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लोहिया पुल से अलीगंज फोरलेन निर्माण में बाधा, सीमांकन नहीं होने से 50 करोड़ की परियोजना लटकी

Bhagalpur News :भागलपुर में लोहिया पुल से अलीगंज तक प्रस्तावित फोरलेन सड़क परियोजना को मंजूरी और कार्यादेश मिलने के बावजूद निर्माण शुरू नहीं हो सका है. आरओडब्ल्यू सीमांकन के लिए अमीन की प्रतिनियुक्ति नहीं होने से पूरी प्रक्रिया अटकी हुई है. विभाग ने इसे लेकर कई बार पत्राचार किया है, जबकि परियोजना को तय समयसीमा में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.

Bhagalpur News : भागलपुर में लोहिया पुल से अलीगंज तक प्रस्तावित फोरलेन सड़क निर्माण परियोजना को प्रशासनिक मंजूरी मिलने और एजेंसी चयन की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद काम धरातल पर शुरू नहीं हो पाया है. करीब 3.70 किलोमीटर लंबे इस मार्ग के चौड़ीकरण के लिए संबंधित एजेंसी को कार्यादेश भी जारी किया जा चुका है, लेकिन जमीन की सीमा निर्धारण प्रक्रिया लंबित रहने से परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रही है.

आरओडब्ल्यू सीमांकन नहीं होने से रुका निर्माण

जानकारी के अनुसार, सड़क निर्माण में सबसे बड़ी बाधा राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) के सीमांकन को लेकर बनी हुई है. सड़क की स्वीकृत सीमा और जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण निर्माण एजेंसी काम शुरू करने की स्थिति में नहीं है.

पथ निर्माण विभाग की ओर से इस संबंध में जगदीशपुर अंचल कार्यालय को कई बार पत्र भेजा गया है. जून माह के दौरान भी तीन बार पत्राचार किया गया, लेकिन अब तक सीमांकन कार्य के लिए अमीन की प्रतिनियुक्ति नहीं हो सकी है. इसी वजह से आरओडब्ल्यू निर्धारण की प्रक्रिया अधूरी है.

अमीन की तैनाती नहीं होने से एजेंसी इंतजार में

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जब तक जमीन का सीमांकन नहीं होगा, तब तक सड़क निर्माण की वास्तविक सीमा तय नहीं की जा सकती. इसके चलते चयनित संवेदक भी कार्य आरंभ नहीं कर पा रहा है. परियोजना की प्रगति पूरी तरह सीमांकन प्रक्रिया पर निर्भर हो गई है.

आरओडब्ल्यू सीमांकन में क्या-क्या तय होता है?

  1. सड़क की वास्तविक सीमा का निर्धारण
    आरओडब्ल्यू प्रक्रिया में यह तय किया जाता है कि स्वीकृत सड़क चौड़ाई जमीन पर किस सीमा तक लागू होगी.
  2. सरकारी और निजी भूमि की पहचान
    सीमांकन के दौरान यह स्पष्ट किया जाता है कि कौन-सी भूमि सरकारी है और कौन-सा हिस्सा निजी स्वामित्व में है.
  3. अतिक्रमण का पता लगाना
    सड़क सीमा के भीतर बने मकानों, दुकानों या अन्य संरचनाओं की पहचान की जाती है.
  4. मैदान में सीमांकन कार्य
    अमीन और सर्वे टीम पिलर, निशान या जीपीएस तकनीक की सहायता से वास्तविक सीमा चिह्नित करती है.
  5. चौड़ीकरण का दायरा तय करना
    सड़क विस्तार के लिए कितनी भूमि की आवश्यकता होगी, इसका निर्धारण इसी प्रक्रिया में होता है.
  6. भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई
    यदि निजी जमीन परियोजना क्षेत्र में आती है तो मुआवजा और अधिग्रहण संबंधी प्रक्रिया शुरू की जाती है.

31 मई 2027 तक पूरा होना है प्रोजेक्ट

करीब 50.17 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के लिए 31 मई 2027 तक कार्य पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. विभागीय अधिकारियों का मानना है कि यदि सीमांकन कार्य जल्द शुरू नहीं हुआ तो परियोजना की समयसीमा प्रभावित हो सकती है.

विभाग की ओर से भेजे गए पत्र में भी उल्लेख किया गया है कि 1 जून 2026 को संवेदक को औपबंधिक कार्यादेश जारी किया जा चुका है और निर्धारित अवधि के भीतर निर्माण पूरा किया जाना है.

कार्यपालक अभियंता ने क्या कहा

पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता अरविंद कुमार गुप्ता ने बताया कि आरओडब्ल्यू सीमांकन के लिए कई बार पत्राचार किया जा चुका है, लेकिन अब तक अमीन उपलब्ध नहीं कराया गया है. उन्होंने कहा कि अब अंचल अधिकारी से सीधे मुलाकात कर अमीन की प्रतिनियुक्ति का अनुरोध किया जाएगा, क्योंकि इसके बिना निर्माण कार्य शुरू करना संभव नहीं है.

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सोनी कुमारी
सोनी कुमारी
सोनी कुमारी डिजिटल मीडिया क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार हैं और Hellocities24 में ऑथर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार समेत देशभर की ताजा खबरों, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक मुद्दों पर लेखन करती हैं. सरल भाषा और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पहचान मानी जाती है. डिजिटल पत्रकारिता में समाचार लेखन और कंटेंट प्रेजेंटेशन का अच्छा अनुभव है. पाठकों तक तेज और भरोसेमंद खबरें पहुंचाना प्रमुख उद्देश्य है.
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