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Muzaffarpur Crime News: चोरी की वारदातों को अंजाम देने वाले एक गिरोह ने पुलिस से बचने के लिए ऐसा तरीका अपनाया, जिसे देखकर जांच टीम भी हैरान रह गई. गिरोह के सदस्यों ने चोरी की नकदी को घर में रखने के बजाय तकिए के अंदर सिलकर छिपा दिया था. हालांकि पुलिस की तलाशी में उनकी यह चालाकी ज्यादा देर तक नहीं चल सकी. अहियापुर थाना क्षेत्र में सक्रिय इस गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार कर पुलिस ने 11 लाख 37 हजार 80 रुपये नकद, करीब 10 लाख रुपये के सोने-चांदी के आभूषण और चोरी में इस्तेमाल होने वाले कई सामान बरामद किए हैं.
चार चोरी की वारदातों का एक साथ खुलासा
एसडीपीओ-2 विनीता सिन्हा ने बताया कि जिले में लगातार हो रही चोरी की घटनाओं के बाद एसएसपी के निर्देश पर विशेष टीम का गठन किया गया था. टीम ने तकनीकी और मानवीय सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए गिरोह तक पहुंच बनाई. इस कार्रवाई से अहियापुर थाना में दर्ज चोरी के चार अलग-अलग मामलों का एक साथ खुलासा हो गया.
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दो लोग बनाते थे प्लान, बाकी देते थे साथ
पुलिस ने नीतीश कुमार, धर्मेंद्र सहनी, मिथुन महतो और दुर्गेश कुमार को गिरफ्तार किया है. इनमें धर्मेंद्र सहनी और मिथुन महतो को गिरोह का मास्टरमाइंड बताया गया है. पुलिस के अनुसार दोनों ही चोरी की पूरी योजना तैयार करते थे, जबकि बाकी सदस्य वारदात को अंजाम देने और सामान ठिकाने लगाने में सहयोग करते थे.
नकदी के साथ लाखों के जेवर और कई सामान जब्त
छापेमारी के दौरान पुलिस ने 11.37 लाख रुपये नकद, करीब 57 ग्राम सोने और 415 ग्राम चांदी के आभूषण बरामद किए. जब्त सामान में सोने की अंगूठियां, चेन, मंगलसूत्र, मांगटीका, नथ, नोज पिन और टॉप्स के अलावा चांदी की पायल व ब्रेसलेट शामिल हैं.
इसके अलावा चार मोबाइल फोन, चोरी में इस्तेमाल की जाने वाली साइकिल, कैमरा, पांच गैस सिलेंडर, दो बैग, जैकेट और कोट भी बरामद किए गए हैं.
अखबार से पता लगाते थे कौन-सा घर है खाली
पूछताछ में आरोपियों ने चोरी का तरीका भी बताया. वे पहले मोहल्लों में घूमकर बंद घरों की पहचान करते थे. इसके लिए मुख्य गेट पर अखबार या कोई छोटा सामान रख देते थे. अगर कई दिनों तक वह सामान वहीं पड़ा रहता, तो उन्हें यकीन हो जाता कि घर में कोई नहीं है. इसके बाद रात के समय साइकिल से पहुंचकर चोरी की वारदात को अंजाम दिया जाता था.
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चोरी के पैसों से चला रहे थे शराब का धंधा
पुलिस जांच में सामने आया कि धर्मेंद्र सहनी और मिथुन महतो पहले भी शराब सेवन और शराब तस्करी के मामलों में जेल जा चुके हैं. प्रारंभिक जांच के मुताबिक चोरी से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल अवैध शराब के कारोबार और अन्य आपराधिक गतिविधियों में किया जाता था.
अब सर्राफा कारोबारियों की भूमिका भी खंगालेगी पुलिस
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि चोरी के जेवर आखिर किन सर्राफा कारोबारियों तक पहुंचते थे. जब्त मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच कर गिरोह के पूरे नेटवर्क को खंगाला जा रहा है. वहीं बरामद गैस सिलेंडरों के स्रोत की भी जांच की जा रही है. पुलिस का कहना है कि गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी चल रही है.
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