे बढ़ाने में परेशानी हो रही है.
इसका मतलब यह है कि एक तरफ रैयतों को अपनी जमीन का मुआवजा नहीं मिला है, तो दूसरी तरफ परियोजना को भी जमीन का पूरा अधिकार नहीं मिल पाया है.
पहले से करीब एक साल पीछे चल रहा ROB
भोलानाथ रेलवे ओवरब्रिज की परियोजना पहले ही निर्धारित समयसीमा से करीब एक वर्ष पीछे चल रही है. ऐसे में मुआवजे की राशि नहीं मिलने से देरी और बढ़ने की आशंका है.
शहर के लोगों को उम्मीद है कि ROB बनने के बाद रेलवे फाटक के आसपास लगने वाले जाम से राहत मिलेगी. लेकिन फिलहाल पुल निर्माण की रफ्तार जमीन के स्तर पर ही अटकी हुई है.
54 करोड़ मिले तो खुलेगा आगे का रास्ता
प्रशासन के अनुसार अभी सबसे जरूरी है कि बिहार राज्य पुल निर्माण निगम की ओर से मुआवजा भुगतान के लिए मांगी गई राशि उपलब्ध कराई जाए. राशि मिलते ही पात्र रैयतों को मुआवजा देने और उसके बाद जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी.
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इसके बाद ही संबंधित जमीन पर निर्माण कार्य आगे बढ़ने का रास्ता साफ होगा.
फिलहाल भोलानाथ ROB की पूरी कहानी 54 करोड़ रुपये की एक राशि के इर्द-गिर्द घूम रही है—पैसा नहीं आया, तो रैयतों को मुआवजा नहीं मिला; मुआवजा नहीं मिला, तो जमीन हस्तांतरित नहीं हुई; और जमीन हस्तांतरित नहीं होने से पुल का काम भी प्रभावित है.
शहर को जाम से राहत दिलाने वाले इस महत्वपूर्ण ओवरब्रिज के लिए अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि रैयतों के खाते में मुआवजे की रकम कब पहुंचेगी और जमीन कब पुल निर्माण निगम के नाम होगी.
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