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Watch Video : अर्नब के बाद मुरासु का खतरा, आंध्र के 5 जिलों में रेड अलर्ट; 30 हजार लोगों को निकालने की तैयारी

Cyclone Murasu : चक्रवात मुरासु के खतरे के बीच आंध्र प्रदेश के पांच जिलों में रेड अलर्ट जारी किया गया है और 30 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी है. विजयवाड़ा, तिरुपति और विशाखापत्तनम से 19 उड़ानें रद्द कर दी गई हैं. उधर, चक्रवात अर्नब से प्रभावित ओडिशा के किसानों, मछुआरों, व्यापारियों और परिवारों के लिए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने व्यापक राहत पैकेज घोषित किया है.

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Cyclone Murasu : चक्रवात मुरासु के खतरे के बीच आंध्र प्रदेश के पांच जिलों में रेड अलर्ट जारी किया गया है और 30 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी है. विजयवाड़ा, तिरुपति और विशाखापत्तनम से 19 उड़ानें रद्द कर दी गई हैं. उधर, चक्रवात अर्नब से प्रभावित ओडिशा के किसानों, मछुआरों, व्यापारियों और परिवारों के लिए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने व्यापक राहत पैकेज घोषित किया है.

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Cyclone Murasu : आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के तटीय इलाकों पर गंभीर चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ का खतरा मंडरा रहा है. चक्रवात ‘अर्नब’ से हुए नुकसान से अभी लोग उबर भी नहीं पाए थे कि मुरासु ने नई मुसीबत खड़ी कर दी है. आंध्र प्रदेश के कोनासीमा में भारी बारिश शुरू हो गई है. इससे किसानों की मुश्किलें बढ़ने के साथ बिजली आपूर्ति बहाल करने का काम भी प्रभावित हो रहा है. मौसम विभाग ने आंध्र प्रदेश के पांच जिलों में भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है.

वहीं, प्रशासन ने तटीय और निचले इलाकों से करीब 30 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की है. सोमवार तक लगभग दो हजार लोगों को शिफ्ट किया जा चुका है.

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मौसम विभाग के अनुसार, मुरासु सोमवार आधी रात से मंगलवार तड़के के बीच नेल्लोर और नरसापुर के बीच आंध्र प्रदेश के तट को पार कर सकता है. इस दौरान 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक के झोंके आने की आशंका है. समुद्र में ऊंची लहरें उठने के साथ तटीय इलाकों में मूसलाधार बारिश का खतरा है. तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश पर इस तूफान का सबसे ज्यादा असर पड़ने की आशंका जताई गई है.

पांच जिलों में रेड अलर्ट, सात जिलों में ऑरेंज अलर्ट

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने सोमवार को कृष्णा, गुंटूर, बापटला, प्रकाशम और नेल्लोर जिलों में मूसलाधार बारिश को लेकर रेड अलर्ट जारी किया है. इसके अलावा सात अन्य जिलों में ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है. दक्षिण तटीय आंध्र और रायलसीमा के जिलों में भी मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना है.

बापटला, कृष्णा और प्रकाशम जिलों के तटीय इलाकों में एक से डेढ़ मीटर तक ऊंची समुद्री लहरें उठने की आशंका है. समुद्र में तेज हवाओं और ऊंची लहरों के खतरे को देखते हुए मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी गई है. बंदरगाहों पर सतर्कता सिग्नल लगाए गए हैं. तटीय क्षेत्रों में स्कूल बंद कर दिए गए हैं. चक्रवात से निपटने के लिए NDRF, SDRF और अग्निशमन दलों को तटीय और रायलसीमा क्षेत्रों में तैनात किया गया है.

30 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी

आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के प्रबंध निदेशक प्रखर जैन ने बताया कि सोमवार तक करीब दो हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है. प्रशासन की योजना कुल 30 हजार लोगों को निकालने की है. इसके तहत तटीय क्षेत्रों के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जा रहा है.

विशाखापट्टनम मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक पीएलएन मूर्ति के अनुसार, बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम और उससे सटे पश्चिम-मध्य हिस्से में बना गंभीर चक्रवाती तूफान मुरासु तेजी से आगे बढ़ रहा है. इसके उत्तर-पूर्व दिशा में बढ़ने की प्रबल संभावना है. सोमवार आधी रात से मंगलवार तड़के के बीच इसका प्रभाव आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में दिखाई देगा. तट पार करने के दौरान तेज हवाओं, भारी बारिश और समुद्र में ऊंची लहरों का खतरा रहेगा. प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमों को हाई अलर्ट पर रखा गया है.

विजयवाड़ा, तिरुपति और विशाखापत्तनम से 19 उड़ानें रद्द

चक्रवात मुरासु के कारण हवाई यातायात भी प्रभावित हुआ है. सोमवार को आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा, तिरुपति और विशाखापत्तनम हवाई अड्डों से संचालित होने वाली कम से कम 19 घरेलू उड़ानें रद्द कर दी गईं.

विजयवाड़ा हवाई अड्डे के निदेशक एम. लक्ष्मी कांथा रेड्डी ने बताया कि इंडिगो ने 10 और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने दो उड़ानें रद्द की हैं. यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है. इससे पहले विजयवाड़ा से इंडिगो की 10 उड़ानें रद्द किए जाने की जानकारी सामने आई थी.

कोथापटनम तट पर दिखने लगा चक्रवात का असर

मुरासु का प्रभाव समुद्र में भी दिखाई देने लगा है. आंध्र प्रदेश के कोथापटनम तट पर समुद्र अशांत हो गया है. यहां ऊंची-ऊंची लहरें उठ रही हैं और तेज हवाएं चल रही हैं. तटीय इलाकों में तूफान के संभावित प्रभाव को देखते हुए प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है.

मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने सोमवार को अधिकारियों को सतर्क रहने और चक्रवात से निपटने की तैयारियां सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है. उन्होंने बिजली व्यवस्था की बहाली के लिए तमिलनाडु सरकार से भी मदद मांगी है.

बिजली बहाली के लिए चंद्रबाबू नायडू ने तमिलनाडु के सीएम को किया फोन

चक्रवात अर्नब के कारण आंध्र प्रदेश में बिजली व्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा है. बड़ी संख्या में बिजली के पोल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे बिजली आपूर्ति बहाल करने में परेशानी हो रही है. मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय को फोन कर बिजली व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए अतिरिक्त मैनपावर और मशीनरी भेजने का अनुरोध किया है.

सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया गया कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री की ओर से इस अनुरोध पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है. वहीं, मुरासु के कारण कोनासीमा में हो रही भारी बारिश से पहले से जारी बिजली बहाली के काम में भी देरी हो रही है.

ओडिशा में अर्नब प्रभावित परिवारों को 50 किलो चावल और 2500 रुपये

एक तरफ आंध्र प्रदेश मुरासु के खतरे से निपटने की तैयारी कर रहा है, वहीं ओडिशा सरकार ने चक्रवात अर्नब से प्रभावित परिवारों, किसानों, मछुआरों, व्यापारियों और अन्य लोगों के लिए बड़े राहत पैकेज की घोषणा की है.

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने राहत और पुनर्वास कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा के बाद प्रभावित परिवारों को 50 किलो चावल और 2,500 रुपये देने का ऐलान किया है. चक्रवात अर्नब के कारण ओडिशा में अब तक छह लोगों की मौत की पुष्टि हुई है. न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, रविवार को दो शव बरामद किए गए, जबकि 10 लोग अब भी लापता बताए गए हैं.

इस चक्रवात से राज्य में 1.18 लाख लोग प्रभावित हुए हैं. कुल 1,672 घरों और 78 हजार हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा है. सरकार ने किसानों से लेकर पशुपालकों, मछुआरों, दुकानदारों, बुनकरों और महिला स्वयं सहायता समूहों तक के लिए अलग-अलग आर्थिक सहायता का ऐलान किया है.

किसानों को फसल नुकसान पर 8,500 से 22,500 रुपये तक की सहायता

ओडिशा सरकार के राहत पैकेज में 33 प्रतिशत या उससे अधिक फसल नुकसान झेलने वाले किसानों को अधिकतम दो हेक्टेयर भूमि तक इनपुट सब्सिडी दी जाएगी.

  • बिना सिंचाई वाली जमीन के लिए 8,500 रुपये प्रति हेक्टेयर.
  • सिंचाई वाली जमीन के लिए 17,000 रुपये प्रति हेक्टेयर.
  • बारहमासी फसलों के लिए 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर.
  • बारहमासी फसलों के लिए न्यूनतम इनपुट सहायता 2,500 रुपये, सिंचित क्षेत्रों के लिए 2,000 रुपये और असिंचित क्षेत्रों के लिए 1,000 रुपये होगी.
  • खेतों से रेत या मिट्टी हटाने के लिए 18,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता दी जाएगी. इसके लिए न्यूनतम सहायता 2,200 रुपये निर्धारित की गई है.
  • प्रभावित किसानों को कुल 1,75,000 विशेष मिनी-किट मुफ्त दी जाएंगी. इनमें 1,20,000 दलहन, 5,000 तिलहन और 50,000 सब्जियों की मिनी-किट शामिल हैं.

गन्ने की खेती वाले दो हजार हेक्टेयर प्रभावित क्षेत्रों में स्पेस ट्रांसप्लांटिंग पद्धति के लिए 27,500 रुपये प्रति हेक्टेयर और रैटून क्रॉप मैनेजमेंट के लिए 12,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता दी जाएगी.

रबी सीजन 2026-27 के दौरान किसानों को कीटनाशकों और जैविक कीटनाशकों पर 75 प्रतिशत सब्सिडी मिलेगी. जिन इलाकों में 33 प्रतिशत या उससे अधिक फसल बर्बाद हुई है, वहां इच्छुक किसानों के अल्पकालिक खरीफ ऋण को मध्यम अवधि के ऋण में बदला जाएगा. बटाईदारों और भूमिहीन लोगों के लिए बड़े लायबिलिटी ग्रुप भी बनाए जाएंगे.

क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 1.20 लाख से 1.30 लाख रुपये तक मुआवजा

चक्रवात में मकानों को हुए नुकसान के लिए भी अलग-अलग आर्थिक सहायता निर्धारित की गई है.

  • मैदानी इलाकों में पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 1,20,000 रुपये.
  • पहाड़ी इलाकों में पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 1,30,000 रुपये.
  • आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त पक्के मकानों के लिए 6,500 रुपये.
  • आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त कच्चे मकानों के लिए 4,000 रुपये.
  • झोपड़ियों के लिए 8,000 रुपये और झोंपड़ियों के लिए 3,000 रुपये की सहायता.

जिन परिवारों के घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं, बह गए हैं या दो दिनों से अधिक समय तक पानी में डूबे रहे हैं, उन्हें कपड़ों के लिए 2,500 रुपये और घरेलू सामान के लिए 2,500 रुपये दिए जाएंगे.

पशुओं की मौत पर भी मिलेगा मुआवजा

पशुपालकों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने पशुओं की श्रेणी के अनुसार सहायता तय की है.

  • डेयरी गाय और भैंस की मौत पर 37,500 रुपये.
  • भेड़, बकरी और सूअर की मौत पर 4,000 रुपये.
  • मुर्गे की मौत पर 100 रुपये प्रति मुर्गा, अधिकतम 10,000 रुपये.
  • बड़े पशुओं के लिए 32,000 रुपये और छोटे पशुओं के लिए 20,000 रुपये की सहायता.

इसके अलावा एक हजार किसानों को बकरी या बैल उपलब्ध कराने के लिए सब्सिडी दी जाएगी. पांच हजार डेयरी किसानों को प्रति पशु अधिकतम 500 किलोग्राम गाय का चारा उपलब्ध कराया जाएगा. जिन 200 पोल्ट्री फार्मों को 70 प्रतिशत से अधिक नुकसान हुआ है, उन्हें मुख्यमंत्री कृषि निराकरण योजना के तहत पुनर्वास सहायता मिलेगी.

मछुआरों और मछली पालकों के लिए अलग राहत पैकेज

चक्रवात से प्रभावित मछली पालकों को 1,12,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से 75 प्रतिशत तक सहायता दी जाएगी. क्षतिग्रस्त नावों के लिए 22,500 रुपये और जालों के लिए 15,000 रुपये दिए जाएंगे.

समुद्री और तटीय मछुआरों को क्षतिग्रस्त नावों के लिए 60,000 रुपये तथा जालों के लिए 15,000 रुपये की सहायता मिलेगी. जिन मछली पालकों और महिला स्वयं सहायता समूहों के सामुदायिक तालाबों के बांध टूट गए हैं, उन्हें अधिकतम 1,75,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की आर्थिक मदद दी जाएगी.

दुकानदारों, MSME और महिला समूहों को भी मदद

चक्रवात से प्रभावित सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME), व्यापारियों और दुकानदारों को 12 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाएगा. इसमें अधिकतम तीन लाख रुपये यानी 25 प्रतिशत सरकारी सब्सिडी सीधे बैंक के माध्यम से दी जाएगी.

मोबाइल दुकानदारों, अस्थायी स्टॉल और कियोस्क संचालकों को 10,000 रुपये तथा दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को 25,000 रुपये की सहायता मिलेगी.

चक्रवात से प्रभावित सभी पात्र महिला स्वयं सहायता समूहों को पांच हजार रुपये की अतिरिक्त सीड मनी दी जाएगी. बुनकरों और कारीगरों को उपकरण बदलने के लिए प्रति व्यक्ति पांच हजार रुपये और स्क्रैप सामग्री के लिए पांच हजार रुपये की सहायता मिलेगी.

रेशम किसानों के लिए भी सहायता का ऐलान

रेशम उत्पादन से जुड़े किसानों को भी राहत पैकेज में शामिल किया गया है. एरी, शहतूत और टसर रेशम किसानों को छह हजार रुपये प्रति हेक्टेयर और मुगा रेशम किसानों को 7,500 रुपये प्रति हेक्टेयर दिए जाएंगे. पूरी तरह प्रभावित जानवरों के लिए 1,75,000 रुपये की सहायता का भी ऐलान किया गया है.

मुख्यमंत्री ने रबी सीजन शुरू होने से पहले प्रभावित गांवों में ओडिशा अपस्ट्रीम सिंचाई के सभी बिंदुओं की तत्काल मरम्मत कर उन्हें चालू करने का निर्देश दिया है.

2 नवंबर को नुकसान का आकलन करने ओडिशा आएगी केंद्रीय टीम

ओडिशा में चक्रवात अर्नब से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्रीय अंतर-मंत्रालयी समिति 2 नवंबर को राज्य का दौरा करेगी. समिति प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का जायजा लेगी.

वहीं, आने वाले चक्रवात मुरासु की आशंका को देखते हुए ओडिशा में तैनात टीमों को भी अलर्ट रहने और अपनी तैनाती वाली जगह नहीं छोड़ने का निर्देश दिया गया है. सरकार ने अर्नब के बाद राहत और पुनर्वास कार्यों के साथ नए चक्रवात से निपटने की तैयारियां भी तेज कर दी हैं.

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Soni
सोनी कुमारी
सोनी कुमारी डिजिटल मीडिया क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार हैं और Hellocities24 में ऑथर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार समेत देशभर की ताजा खबरों, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक मुद्दों पर लेखन करती हैं. पाठकों तक तेज और भरोसेमंद खबरें पहुंचाना प्रमुख उद्देश्य है.
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