Raghopur Ganga Katav : खरीक प्रखंड के राघोपुर में गंगा का कटाव अब लोगों के आशियाने छीन रहा है. ब्रह्म बाबा स्थान के पास बांध को बचाने के लिए सरकारी मशीनरी और जल संसाधन विभाग ने प्रयास किए, लेकिन बांध टूटने से तबाही नहीं रुक सकी. गंगा की तेज धारा में 12 परिवारों के पक्के और कच्चे मकान समा गए. कई परिवार घरों से जरूरी सामान तक नहीं निकाल पाए. अब कटाव की जद में आए दूसरे परिवार अपने मकान खुद तोड़कर बची हुई सामग्री निकालने में जुटे हैं.
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12 परिवारों के घर नदी में समाए
गंगा के कटाव से मिथिलेश कुमार क्रांति, अखिलेश साह, मंटू यादव, नीरो यादव, वकील यादव, बोरो यादव, आनंदी यादव, अनिल मंडल, सुनील मंडल, कनिक मंडल, झकसु मंडल और मनोज मंडल के घर नदी में समा गए. वर्षों की मेहनत से तैयार किए गए मकानों के उजड़ने के बाद इन परिवारों के सामने रहने के लिए सुरक्षित जगह तलाशने की चुनौती खड़ी हो गई है.
24 परिवारों को घर का सामान बचाने की चिंता
कटाव का खतरा अभी भी बना हुआ है. अर्जुन यादव, बरुण यादव, फूलो यादव, अजय यादव, मन्नु यादव, संतोष यादव, भीखो यादव, सुधीर यादव, चुनो यादव, मन्नु मंडल, हीरा मंडल, जवाहर मंडल, मोती मंडल, लूखो मंडल, कमलेश्वरी मंडल, किलो मंडल, जोगी मंडल, शंकर मंडल, सुरेश मंडल, मोसमात रजिया, पुतुल कुमार, उदय कुमार, भजन कुमार और मधुसूदन कुमार के मकान कटाव के मुहाने पर हैं.
गंगा के बढ़ते खतरे को देखते हुए ये परिवार खुद अपने घरों को तोड़ रहे हैं. मकानों से ईंट, लकड़ी और दूसरी उपयोगी सामग्री निकालकर सुरक्षित रखने की कोशिश की जा रही है, ताकि नदी में सब कुछ समाने से पहले कुछ सामान बचाया जा सके. जिन घरों को परिवारों ने वर्षों की मेहनत से बनाया था, अब उन्हीं को अपनी आंखों के सामने तोड़ने की मजबूरी है.
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बेघर परिवारों के सामने पुनर्वास की चुनौती
राघोपुर में गंगा का कटाव प्रभावित परिवारों के लिए गंभीर संकट बन गया है. जिनके घर नदी में समा चुके हैं, उन्हें सुरक्षित ठिकाने की जरूरत है. वहीं, कटाव के मुहाने पर रह रहे परिवार अपने घर और सामान बचाने की आखिरी कोशिश में जुटे हैं. घरों के उजड़ने से उनकी वर्षों की मेहनत और सुरक्षित भविष्य की उम्मीदों पर संकट खड़ा हो गया है. अब इन परिवारों के सामने जान-माल की सुरक्षा के साथ दोबारा जीवन शुरू करने की चुनौती है.
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