Abhishek Banerjee Interrogated: पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता के चयन से जुड़े दस्तावेजों पर कथित हस्ताक्षर गड़बड़ी मामले की जांच तेज हो गई है. इसी सिलसिले में राज्य की अपराध अन्वेषण विभाग (CID) ने रविवार को तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी और विधायक कुणाल घोष से विस्तृत पूछताछ की. जांच एजेंसी ने दोनों नेताओं को मामले से जुड़े तथ्यों और बैठकों की परिस्थितियों को लेकर सवालों के जवाब देने के लिए बुलाया था.
अलग-अलग पूछताछ के बाद दोनों को बैठाया गया आमने-सामने
जांच अधिकारियों ने शुरुआत में दोनों नेताओं से अलग-अलग बातचीत की. बाद में मामले के विभिन्न पहलुओं को स्पष्ट करने के लिए उन्हें आमने-सामने बैठाकर भी सवाल किए गए. पूछताछ के दौरान अधिकारियों ने पूरे घटनाक्रम का रिकॉर्ड तैयार किया और संबंधित दस्तावेजों के बारे में जानकारी जुटाई.
पूछताछ के बाद बाहर आए कुणाल घोष ने कहा कि उन्होंने जांच एजेंसी के सभी सवालों का जवाब दिया है और पूरी प्रक्रिया में सहयोग किया है. उन्होंने यह भी बताया कि पूछताछ के दौरान उन्हें और अभिषेक बनर्जी को एक साथ बैठाकर कई बिंदुओं पर जानकारी ली गई.
19 मई की बैठक बनी जांच का केंद्र
जांच का मुख्य फोकस उस बैठक पर रहा, जो 19 मई को आयोजित की गई थी. अधिकारियों ने यह जानने की कोशिश की कि बैठक में कौन-कौन शामिल था, प्रस्ताव तैयार करने की प्रक्रिया क्या थी और संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किस तरह लिए गए थे.
सूत्रों का कहना है कि अधिकारियों ने बैठक से जुड़े कई पहलुओं पर विस्तार से जानकारी मांगी. दस्तावेजों की तैयारी और उन्हें विधानसभा सचिवालय तक पहुंचाने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल पूछे गए.
पहले दौर की पूछताछ के बाद दोबारा बुलाया गया
जानकारी के मुताबिक, अभिषेक बनर्जी से इससे पहले भी पूछताछ की जा चुकी थी. हालांकि जांच एजेंसी को कुछ बिंदुओं पर और स्पष्टीकरण की आवश्यकता महसूस हुई, जिसके बाद उन्हें दोबारा बुलाया गया. अधिकारियों ने उनसे उस बैठक के बारे में भी जानकारी ली, जिसमें विपक्ष के नेता पद के लिए नाम का समर्थन दर्ज किया गया था.
मई महीने की बैठकों से जुड़ा है पूरा मामला
मामले की शुरुआत मई महीने में हुई बैठकों से जुड़ी बताई जा रही है. पार्टी विधायकों की एक बैठक में विपक्ष के नेता पद के लिए एक नाम पर समर्थन व्यक्त किया गया था. इसके बाद विधानसभा सचिवालय की ओर से औपचारिक प्रस्ताव जमा करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी.
बाद में एक दस्तावेज विधानसभा को सौंपा गया, जिसमें बड़ी संख्या में विधायकों के हस्ताक्षर होने का दावा किया गया था. हालांकि बाद में कुछ दस्तावेजों में हस्ताक्षरों को लेकर सवाल उठे, जिसके बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया.
कई विधायकों से भी हो चुकी है पूछताछ
हस्ताक्षरों में कथित विसंगतियों की शिकायत सामने आने के बाद मामला जांच एजेंसियों तक पहुंचा और प्राथमिकी दर्ज की गई. इसके बाद CID ने जांच शुरू की. जांच के दौरान एजेंसी कई विधायकों और संबंधित लोगों से पहले ही पूछताछ कर चुकी है.
अधिकारियों का कहना है कि दस्तावेजों की सत्यता और पूरी प्रक्रिया की पड़ताल की जा रही है. जांच पूरी होने के बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर निर्णय लिया जाएगा.
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