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EOU Raid Bihar: बिहार में भ्रष्टाचार के मामलों पर आर्थिक अपराध इकाई (EOU) लगातार शिकंजा कस रही है. अब जांच की आंच सहरसा के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) अजीत अमर तक पहुंच गई है. आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में शुक्रवार सुबह ईओयू की टीम ने उनके चार अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ दबिश दी. कार्रवाई के दौरान बैंक खातों का ब्योरा, निवेश से जुड़े दस्तावेज, अचल संपत्ति के कागजात और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है.
शिकायत की पुष्टि के बाद दर्ज हुआ केस
सूत्रों के मुताबिक, अजीत अमर की संपत्ति को लेकर मिली शिकायतों का आर्थिक अपराध इकाई ने पहले सत्यापन कराया. जांच में प्रथम दृष्टया आय से अधिक संपत्ति के संकेत मिलने के बाद 6 अगस्त 2026 को EOU थाना कांड संख्या 17/26 दर्ज किया गया. इसके बाद मुजफ्फरपुर स्थित विशेष निगरानी अदालत से तलाशी वारंट प्राप्त कर छापेमारी की अनुमति ली गई.
शुरुआती जांच में सामने आई 62.20 लाख रुपये की अतिरिक्त संपत्ति
ईओयू की प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि अजीत अमर के पास उनकी ज्ञात आय की तुलना में 62 लाख 20 हजार 550 रुपये की अतिरिक्त संपत्ति होने की बात सामने आई है. एजेंसी के अनुसार यह संपत्ति उनकी घोषित आय से लगभग 2.35 प्रतिशत अधिक पाई गई है. इसी आधार पर मामले की विस्तृत जांच शुरू की गई है.
चार टीमों ने चार ठिकानों पर एक साथ मारी रेड
शुक्रवार सुबह डीएसपी रैंक के अधिकारियों के नेतृत्व में गठित टीमों ने एक साथ चार स्थानों पर छापेमारी शुरू की. जिन ठिकानों पर कार्रवाई चल रही है, उनमें शामिल हैं.
- सहरसा के बरियाही थाना क्षेत्र स्थित पैतृक एवं निजी मकान.
- सहरसा के नया बाजार स्थित किराये का आवास.
- सहरसा स्थित सरकारी कार्यालय.
- छपरा के गंडक कॉलोनी स्थित सरकारी आवास.
चारों जगहों से दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड, निवेश संबंधी कागजात और संपत्ति से जुड़े साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं.
छापेमारी के बाद खुलेगा पूरी संपत्ति का राज
फिलहाल ईओयू की टीम सभी दस्तावेजों का मिलान कर रही है. अधिकारियों का कहना है कि छापेमारी पूरी होने के बाद ही यह साफ होगा कि अजीत अमर के पास कुल कितनी चल और अचल संपत्ति है. साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि आय से अधिक संपत्ति के अलावा किसी अन्य वित्तीय अनियमितता या बेनामी निवेश के भी प्रमाण मिलते हैं या नहीं.
जांच रिपोर्ट के बाद तय होगी अगली कार्रवाई
ईओयू अधिकारियों के अनुसार अभी जांच जारी है. छापेमारी से मिले दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा. यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो आरोपी अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानूनों के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
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