Anti Paper Leak Bill 2026: प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली पर शिकंजा कसने के लिए केंद्र सरकार ने संसद में ‘पब्लिक एग्जामिनेशन्स (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026’ पेश किया है. विधेयक पर लोकसभा में चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं नई नहीं हैं और कांग्रेस तथा यूपीए सरकारों के दौरान भी ऐसे कई मामले सामने आए थे. वहीं सरकार ने साफ किया कि इस बार कानून को पहले से अधिक सख्त बनाया जा रहा है.
लोकसभा में जितेंद्र सिंह ने गिनाए पुराने पेपर लीक के मामले
चर्चा के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अलग-अलग राज्यों और विभिन्न परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं लंबे समय से होती रही हैं. उन्होंने कहा कि यह समस्या किसी एक राज्य तक सीमित नहीं रही, लेकिन पहले इसके खिलाफ उतनी कठोर कार्रवाई नहीं हुई जितनी अब की जा रही है.
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#WATCH | Union Minister Jitendra Singh lists the paper leaks during the UPA; he says, "…In 2009- Railway Recruitment Board; 2011- All India Engineering Entrance Examination; 2012- AIIMS New Delhi entrance paper leak; 2013- Maharashtra Secondary Certificate Examination. If I… pic.twitter.com/EVfxjpEWtk
— ANI (@ANI) July 28, 2026
उन्होंने कहा कि 2009 के रेलवे भर्ती पेपर लीक से लेकर 2012 की एम्स प्रवेश परीक्षा तक कई मामले सामने आए. इसके अलावा उन्होंने कहा कि 1992 और 2010 में गठित समितियों ने केंद्रीय परीक्षा समिति बनाने की सिफारिश की थी, लेकिन तत्कालीन सरकारों ने उसे स्वीकार नहीं किया.
Anti Paper Leak Bill 2026: इन परीक्षाओं का भी किया जिक्र
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कांग्रेस शासनकाल के जिन मामलों का उल्लेख किया, उनमें 2009 का रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड, 2011 की एआईईईई (AIEEE), 2012 की एम्स (AIIMS) नई दिल्ली और 2013 की महाराष्ट्र सेकेंडरी सर्टिफिकेट परीक्षा शामिल हैं. उन्होंने कहा कि यदि सभी घटनाओं की गिनती की जाए तो पूरे विधेयक पर चर्चा का समय ही नहीं बचेगा. उन्होंने 2010 के उत्तर प्रदेश बीएड एंट्रेंस, 2012 के तमिलनाडु लोक सेवा आयोग और 2009 के पश्चिम बंगाल जॉइंट एंट्रेंस परीक्षा का भी जिक्र किया.
NTA के गठन का भी किया उल्लेख
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वर्तमान में केंद्र सरकार के अधीन UPSC, SSC, RRB और IBPS चार प्रमुख भर्ती एजेंसियां कार्यरत हैं. उन्होंने बताया कि उच्च शिक्षा में प्रवेश परीक्षाओं के लिए वर्ष 2017 में इसी सरकार ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) का गठन किया.
‘2024 के कानून को और मजबूत करेगा नया संशोधन’
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार ने परीक्षाओं में पारदर्शिता और शुचिता सुनिश्चित करने के लिए NTA बनाई. जून 2024 में कानून लाया गया और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर उसे और अधिक मजबूत बनाने के लिए 2026 का संशोधन बिल पेश किया गया है. उन्होंने कहा कि यह कानून देश के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा.
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विपक्ष जितनी देर चाहे, सरकार तैयार
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि इस विधेयक की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार चर्चा के लिए अधिक समय देने को तैयार है. उन्होंने बताया कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके और एनसीपी सहित विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं और चीफ व्हिप से इस संबंध में बातचीत की गई है.
उन्होंने कहा कि पहले इस बिल पर छह घंटे की चर्चा तय थी, जिसे बढ़ाकर आठ घंटे किया गया है. यदि विपक्ष और समय चाहता है तो सरकार 10 घंटे तक चर्चा कराने के लिए भी तैयार है.
2024 के कानून की तुलना में क्या होगा बदलाव?
सरकार के अनुसार संशोधन बिल में अपराधियों और सर्विस प्रोवाइडरों के खिलाफ सजा और आर्थिक दंड के प्रावधान पहले से अधिक सख्त किए गए हैं.
व्यक्तिगत दोषियों के लिए
- पहले 3 से 5 वर्ष की जेल, अब 5 से 10 वर्ष.
- पहले 10 लाख रुपये तक जुर्माना, अब 50 लाख रुपये तक.
सर्विस प्रोवाइडर (एजेंसियां)
- पहले 1 करोड़ रुपये तक जुर्माना, अब 5 करोड़ रुपये तक.
- पहले 4 वर्ष तक ब्लैकलिस्टिंग, अब 8 वर्ष तक.
पेपर लीक माफिया
- पहले 5 से 10 वर्ष की जेल, अब 7 से 10 वर्ष.
- पहले 1 करोड़ रुपये तक जुर्माना, अब 10 करोड़ रुपये तक.
- फास्ट-ट्रैक कोर्ट और दो महीने में जांच
संशोधन बिल में प्रावधान किया गया है कि पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतें बनाई जाएंगी. साथ ही केंद्रीय एजेंसी या स्पेशल टास्क फोर्स को जांच दो महीने के भीतर अनिवार्य रूप से पूरी करनी होगी.
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