इस खबर में क्या है?
Samrat Choudhary: नई दिल्ली स्थित बिहार भवन में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान बिहार सरकार ने राज्य में तकनीकी निवेश आकर्षित करने की दिशा में नया प्रयास किया है. उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गूगल इंडिया के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विभिन्न विकासात्मक संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया. बैठक में तकनीक आधारित परियोजनाओं, निवेश और भविष्य की साझेदारी को लेकर विस्तार से चर्चा हुई.
गूगल अधिकारियों के साथ हुई विस्तृत बातचीत
बैठक के दौरान राज्य सरकार की ओर से गूगल को बिहार में अपना ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित करने का प्रस्ताव दिया गया. सम्राट चौधरी ने कंपनी के प्रतिनिधियों को भरोसा दिलाया कि निवेश से जुड़ी आवश्यक सुविधाएं और सहयोग उपलब्ध कराने के लिए सरकार पूरी तरह तैयार है. उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से भी बैठक की जानकारी साझा करते हुए कहा कि शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य और तकनीकी क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर सकारात्मक चर्चा हुई है.
बिहार भवन, नई दिल्ली में गूगल इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट श्री चंदू थोटा जी के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने भेंट की।
— Samrat Choudhary (@samrat4bjp) June 10, 2026
बैठक में तकनीक, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं कृषि क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। इस दौरान बिहार GCC नीति- 2026 के अंतर्गत गूगल को… pic.twitter.com/BY41dBpUgK
रोजगार के नए अवसर बनने की उम्मीद
गूगल जैसी वैश्विक तकनीकी कंपनी के संभावित निवेश को बिहार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. यदि कंपनी राज्य में अपना केंद्र स्थापित करती है, तो बड़ी संख्या में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर विकसित हो सकते हैं. साथ ही तकनीकी क्षेत्र से जुड़े उद्योगों और सेवाओं को भी नई गति मिलने की संभावना है. जानकारों का मानना है कि इससे राज्य में निवेश का माहौल मजबूत होगा.
क्या है ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर?
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर किसी बहुराष्ट्रीय कंपनी का ऐसा प्रमुख केंद्र होता है, जहां तकनीकी विकास, अनुसंधान, डेटा प्रबंधन और अन्य महत्वपूर्ण कार्य संचालित किए जाते हैं. देश के कई बड़े शहरों में गूगल के ऐसे केंद्र कार्यरत हैं, जहां विशेषज्ञ और इंजीनियर वैश्विक स्तर पर उपयोग होने वाली सेवाओं एवं उत्पादों के विकास में योगदान देते हैं.
आधुनिक तकनीकों पर होता है अनुसंधान
गूगल के इन केंद्रों में क्लाउड टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल पेमेंट सिस्टम और सर्च प्लेटफॉर्म जैसी उन्नत तकनीकों पर काम किया जाता है. इसके अलावा नई तकनीकों के विकास और रिसर्च से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट भी यहीं संचालित होते हैं. इन्हें तकनीकी नवाचार के प्रमुख केंद्रों में गिना जाता है.
टेक्नोलॉजी हब के रूप में पहचान दिलाने की कोशिश
राज्य सरकार का उद्देश्य बिहार को देश के उभरते तकनीकी केंद्रों की श्रेणी में शामिल करना है. इसी सोच के तहत बड़ी वैश्विक कंपनियों को निवेश के लिए आमंत्रित किया जा रहा है. सरकार का मानना है कि ऐसे निवेश से तकनीकी शिक्षा, उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन देखने को मिल सकता है.
युवाओं के लिए खुल सकते हैं नए रास्ते
तकनीकी क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले बिहार के युवाओं के लिए यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है. गूगल जैसी कंपनी की संभावित मौजूदगी से स्थानीय प्रतिभाओं को राज्य में ही अवसर मिलने की संभावना बढ़ेगी. फिलहाल आगे की प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है, लेकिन इस पहल ने राज्य में तकनीकी निवेश को लेकर नई उम्मीदें जरूर पैदा कर दी हैं.

