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Bihar Cabinet: बिहार सरकार की कैबिनेट बैठक में बुधवार को कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगायी गयी. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में भूमि अधिग्रहण, स्वास्थ्य सेवाओं, सड़क निर्माण, सिंचाई योजनाओं और सरकारी कर्मचारियों से जुड़े मामलों पर बड़े निर्णय लिये गये. सरकार ने नई भूमि खरीद नीति को मंजूरी देते हुए मुआवजा व्यवस्था में बदलाव का फैसला किया है.
शहर और गांव दोनों के लिए बदली मुआवजा व्यवस्था
सरकार की नई नीति के अनुसार सरकारी परियोजनाओं के लिए जमीन उपलब्ध कराने वाले लोगों को पहले की तुलना में अधिक भुगतान मिलेगा. शहरी क्षेत्रों में जमीन अधिग्रहण होने पर बाजार मूल्य का दोगुना मुआवजा दिया जायेगा, जबकि ग्रामीण इलाकों में यह राशि बाजार दर से चार गुना तक हो सकती है.
इसके अतिरिक्त प्रभावित लोगों को 10 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि भी उपलब्ध करायी जायेगी. सरकार ने यह भी तय किया है कि इस प्रक्रिया में जमीन हस्तांतरण पर स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क नहीं लिया जायेगा.
कैशलेस इलाज की सुविधा लागू करने का फैसला
कैबिनेट ने जनप्रतिनिधियों और सरकारी कर्मियों के लिए स्वास्थ्य सुविधा से जुड़ा बड़ा फैसला लिया है. इसके तहत विधायक, पूर्व विधायक, आईएएस-आईपीएस अधिकारी, सरकारी कर्मचारी और पेंशनधारकों को कैशलेस इलाज की सुविधा दी जायेगी.
नई व्यवस्था लागू होने के बाद अस्पताल में भर्ती होने पर लाभार्थियों को तत्काल इलाज के लिए जेब से पैसा खर्च नहीं करना पड़ेगा.
PMCH में बनेगा स्पेशल स्पाइन सेंटर
बैठक में पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आधुनिक स्पाइन सेंटर स्थापित करने को भी मंजूरी दी गयी. इस सेंटर में रीढ़ की हड्डी से संबंधित गंभीर बीमारियों और सड़क दुर्घटना में घायल मरीजों का विशेष इलाज किया जायेगा.
यहां एंडोस्कोपिक तकनीक से ऑपरेशन और स्पाइन टीबी जैसी जटिल बीमारियों का उपचार भी संभव होगा. इसके लिए 39 नये पदों के सृजन को मंजूरी दी गयी है.
छोटे अस्पतालों के लिए बनेगी अलग नियमावली
सरकार ने छोटे निजी अस्पतालों और क्लीनिकों की निगरानी के लिए नई व्यवस्था तैयार करने का निर्णय लिया है. इसमें 1 से 40 बेड वाले अस्पताल, पैथोलॉजी लैब, डेंटल क्लीनिक और निजी ओपीडी को शामिल किया जायेगा.
इन संस्थानों के रजिस्ट्रेशन और संचालन की निगरानी जिला और राज्य स्तर पर अलग तंत्र के माध्यम से की जायेगी.
सचिवालय कर्मचारियों को राहत
कैबिनेट ने बिहार सचिवालय कर्मियों से जुड़े कई बदलावों को भी मंजूरी दी. जूनियर क्लर्क का पदनाम बदलकर सचिवालय सहायक और सीनियर क्लर्क का नाम वरीय सचिवालय सहायक कर दिया गया है.
ऑफिस अटेंडेंट के प्रमोशन कोटे को 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया है. साथ ही प्रोबेशन अवधि को दो साल से घटाकर एक साल कर दिया गया है.
सड़क और सिंचाई परियोजनाओं पर भी फैसला
बैठक में कई बड़ी सड़क परियोजनाओं को स्वीकृति दी गयी. दरभंगा-जाले सड़क के चौड़ीकरण और मजबूतीकरण पर लगभग 990 करोड़ रुपये खर्च किये जायेंगे. SH-97 सड़क के करीब 47.8 किलोमीटर हिस्से का निर्माण कराया जायेगा.
सुपौल-अररिया सड़क परियोजना के लिए 703 करोड़ रुपये मंजूर किये गये हैं. वहीं बक्सर और समस्तीपुर से जुड़ी सड़क योजनाओं पर करीब 982 करोड़ रुपये खर्च करने की मंजूरी दी गयी है.
कोसी परियोजना और बाढ़ सुरक्षा पर जोर
कैबिनेट ने कोसी सिंचाई योजना और बाढ़ सुरक्षा कार्यों के लिए 102.98 करोड़ रुपये जारी करने का फैसला लिया है. मधुबनी में नहरों के आधुनिकीकरण का काम कराया जायेगा, जिससे करीब 89 हजार हेक्टेयर खेतों को सिंचाई सुविधा मिल सकेगी.
इसके अलावा मधुबनी और सुपौल जिलों में बाढ़ से सुरक्षा के लिए बांधों और तटबंधों को मजबूत करने की योजना पर भी सहमति बनी है.
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