President Droupadi Murmu : 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए आजादी से लेकर विकसित भारत के लक्ष्य तक की यात्रा को सामने रखा. उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए देश तेजी से आगे बढ़ रहा है. अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने स्वतंत्रता संग्राम, विभाजन की त्रासदी, संविधान के आदर्श, युवाओं की क्षमता और भारतीय सेनाओं के पराक्रम का भी उल्लेख किया.
‘वयं राष्ट्रे जागृयाम’ से दिया राष्ट्र के प्रति जागरूकता का संदेश
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन की शुरुआत ‘प्यारे देशवासियों’ से की. उन्होंने ‘वयं राष्ट्रे जागृयाम’ वेदवाक्य का उल्लेख करते हुए कहा कि यह देश के प्रति हमेशा जागरूक रहने की प्रेरणा देता है.
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उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के उन सभी लोगों को याद किया, जिनका लक्ष्य भारत को आजाद कराना था. स्वदेशी आंदोलन के दौरान ‘वंदे मातरम्’ के जन-जन का गीत बनने और महात्मा गांधी से जुड़े स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान का भी उन्होंने उल्लेख किया.
LIVE: President Droupadi Murmu's address to the nation on the eve of the 80th Independence Day https://t.co/0EZ6TLdoM9
— President of India (@rashtrapatibhvn) August 14, 2026
आजादी मिली, लेकिन विभाजन का दर्द भी देश ने झेला
राष्ट्रपति ने स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले मनाए जाने वाले विभाजन विभीषिका दिवस का जिक्र करते हुए उस दौर की पीड़ा को याद किया. उन्होंने कहा कि विभाजन के दौरान लाखों लोगों को सांप्रदायिक हिंसा का सामना करना पड़ा और बड़ी संख्या में लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा.
इसके बावजूद उन लोगों ने अपनी भारतीयता की पहचान नहीं छोड़ी. राष्ट्रपति ने इस त्रासदी में जान गंवाने वालों और विस्थापित हुए लोगों को याद किया.
बंटे हुए भारत को एक करना थी सबसे बड़ी चुनौती
आजादी के समय देश 550 से अधिक रियासतों में बंटा हुआ था. राष्ट्रपति ने कहा कि उन सभी को एक साथ लाना आसान चुनौती नहीं थी. उन्होंने रियासतों के विलय में सरदार वल्लभभाई पटेल की भूमिका को याद किया.
राष्ट्रपति ने कहा कि आज देश संविधान के आधार पर आगे बढ़ रहा है और जनभागीदारी भारत की ताकत बनी हुई है.
संविधान के इन आदर्शों को बताया जरूरी
राष्ट्रपति ने प्रतिष्ठा, समान अवसर और व्यक्ति की गरिमा को संविधान के प्रमुख आदर्शों के रूप में रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि आज यह विश्वास मजबूत हो रहा है कि हर व्यक्ति बड़े सपने देख सकता है और उन्हें पूरा कर सकता है.
उन्होंने यह भी कहा कि अभाव किसी व्यक्ति को अवसर से वंचित न करे और वंचित वर्गों को सम्मान के साथ समय पर न्याय मिलना चाहिए.
फुले दंपती के योगदान को भी किया याद
महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले के योगदान को याद किया. उन्होंने सामाजिक न्याय, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और समानता के लिए उनके प्रयासों को रेखांकित किया.
राष्ट्रपति ने कहा कि उनके आदर्शों के अनुरूप पिछले कुछ वर्षों में वंचित वर्गों को आगे बढ़ाना राष्ट्रीय प्राथमिकता रही है.
युवाओं को लेकर राष्ट्रपति ने बताई ये मिसाल
राष्ट्रपति ने सार्वजनिक परीक्षाओं में सुधार और गलत तरीकों पर रोक लगाने के लिए उठाए जा रहे कदमों का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि युवाओं के लिए व्यवस्था को पारदर्शी बनाने पर काम हो रहा है.
उन्होंने 28 साल की औसत उम्र वाली युवा टीम के नेतृत्व में सफल स्पेस रॉकेट लॉन्च का भी जिक्र किया.
कारगिल से ऑपरेशन सिंदूर तक सेना के शौर्य का उल्लेख
राष्ट्रपति ने कारगिल विजय दिवस और ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए भारतीय सेनाओं के पराक्रम को याद किया. उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ ऑपरेशन ने भारतीय सेनाओं की क्षमता को दिखाया और आतंकियों तथा उनके समर्थकों को स्पष्ट संदेश दिया.
उन्होंने कहा कि वे कहीं भी छिपें, उन्हें अपने किए की सजा जरूर मिलेगी.
राष्ट्र निर्माण में हर वर्ग की भूमिका
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने शिक्षक, डॉक्टर, किसान, कलाकार, खिलाड़ी, शिल्पकार, बुद्धिजीवी, निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारी, जनप्रतिनिधि, न्यायपालिका से जुड़े लोगों और सफाई कर्मचारियों के योगदान को महत्वपूर्ण बताया.
उन्होंने कहा कि भारत में रहने वाले नागरिकों के साथ विदेशों में रह रहे भारतीय भी देश की प्रगति में भागीदार हैं.
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