इस खबर में क्या है?
TMC Congress Merger: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों एक नई चर्चा जोर पकड़ रही है. विधानसभा चुनाव 2026 में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की हार और पार्टी के भीतर कथित तौर पर बढ़े विभाजन के बाद अब टीएमसी के कांग्रेस में विलय की संभावनाओं को लेकर राजनीतिक हलकों में अटकलें लगाई जा रही हैं. चर्चा है कि ममता बनर्जी अपनी पार्टी को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल करने के विकल्प पर विचार कर रही हैं. यदि ऐसा होता है, तो यह बंगाल और राष्ट्रीय राजनीति दोनों के लिए बड़ा घटनाक्रम माना जाएगा.
दिल्ली में हुईं महत्वपूर्ण बैठकों पर टिकी निगाहें
जानकारों की मानें तो दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व और टीएमसी के शीर्ष नेताओं के बीच लगातार दो अहम बैठकों का दौर चला है. बताया जा रहा है कि जांच एजेंसियों की कार्रवाई और पार्टी के भीतर बढ़ती असंतोष की स्थिति के बीच ममता बनर्जी ने कांग्रेस नेतृत्व से संपर्क साधा है. इसी क्रम में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के साथ भी उनकी बातचीत हुई है.
इसे भी पढ़ें-ममता बनर्जी को बड़ा झटका, कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने छोड़ी कुर्सी
28 साल बाद पुराने राजनीतिक ठिकाने की ओर वापसी की चर्चा
राजनीतिक गलियारों में यह भी कहा जा रहा है कि ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी अपने राजनीतिक भविष्य और कानूनी चुनौतियों को देखते हुए नए विकल्पों पर विचार कर रहे हैं. यदि विलय की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो यह लगभग 28 वर्ष बाद ममता बनर्जी की कांग्रेस में संभावित वापसी के रूप में देखा जाएगा. गौरतलब है कि उन्होंने कांग्रेस से अलग होकर अपनी नई राजनीतिक राह बनाई थी.
पश्चिम बंगाल की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें
इंडिया गठबंधन की बैठक के बाद तेज हुआ घटनाक्रम
सोमवार को नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में इंडिया गठबंधन की बैठक के बाद राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की बात कही जा रही है. इसके बाद ममता बनर्जी ने सोनिया गांधी से उनके आवास पर मुलाकात की. बताया जाता है कि करीब 45 मिनट चली इस बैठक में पार्टी की मौजूदा स्थिति, सांसदों की नाराजगी और संगठन के भीतर चल रहे घटनाक्रमों पर चर्चा हुई.
संगठन बचाने की चुनौती पर चर्चा
जानकारों की मानें तो बातचीत के दौरान ममता बनर्जी ने बंगाल की बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों का जिक्र किया. यह भी कहा जा रहा है कि उन्होंने राज्य में नई परिस्थितियों के बीच पार्टी संगठन को मजबूत बनाए रखने की चुनौतियों पर अपनी चिंता व्यक्त की. राजनीतिक पर्यवेक्षक इस पूरे घटनाक्रम को टीएमसी के भविष्य से जोड़कर देख रहे हैं.
इसे भी पढ़ें-बंगाल में क्या बंद होगी फ्री बिजली? 2 करोड़ घरों में लगेंगे स्मार्ट मीटर, बड़े बदलाव की तैयारी
राहुल गांधी और अभिषेक बनर्जी की बैठक की भी चर्चा
इसी बीच यह दावा भी किया जा रहा है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के बीच भी एक लंबी बैठक हुई. राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि इस मुलाकात में मौजूदा राजनीतिक हालात, कानूनी चुनौतियों और आगे की रणनीति को लेकर बातचीत हुई. हालांकि इन बैठकों को लेकर आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है.
विलय की चर्चा को क्यों मिल रही है हवा?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि टीएमसी और कांग्रेस के बीच औपचारिक विलय होता है, तो इससे दोनों पक्षों के लिए नई राजनीतिक संभावनाएं बन सकती हैं. एक ओर कांग्रेस को बंगाल में संगठनात्मक मजबूती मिल सकती है, वहीं दूसरी ओर टीएमसी नेतृत्व को राष्ट्रीय स्तर पर बड़े विपक्षी मंच का हिस्सा बनने का अवसर मिलेगा. साथ ही राज्य में पुराने कांग्रेस कार्यकर्ताओं और टीएमसी के संगठनात्मक ढांचे के बीच समन्वय की संभावना भी जताई जा रही है.
आसान नहीं मानी जा रही वापसी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रक्रिया आसान नहीं होगी. ममता बनर्जी ने 1 जनवरी 1998 को कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की थी. उस समय उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ खुला मोर्चा लिया था. ऐसे में यदि अब दोनों दल एक मंच पर आते हैं, तो इसे भारतीय राजनीति के बड़े बदलावों में गिना जाएगा.
कांग्रेस के भीतर भी उठ रहे सवाल
विलय की संभावनाओं को लेकर पश्चिम बंगाल कांग्रेस के कुछ नेताओं के बीच असहमति की भी चर्चा है. पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी के करीबी माने जाने वाले नेताओं का तर्क है कि लंबे समय तक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रही पार्टी को कांग्रेस में शामिल करना संगठन के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है. वहीं टीएमसी के कुछ प्रमुख नेताओं और सांसदों की चुप्पी भी राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे रही है.
सियासी हलकों में जारी है कयासों का दौर
फिलहाल टीएमसी और कांग्रेस के संभावित विलय को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है, लेकिन दिल्ली और कोलकाता के राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर चर्चा लगातार जारी है. आने वाले दिनों में दोनों दलों की ओर से होने वाले कदमों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं.
इसे भी पढ़ें-

