भागलपुर : बिहपुर प्रखंड के अरसंडी गांव में शनिवार का दिन मातम भरा रहा. गांव के निवासी रामानंद यादव का पार्थिव शरीर ओमान से उनके पैतृक घर पहुंचते ही परिजनों का दर्द छलक पड़ा. परिवार के सदस्यों के साथ-साथ ग्रामीणों की भी आंखें नम हो गईं. घर के आंगन में जैसे ही शव पहुंचा, अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. पत्नी तिला देवी, पुत्र वरुण, अरुण, करण, विशाल और पुत्री स्वीटी का रो-रोकर बुरा हाल था. लंबे इंतजार और प्रयासों के बाद जब रामानंद यादव का शव गांव पहुंचा तो परिजनों ने राहत की सांस ली, लेकिन परिवार के लिए यह पल बेहद भावुक और पीड़ादायक रहा.
रोजगार के लिए गये थे विदेश, छह जून को हुआ निधन
परिजनों के अनुसार रामानंद यादव करीब दस वर्षों से ओमान के मस्कट में प्लंबर के रूप में कार्यरत थे. वह परिवार के भरण-पोषण के लिए विदेश में काम कर रहे थे. पिछले वर्ष सितंबर में घर से वापस मस्कट लौटने के बाद वह वहीं काम कर रहे थे. इसी दौरान छह जून को अचानक हृदयाघात आने से उनकी मौत हो गई. घटना की सूचना मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा.
जनप्रतिनिधियों की पहल से संभव हो सका शव लाना
पूर्व उप प्रमुख बबलू मंडल ने बताया कि विदेश में मौत होने के कारण शव को स्वदेश लाने में कई तरह की औपचारिकताएं पूरी करनी थीं. परिजनों के आग्रह पर जदयू के प्रदेश सचिव पप्पू सिंह निषाद ने बिहार सरकार के मंत्री मदन सहनी से संपर्क किया. इसके बाद मंत्री ने राज्यसभा सांसद संजय झा से बातचीत कर मामले को आगे बढ़ाया. संबंधित अधिकारियों और भारतीय दूतावास के स्तर पर समन्वय स्थापित किया गया, जिसके बाद शव को भारत लाने की प्रक्रिया पूरी हो सकी.
परिजनों ने जताया आभार
शुक्रवार को पार्थिव शरीर लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचा, जहां से शनिवार को उसे अरसंडी गांव लाया गया. शव के पहुंचने के बाद परिवार को अंतिम दर्शन का अवसर मिला. मृतक के परिजनों और ग्रामीणों ने इस कार्य में सहयोग करने वाले जनप्रतिनिधियों, भारत सरकार और ओमान स्थित भारतीय दूतावास के प्रति आभार व्यक्त किया. उनका कहना था कि सभी के प्रयासों से ही रामानंद यादव का पार्थिव शरीर स्वदेश पहुंच सका और परिवार सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कर सका.
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