Patna Flood : पटना में बाढ़ अब सिर्फ खेतों और निचले इलाकों तक सीमित नहीं रह गयी है. कहीं सड़क पानी में डूब गयी है, कहीं तेज बहाव अपने साथ 150 से 200 फीट सड़क बहा ले गया है और कई गांवों का संपर्क पूरी तरह टूट चुका है. हालात ऐसे हैं कि जिन रास्तों से लोग रोज आते-जाते थे, वहां अब नाव ही एकमात्र सहारा रह गयी है.
गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर से जिले के नौ प्रखंडों की करीब 2.32 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है. मसौढ़ी, धनरूआ, फुलवारीशरीफ और मनेर के कई इलाकों में पानी घरों और सार्वजनिक भवनों तक पहुंच चुका है. दूसरी ओर प्रशासन ने प्रभावित लोगों तक भोजन और राहत पहुंचाने के लिए सामुदायिक रसोई, नाव और राहत कैंप की व्यवस्था बढ़ायी है.
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एक सड़क बही और तीन गांवों का रास्ता टूट गया
धनरूआ क्षेत्र में बाढ़ का असर सिर्फ घरों और खेतों तक नहीं रहा. दरधा नदी के तेज बहाव में देवधा-इमलिया-मठिया पथ का करीब 150 से 200 फीट हिस्सा बह गया. इसके बाद देवधा, इमलिया और मठिया गांवों का सड़क संपर्क बुरी तरह प्रभावित हो गया.
बीर-कुशवन मार्ग पर भी पानी चढ़ने से आवागमन बंद है. बीर का अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बाढ़ के पानी से प्रभावित हो गया है, जबकि लीला टोला का प्राथमिक विद्यालय और सामुदायिक भवन पूरी तरह पानी में डूब गये हैं.
दरधा का जलस्तर रिकॉर्ड ऊंचाई पर, घर और फसल दोनों डूबे
मसौढ़ी और धनरूआ में गंगा के साथ दरधा नदी के बढ़े जलस्तर ने संकट और गहरा दिया है. धनरूआ में दरधा नदी 56.12 मीटर के अब तक के सर्वाधिक जलस्तर पर पहुंच गयी है.
इसके कारण देवधा, बीर, सोनमई समेत चार पंचायतों के निचले हिस्से जलमग्न हैं. अकेले देवधा पंचायत में करीब डेढ़ दर्जन घरों में पानी घुस गया है. सैकड़ों एकड़ की फसल भी बाढ़ की चपेट में आ गयी है.
बाढ़ नियंत्रण विभाग की टीम तटबंधों और संवेदनशील स्थानों पर नजर रख रही है. पानी के दबाव को देखते हुए तटबंध टूटने या ओवरफ्लो होने की आशंका भी बनी हुई है.
छह फीट पानी के बीच फंसे परिवार
फुलवारीशरीफ की सकरैचा पंचायत स्थित धनकी मुसहरी में भी बाढ़ ने लोगों की आवाजाही मुश्किल कर दी है. यहां महादलित टोले के दो दर्जन से ज्यादा परिवारों के घरों में पानी प्रवेश कर चुका है.
लोगों के आने-जाने का रास्ता करीब छह फीट पानी में डूब गया है. तेज बहाव के कारण ग्रामीण नाव और रस्सी के सहारे आवागमन कर रहे हैं.
घर में पानी, चूल्हे के लिए जलावन और राशन का संकट
बाढ़ के कारण अब लोगों की परेशानी घर के भीतर तक पहुंच गयी है. पानी में जलावन भीग जाने से खाना बनाने में दिक्कत हो रही है. कई घरों में राशन भी कम पड़ने लगा है.
ग्रामीणों ने पर्याप्त राहत नहीं मिलने की शिकायत की है. लोगों के आवागमन के लिए स्थानीय मुखिया की ओर से नाव की व्यवस्था करायी गयी है.
बाढ़ के बीच इलाकों में पहुंचे विधायक श्याम रजक
फुलवारी विधानसभा क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति देखने विधायक श्याम रजक धनुकी, चिहुट, सलालपुर और बकपुर समेत फुलवारीशरीफ और पुनपुन के कई प्रभावित इलाकों में पहुंचे. उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं.
विधायक ने अधिकारियों से राहत व्यवस्था की जानकारी ली और प्रभावित क्षेत्रों में नाव, बालू की बोरियां, जरूरी सामग्री तथा सामुदायिक रसोई की व्यवस्था करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि आपदा की इस घड़ी में प्रभावित लोगों को अकेला नहीं छोड़ा जायेगा और बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है.
मनेर का दियारा भी मुख्यालय से कटा
मनेर में बढ़ते पानी ने दियारा क्षेत्र का मुख्यालय से संपर्क भंग कर दिया है. हल्दी छपरा, बदल टोला, पुराना टोला, नया टोला, सात आना, धजवा टोला, महावीर टोला और रतन टोला समेत कई गांवों के घरों में पानी प्रवेश कर गया है.
कई परिवार सुरक्षित जगहों और मनेर की ओर जाने लगे हैं. हाथी टोला, मुंजी टोला, छिहत्तर, सुअर मरवा, हुलासी टोला, पतीला, चौरासी और प्रेम टोला समेत कई गांव भी बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं.
मुख्य रास्तों के डूबने के बाद यहां भी नाव ही लोगों के आवागमन का प्रमुख साधन रह गयी है.
14 नावों से राहत, दो कैंपों में ठहरने की व्यवस्था
मनेर अंचल प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित गांवों में 14 नावें चलायी हैं. पशुओं के लिए गांधी मैदान में टेंट लगाया गया है और किसानों के बीच पशुचारा भी वितरित किया गया है.
प्रभावित लोगों के लिए मनेर में दो राहत कैंप भी शुरू किये गये हैं.
5900 थाली भोजन के बाद सात और जगह शुरू होगी रसोई
बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए जिला प्रशासन की ओर से पहले से आठ सामुदायिक रसोई केंद्र चलाये जा रहे हैं. इन केंद्रों के जरिए अब तक करीब 5900 थाली भोजन उपलब्ध कराया जा चुका है.
शुक्रवार से सात अन्य स्थानों पर भी सामुदायिक रसोई शुरू की जा रही है. प्रशासन की राहत व्यवस्था में भोजन के साथ नाव, आवश्यक सामग्री और पशुचारा प्रभावित लोगों तक पहुंचाने पर जोर है.
तटबंधों पर चौबीस घंटे नजर
बाढ़ नियंत्रण विभाग ने तटबंधों की 24 घंटे निगरानी के निर्देश दिये हैं. संवेदनशील स्थानों पर कटावरोधी काम युद्धस्तर पर कराने को कहा गया है.
राहत शिविरों और सामुदायिक रसोई को तैयार रखने के साथ पशुओं के लिए चारे और जरूरत पड़ने पर स्कूलों में लोगों के ठहरने की व्यवस्था भी तैयार रखने का निर्देश दिया गया है. गंगा और दरधा के बढ़ते पानी के बीच प्रशासन संवेदनशील इलाकों पर लगातार नजर रख रहा है.
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