Prashant Kishor : बांकीपुर में भाजपा को हराकर विधानसभा पहुंचने के बाद प्रशांत किशोर अब एक सीट की जीत पर रुकने के मूड में नहीं हैं. जन सुराज ने बिहार में अपनी अगली राजनीतिक जमीन तैयार करनी शुरू कर दी है. पार्टी की नजर अब विधान परिषद के शिक्षक-स्नातक चुनाव और इसके बाद होने वाले पंचायत चुनाव पर है. इसी रणनीति को जमीन पर उतारने के लिए प्रशांत किशोर सितंबर से फिर बिहार के दौरे पर निकल सकते हैं.
विधानसभा की जीत के बाद अब पंचायत की बारी
बांकीपुर की जीत ने जन सुराज को विधानसभा में जगह दिला दी है, लेकिन पार्टी के सामने अब असली चुनौती अपने संगठन को बिहार के गांवों तक पहुंचाने की है.
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प्रशांत किशोर ने बांकीपुर जीत के बाद हर जिले में जन सुराज का जिला परिषद अध्यक्ष बनाने का लक्ष्य बताया था. ऐसे में पंचायत चुनाव पार्टी के लिए सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि पूरे बिहार में संगठन की ताकत परखने का पहला बड़ा मौका होगा.
MLC चुनाव में भी उतरेगी जन सुराज
पार्टी ने विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक कोटे की सीटों को भी अगले राजनीतिक पड़ाव के तौर पर चुना है. इन दोनों कोटों की आठ सीटों पर चुनाव होना है.
जन सुराज इन चुनावों में अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है. खासकर ऐसे समय में जब पार्टी बांकीपुर की जीत के बाद अपने राजनीतिक प्रभाव को दूसरे इलाकों तक ले जाने की कोशिश कर रही है.
सितंबर में PK फिर निकलेंगे बिहार की राह
प्रशांत किशोर की प्रस्तावित यात्रा भी इसी चुनावी विस्तार की कड़ी मानी जा रही है. सितंबर से शुरू होने वाली यात्रा में वह जिलों के साथ-साथ पंचायतों, कस्बों और गांवों तक पहुंचेंगे.
जन सुराज का जोर इस बार सिर्फ बड़ी सभाओं पर नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर संगठन खड़ा करने और लोगों से सीधे संवाद पर रहेगा. पार्टी की आगामी गतिविधियों पर अंतिम फैसला कार्यकारिणी की बैठक में होने की बात कही गयी है.
तीन महीने तक चलेगा जनसंपर्क अभियान
प्रस्तावित यात्रा करीब तीन महीने तक चल सकती है. इस दौरान अलग-अलग इलाकों में जनसभाओं के साथ पार्टी के स्थानीय ढांचे को मजबूत करने की कोशिश होगी.
प्रशांत किशोर पहले भी बिहार में लंबी पदयात्रा कर चुके हैं. अबकी बार यात्रा का समय और उद्देश्य दोनों अलग हैं—विधानसभा चुनाव के बाद संगठन को चुनाव-दर-चुनाव विस्तार देना.
बांकीपुर की जीत को पूरे बिहार में ले जाने की चुनौती
बांकीपुर में प्रशांत किशोर ने भाजपा के नीरज सिन्हा को 19 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से हराया और जन सुराज के पहले विधायक बने. यह जीत इसलिए भी अहम रही क्योंकि बांकीपुर को भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है.
लेकिन अब सवाल यह है कि क्या बांकीपुर का राजनीतिक असर पटना से बाहर भी दिखाई देगा? MLC और पंचायत चुनाव इस सवाल का पहला जवाब दे सकते हैं.
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चिराग ने भी PK की रणनीति को सराहा
इस बीच केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने प्रशांत किशोर की तारीफ की है. उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर जाति और धर्म से अलग बिहार के विकास और रोजगार की बात करते हैं.
ऐसे में एक तरफ जन सुराज संगठन को गांवों तक ले जाने की तैयारी कर रहा है, तो दूसरी तरफ प्रशांत किशोर के राजनीतिक रुख को लेकर बिहार की सियासत में चर्चा तेज हो गयी है.
अब नजर पंचायत चुनाव पर
बांकीपुर ने प्रशांत किशोर को विधानसभा में पहुंचा दिया, लेकिन जन सुराज के लिए अगला इम्तिहान इससे कहीं बड़ा है. पार्टी अगर MLC और पंचायत चुनाव में अपनी मौजूदगी मजबूत करती है, तो यह बांकीपुर की जीत को एक सीट से आगे बढ़ाकर संगठनात्मक ताकत में बदलने का संकेत होगा.
यही वजह है कि सितंबर से प्रस्तावित प्रशांत किशोर की बिहार यात्रा को जन सुराज की अगली चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है.
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