विज्ञापन

वायरल वीडियो

पेपर लीक पर सरकार का बड़ा दांव, संसद में पेश हुआ सख्त संशोधन बिल; जानिए क्या-क्या बदलेगा

Anti Paper Leak Bill 2026 को केंद्र सरकार ने संसद में पेश कर प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली पर सख्ती बढ़ाने की तैयारी की है. लोकसभा में चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने पुराने पेपर लीक मामलों का जिक्र किया. वहीं सरकार ने 2024 के कानून की तुलना में सजा और जुर्माने के प्रावधानों को और कड़ा करने का प्रस्ताव रखा है.

विज्ञापन

Anti Paper Leak Bill 2026 को केंद्र सरकार ने संसद में पेश कर प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली पर सख्ती बढ़ाने की तैयारी की है. लोकसभा में चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने पुराने पेपर लीक मामलों का जिक्र किया. वहीं सरकार ने 2024 के कानून की तुलना में सजा और जुर्माने के प्रावधानों को और कड़ा करने का प्रस्ताव रखा है.

विज्ञापन

Anti Paper Leak Bill 2026: प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली पर शिकंजा कसने के लिए केंद्र सरकार ने संसद में ‘पब्लिक एग्जामिनेशन्स (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026’ पेश किया है. विधेयक पर लोकसभा में चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं नई नहीं हैं और कांग्रेस तथा यूपीए सरकारों के दौरान भी ऐसे कई मामले सामने आए थे. वहीं सरकार ने साफ किया कि इस बार कानून को पहले से अधिक सख्त बनाया जा रहा है.

लोकसभा में जितेंद्र सिंह ने गिनाए पुराने पेपर लीक के मामले

चर्चा के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अलग-अलग राज्यों और विभिन्न परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं लंबे समय से होती रही हैं. उन्होंने कहा कि यह समस्या किसी एक राज्य तक सीमित नहीं रही, लेकिन पहले इसके खिलाफ उतनी कठोर कार्रवाई नहीं हुई जितनी अब की जा रही है.

प्रह्लाद जोशी को मिला शिक्षा मंत्रालय का प्रभार, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मंजूर

उन्होंने कहा कि 2009 के रेलवे भर्ती पेपर लीक से लेकर 2012 की एम्स प्रवेश परीक्षा तक कई मामले सामने आए. इसके अलावा उन्होंने कहा कि 1992 और 2010 में गठित समितियों ने केंद्रीय परीक्षा समिति बनाने की सिफारिश की थी, लेकिन तत्कालीन सरकारों ने उसे स्वीकार नहीं किया.

Anti Paper Leak Bill 2026: इन परीक्षाओं का भी किया जिक्र

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कांग्रेस शासनकाल के जिन मामलों का उल्लेख किया, उनमें 2009 का रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड, 2011 की एआईईईई (AIEEE), 2012 की एम्स (AIIMS) नई दिल्ली और 2013 की महाराष्ट्र सेकेंडरी सर्टिफिकेट परीक्षा शामिल हैं. उन्होंने कहा कि यदि सभी घटनाओं की गिनती की जाए तो पूरे विधेयक पर चर्चा का समय ही नहीं बचेगा. उन्होंने 2010 के उत्तर प्रदेश बीएड एंट्रेंस, 2012 के तमिलनाडु लोक सेवा आयोग और 2009 के पश्चिम बंगाल जॉइंट एंट्रेंस परीक्षा का भी जिक्र किया.

NTA के गठन का भी किया उल्लेख

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वर्तमान में केंद्र सरकार के अधीन UPSC, SSC, RRB और IBPS चार प्रमुख भर्ती एजेंसियां कार्यरत हैं. उन्होंने बताया कि उच्च शिक्षा में प्रवेश परीक्षाओं के लिए वर्ष 2017 में इसी सरकार ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) का गठन किया.

‘2024 के कानून को और मजबूत करेगा नया संशोधन’

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार ने परीक्षाओं में पारदर्शिता और शुचिता सुनिश्चित करने के लिए NTA बनाई. जून 2024 में कानून लाया गया और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर उसे और अधिक मजबूत बनाने के लिए 2026 का संशोधन बिल पेश किया गया है. उन्होंने कहा कि यह कानून देश के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा.

छात्र आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा; धर्मेंद्र प्रधान ने छोड़ा पद, जानिए क्या बोले

विपक्ष जितनी देर चाहे, सरकार तैयार

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि इस विधेयक की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार चर्चा के लिए अधिक समय देने को तैयार है. उन्होंने बताया कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके और एनसीपी सहित विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं और चीफ व्हिप से इस संबंध में बातचीत की गई है.

उन्होंने कहा कि पहले इस बिल पर छह घंटे की चर्चा तय थी, जिसे बढ़ाकर आठ घंटे किया गया है. यदि विपक्ष और समय चाहता है तो सरकार 10 घंटे तक चर्चा कराने के लिए भी तैयार है.

2024 के कानून की तुलना में क्या होगा बदलाव?

सरकार के अनुसार संशोधन बिल में अपराधियों और सर्विस प्रोवाइडरों के खिलाफ सजा और आर्थिक दंड के प्रावधान पहले से अधिक सख्त किए गए हैं.

व्यक्तिगत दोषियों के लिए

  • पहले 3 से 5 वर्ष की जेल, अब 5 से 10 वर्ष.
  • पहले 10 लाख रुपये तक जुर्माना, अब 50 लाख रुपये तक.

सर्विस प्रोवाइडर (एजेंसियां)

  • पहले 1 करोड़ रुपये तक जुर्माना, अब 5 करोड़ रुपये तक.
  • पहले 4 वर्ष तक ब्लैकलिस्टिंग, अब 8 वर्ष तक.

पेपर लीक माफिया

  • पहले 5 से 10 वर्ष की जेल, अब 7 से 10 वर्ष.
  • पहले 1 करोड़ रुपये तक जुर्माना, अब 10 करोड़ रुपये तक.
  • फास्ट-ट्रैक कोर्ट और दो महीने में जांच

संशोधन बिल में प्रावधान किया गया है कि पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतें बनाई जाएंगी. साथ ही केंद्रीय एजेंसी या स्पेशल टास्क फोर्स को जांच दो महीने के भीतर अनिवार्य रूप से पूरी करनी होगी.

इसे भी पढ़ें-

पेपर लीक से लेकर सोशल मीडिया तक सख्ती, विधानसभा से 13 बड़े विधेयकों को मिली मंजूरी
बिहार के भागलपुर में विजिलेंस की बड़ी कार्रवाई, बिजली कनेक्शन के नाम पर चार हजार घूस लेते JE धराया
भागलपुर में कोरोना का दूसरा मरीज मिला, संक्रमित बुजुर्ग की बेटी भी पॉजिटिव
विज्ञापन
सोनी कुमारी
सोनी कुमारी
सोनी कुमारी डिजिटल मीडिया क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार हैं और Hellocities24 में ऑथर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार समेत देशभर की ताजा खबरों, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक मुद्दों पर लेखन करती हैं. पाठकों तक तेज और भरोसेमंद खबरें पहुंचाना प्रमुख उद्देश्य है.
संबंधित खबरें
विज्ञापन

जरूर पढ़ें

Patna
overcast clouds
34.9 ° C
34.9 °
34.9 °
48%
5.7m/s
97%
मंगल
34 °
बुध
36 °
गुरु
35 °
शुक्र
35 °
शनि
35 °

अन्य खबरें