Bihar Panchayat Chunav: बिहार में पंचायत प्रतिनिधियों की जवाबदेही तय करने को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ा बयान दिया है. ग्राम संवाद कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों से उनके क्षेत्र में पांच साल के दौरान हुई आर्थिक प्रगति का हिसाब लिया जाएगा. जिला परिषद, प्रखंड, ग्राम पंचायत, प्रखंड प्रमुख और मुखिया से उनके क्षेत्र की GDP में हुई बढ़ोतरी को लेकर सवाल किया जाएगा.
मुख्यमंत्री ने इसके साथ पंचायत चुनाव को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव नये परिसीमन के बाद ही कराए जाएंगे. राज्य निर्वाचन आयोग की निगरानी में परिसीमन की प्रक्रिया चल रही है.
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Bihar Panchayat Chunav: पंचायत प्रतिनिधियों से पूछा जाएगा 5 साल का हिसाब
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब सिर्फ पंचायतों में योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी देना पर्याप्त नहीं होगा. जनप्रतिनिधियों से यह भी पूछा जाएगा कि उनके कार्यकाल में क्षेत्र की GDP कितनी बढ़ी और आर्थिक गतिविधियों में कितना विस्तार हुआ.
उन्होंने जिला परिषद से लेकर ग्राम पंचायत और प्रखंड प्रमुख व मुखिया तक के स्तर पर विकास का हिसाब लेने की बात कही.
चुनाव से पहले पूरा होगा पंचायतों का नया परिसीमन
पंचायत चुनाव को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि नये परिसीमन के बाद ही चुनाव कराए जाएंगे. राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से पंचायतों के परिसीमन का काम कराया जा रहा है. आयोग की वेबसाइट पर 2026 पंचायत परिसीमन के लिए ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद और वार्ड से संबंधित अधिसूचनाएं भी उपलब्ध हैं.
पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश भी पहले स्पष्ट कर चुके हैं कि परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तारीखों की घोषणा की जाएगी.
पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत करने पर जोर
मुख्यमंत्री ने पंचायतों की अपनी आय बढ़ाने पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि गरीबों पर टैक्स नहीं लगाया जाएगा, लेकिन पंचायत क्षेत्र में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों से कर वसूली होनी चाहिए.
उन्होंने ईंट-भट्ठों, निजी स्कूलों और मोबाइल टावरों जैसी गतिविधियों से पंचायतों को टैक्स वसूलने की बात कही. इससे पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत करने की कोशिश के संकेत मिलते हैं.
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पंचायत सरकार भवनों को मिनी सचिवालय की तरह विकसित करने की तैयारी
पंचायत सरकार भवनों को भी ग्रामीण स्तर पर सरकारी सेवाओं का प्रमुख केंद्र बनाने की तैयारी है. इन्हें मिनी सचिवालय की तर्ज पर विकसित करने की बात कही गई है, ताकि लोगों को अलग-अलग सरकारी सेवाओं के लिए इधर-उधर नहीं भटकना पड़े.
इन भवनों में जनप्रतिनिधियों के साथ संबंधित कर्मियों की मौजूदगी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है.
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