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West Bengal Smart Meters Rollout: पश्चिम बंगाल में बिजली व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. राज्य सरकार और केंद्र के बीच हुई उच्चस्तरीय समीक्षा के बाद स्मार्ट मीटर परियोजना को लागू करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है. योजना के तहत आने वाले समय में राज्यभर के बिजली उपभोक्ताओं के पुराने मीटर हटाकर स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे. इस पहल का उद्देश्य बिजली वितरण व्यवस्था को मजबूत करना, राजस्व संग्रह बढ़ाना और तकनीकी नुकसान को कम करना है.
जुलाई से शुरू होगा स्मार्ट मीटर लगाने का अभियान
सरकार ने इस परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की रूपरेखा तैयार की है. तय कार्यक्रम के अनुसार जुलाई 2026 से स्मार्ट मीटर लगाने का अभियान मिशन मोड में शुरू किया जाएगा. इससे पहले जून 2026 तक सरकारी कार्यालयों और सरकारी परिसरों में स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य रखा गया है. इसके बाद इन संस्थानों को प्रीपेड प्रणाली से जोड़ने की तैयारी की जाएगी.
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पहले सरकारी संस्थान, फिर उद्योग और घरेलू उपभोक्ता
योजना के पहले चरण में सरकारी प्रतिष्ठानों को शामिल किया जाएगा. इसके बाद बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे. अंतिम चरण में घरेलू उपभोक्ताओं तक इस व्यवस्था का विस्तार किया जाएगा. राज्य में लगभग दो करोड़ बिजली उपभोक्ता इस परियोजना के दायरे में आएंगे.
उपभोक्ताओं को मिलेगी विकल्प चुनने की सुविधा
स्मार्ट मीटर लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को केवल प्रीपेड प्रणाली तक सीमित नहीं रखा जाएगा. सरकार की योजना है कि लोग अपनी जरूरत और सुविधा के अनुसार प्रीपेड या पोस्टपेड, किसी भी मॉडल का चयन कर सकें. स्मार्ट मीटर लगाने की लागत को आसान बनाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से प्रति मीटर 900 रुपये की सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी. उपभोक्ताओं को मीटर स्थापना के लिए एकमुश्त राशि देने की आवश्यकता नहीं होगी और निर्धारित अंशदान मासिक बिल के माध्यम से लिया जाएगा.
बिजली क्षेत्र के घाटे और नुकसान को कम करने पर जोर
समीक्षा बैठक में बिजली वितरण तंत्र से जुड़े वित्तीय और तकनीकी पहलुओं पर भी चर्चा हुई. अधिकारियों के अनुसार राज्य में ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन लॉस अभी दोहरे अंक में है, जिसे स्मार्ट मीटरिंग और बेहतर निगरानी व्यवस्था के जरिए कम करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके साथ ही बिजली क्षेत्र में बढ़े वित्तीय दबाव को कम करने और बकाया राशि की वसूली पर भी विशेष फोकस किया जाएगा.
दो महीने में तैयार होगा नई रणनीति का खाका
बिजली क्षेत्र को दीर्घकालिक रूप से मजबूत बनाने के लिए व्यापक योजना तैयार की जा रही है. इसके तहत ऊर्जा स्रोतों के बेहतर प्रबंधन, बकाया वसूली और वितरण प्रणाली में सुधार को लेकर अलग-अलग स्तर पर कार्य होगा. अधिकारियों को अगले दो महीनों में विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया गया है.
सौर ऊर्जा योजनाओं को भी मिलेगा बढ़ावा
स्मार्ट मीटर परियोजना के साथ-साथ अक्षय ऊर्जा कार्यक्रमों पर भी जोर दिया जा रहा है. राज्य सरकार ने केंद्र को भरोसा दिलाया है कि ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ और ‘पीएम-कुसुम योजना’ के क्रियान्वयन में तेजी लाई जाएगी. सरकार का मानना है कि इन योजनाओं के विस्तार से घरेलू उपभोक्ताओं और किसानों को स्वच्छ तथा अपेक्षाकृत सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी.
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