इस खबर में क्या है?
Bihar Land Registry: बिहार में जमीन या मकान खरीदने वालों के लिए नियम बदल गए हैं. अब रजिस्ट्री के दौरान संपत्ति की वास्तविक कीमत छिपाकर कम स्टांप ड्यूटी देना आसान नहीं होगा. राज्य सरकार ने ‘भारतीय स्टांप (संशोधन) विधेयक-2026’ लागू कर दिया है और इसका गजट नोटिफिकेशन भी जारी हो चुका है. नए कानून के तहत राजस्व चोरी करने वालों पर पहले से कहीं ज्यादा सख्त कार्रवाई होगी.
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अब आधी कीमत दिखाकर नहीं बचा पाएंगे स्टांप ड्यूटी
अगर कोई खरीदार या विक्रेता जानबूझकर जमीन या मकान की कीमत कम दिखाकर स्टांप ड्यूटी बचाने की कोशिश करता है, तो उसे अब भारी कीमत चुकानी पड़ेगी. नए प्रावधान के मुताबिक, जितनी राजस्व चोरी होगी, उतनी ही यानी 100 प्रतिशत तक जुर्माना भी देना पड़ सकता है.
पहले ऐसे मामलों में अधिकतम 10 प्रतिशत तक जुर्माने का प्रावधान था, लेकिन अब सरकार ने इसे कई गुना सख्त कर दिया है.
जुर्माना नहीं भरा तो संपत्ति भी आ सकती है कानूनी कार्रवाई के दायरे में
नए कानून में भुगतान को लेकर भी कड़ा प्रावधान किया गया है. यदि तय समय के भीतर बकाया स्टांप ड्यूटी और जुर्माना जमा नहीं किया जाता है, तो खरीदी गई संपत्ति पर भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.
साथ ही, राजस्व चोरी की जांच की समय-सीमा 2 साल से बढ़ाकर 4 साल कर दी गई है. यानी पुराने मामलों की जांच भी लंबे समय तक संभव होगी.
आदेश के बाद सिर्फ 60 दिन का मिलेगा समय
यदि किसी मामले में जिलाधिकारी (DM) या सहायक निबंधन महानिरीक्षक (AIG) राजस्व चोरी का मामला सही पाते हैं, तो संबंधित व्यक्ति को 60 दिनों के भीतर बकाया राशि और जुर्माना जमा करना होगा.
समय सीमा पार होने पर ब्याज भी देना पड़ेगा. हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि ब्याज की कुल राशि मूल राजस्व चोरी की रकम से अधिक नहीं होगी.
रजिस्ट्री से पहले ही होगी बाजार मूल्य की जांच
नई व्यवस्था में सहायक निबंधन अधिकारी को अतिरिक्त अधिकार दिए गए हैं. यदि उन्हें किसी संपत्ति की घोषित कीमत पर संदेह होगा, तो वे रजिस्ट्री से पहले ही मामला जिलाधिकारी या सहायक निबंधन महानिरीक्षक के पास भेज सकेंगे.
इसके बाद संपत्ति का वास्तविक बाजार मूल्य तय किया जाएगा. सरकार का मानना है कि इससे फर्जी मूल्यांकन और स्टांप ड्यूटी चोरी पर शुरुआत में ही रोक लग सकेगी.
अब सुनवाई भी होगी तेज
पहले राजस्व चोरी के मामलों की सुनवाई का अधिकार केवल जिलाधिकारी के पास था. अब सहायक निबंधन महानिरीक्षक (AIG) भी ऐसे मामलों में सुनवाई कर सकेंगे और फैसला दे सकेंगे. इससे लंबित मामलों के जल्द निपटारे की उम्मीद है.
हर साल सामने आते हैं हजारों मामले
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025-26 में बिहार में 15.94 लाख दस्तावेजों की रजिस्ट्री हुई थी. इनमें करीब 80 प्रतिशत रजिस्ट्रियां जमीन से जुड़ी थीं. वहीं, राज्य के 38 जिलों में हर साल औसतन 20 हजार राजस्व चोरी के मामले सामने आते हैं. इन्हीं मामलों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने जीपीएस मैपिंग और आधुनिक जांच व्यवस्था को भी मजबूत किया है.
क्या बदला? एक नजर में
- संपत्ति की कीमत कम बताने पर अब 100% तक जुर्माना.
- राजस्व चोरी की जांच की समय-सीमा 2 साल से बढ़ाकर 4 साल.
- आदेश मिलने के बाद 60 दिनों के भीतर बकाया राशि और जुर्माना जमा करना होगा.
- तय समय के बाद भुगतान पर ब्याज देना पड़ेगा.
- रजिस्ट्री से पहले ही संपत्ति का वास्तविक बाजार मूल्य तय कराया जा सकेगा.
- AIG को भी सुनवाई और फैसला देने का अधिकार मिला.
- GPS Mapping और आधुनिक जांच से फर्जीवाड़े पर सख्ती बढ़ेगी.
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