Farakka Water Treaty Bihar : फरक्का जल संधि में बिहार की जरूरतों और हितों की अनदेखी हुई है. बिहार अपने किसानों की सिंचाई, पेयजल, उद्योगों और लाखों लोगों की आजीविका को संकट में डालकर बांग्लादेश को पानी दे रहा है. अंतरराष्ट्रीय समझौते का 73 प्रतिशत बोझ अकेले बिहार उठा रहा है. आगे फरक्का जल संधि नहीं होनी चाहिए और अगर समझौता होता भी है तो बिहार को हुए नुकसान का वैज्ञानिक दृष्टिकोण से आकलन जरूरी है. मंगलवार को टाउन हॉल में आयोजित फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद कार्यक्रम में जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष सह राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने ये बातें कहीं.
बक्सर में गंगा का प्रवाह 400 क्यूमेक, बांग्लादेश को छोड़ना पड़ता है 1500 क्यूमेक पानी
संजय झा ने कहा कि बक्सर के पास गंगा का प्रवाह महज 400 क्यूमेक यानी लगभग 14 हजार क्यूसेक तक रह जाता है. इसके बावजूद फरक्का से बांग्लादेश के लिए 1500 क्यूमेक पानी छोड़ना पड़ता है. इसका मतलब है कि सिर्फ गंगा ही नहीं, बल्कि बिहार की आंतरिक नदियों का पानी भी खींचकर बांग्लादेश को दिया जा रहा है. जब बिहार को पानी की जरूरत होती है, तब बांग्लादेश को पानी दिया जाता है और जब पानी की जरूरत नहीं रहती, तब बिहार को बाढ़ का सामना करना पड़ता है.
पिछले 30 वर्षों में इस संधि से बिहार को हुए नुकसान का आकलन होना चाहिए. पानी के बिना कोई उद्योग नहीं लग सकता. आगे किसी भी समझौते में बिहार की जरूरतों को ध्यान में रखना होगा.
दिसंबर 2026 में खत्म होगी 30 साल की संधि, हिलसा के लिए बांग्लादेश पर निर्भरता
उन्होंने बताया कि वर्ष 1975 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में फरक्का बैराज बनाया गया था. इसके बाद वर्ष 1996 में गंगा जल के बंटवारे को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच अंतरराष्ट्रीय संधि हुई. यह 30 वर्षों का समझौता है, जो शुष्क मौसम यानी एक जनवरी से 31 मई के दौरान पानी के बंटवारे को नियंत्रित करता है. इसकी समय सीमा दिसंबर 2026 में समाप्त हो रही है. उन्होंने कहा कि पहले बिहार में हिलसा मछली मिलती थी, लेकिन अब कहां मिलती है. हिलसा खाना हो तो बांग्लादेश से मंगाना पड़ता है.
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गंगा की अविरलता के लिए फरक्का बैराज तोड़ने की बात कह चुके हैं नीतीश कुमार
संजय झा ने कहा कि मुख्यमंत्री रहते नीतीश कुमार लगातार गंगा की अविरलता प्रभावित होने और नदी में गाद जमा होने का मुद्दा उठाते रहे हैं. उन्होंने यहां तक कहा था कि अगर मेरा बस चले तो फरक्का बैराज को ही तोड़ दीजिए, ताकि गंगा की अविरलता बनी रहे. उन्होंने कहा कि यह जदयू का नहीं, बल्कि पूरे बिहार का मुद्दा है. यह चुनावी मुद्दा भी नहीं है, क्योंकि चुनाव 2029 में होना है. वे इस विषय को लेकर लगातार घूम रहे हैं और संसद में भी मुद्दा उठा चुके हैं.
बिहार और झारखंड दोनों का विकास करते नीतीश कुमार
नीतीश कुमार की तारीफ करते हुए संजय झा ने कहा कि उनके कारण बिहार का मान बढ़ा है. वे जो ठान लेते हैं, उसे पूरा करते हैं. दुनिया में बिहार का नाम रोशन हुआ है. पांच लाख लोगों को एक करोड़ लोगों को नौकरी देने का वादा है. नीतीश कुमार को बिहार और झारखंड दोनों राज्यों को चलाने का मौका मिलता तो दोनों का विकास होता. संधि को लेकर आगे बातचीत होगी तो बिहार की जरूरतें तय कर उसी आधार पर बात की जाएगी.
आकलन के बाद ही हो फरक्का संधि का नवीकरण : उमेश कुशवाहा
प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि अब संधि नहीं होनी चाहिए. अगर संधि होती है तो नुकसान के आकलन को देखकर ठोस रणनीति के साथ उसका नवीकरण होना चाहिए. उन्होंने लोगों से इस मुद्दे पर संकल्प लेकर जाने की अपील की.
फरक्का जल संधि का असर पूरे बिहार पर पड़ा : कहकशां परवीण
पूर्व राज्यसभा सांसद कहकशां परवीण ने कहा कि बांग्लादेश के साथ 30 साल पहले हुई फरक्का जल संधि का प्रभाव पूरे बिहार पर पड़ा है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लगातार बिहार की समस्याओं के समाधान के लिए प्रयासरत रहे हैं. इसी मुद्दे को लेकर पार्टी की मुहिम आगे बढ़ाई जा रही है.
30 साल से बिहार झेल रहा बाढ़ की विभीषिका : शोभानंद मुकेश
विधायक शोभानंद मुकेश ने कहा कि वर्ष 1996 में हुई फरक्का जल संधि के बाद से बिहार 30 वर्षों से बाढ़ की विभीषिका झेल रहा है. किसानों को खेती में हो रही कठिनाइयों का एहसास होगा कि किस तरह उनकी मुश्किलें बढ़ी हैं. पानी के बिना उद्योग स्थापित नहीं हो सकते. उन्होंने कहा कि यह संधि राजद की सरकार के समय हुई थी, लेकिन इसका कोई विरोध नहीं किया गया.
सड़क पर उतरकर आंदोलन को अंजाम तक पहुंचाएंगे : मनीष कुमार
धोरैया विधायक मनीष कुमार ने कहा कि प्राकृतिक आपदा से सभी प्रभावित हैं. फरक्का जल संधि को लेकर मुद्दे की शुरुआत हुई है तो इसे अंजाम तक जरूर पहुंचाया जाएगा. जरूरत पड़ी तो सड़क पर उतरकर आंदोलन भी किया जाएगा. उन्होंने गंगा के पानी से मंदार क्षेत्र की सिंचाई करने की मांग भी उठायी.
मुद्दा उठाया है तो अब छोड़ा नहीं जाएगा : संजय सिंह
प्रदेश उपाध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि फरक्का जल संधि का मुद्दा सभी से जुड़ा है. इसे उठाया गया है तो अब छोड़ा नहीं जाएगा. उन्होंने आरोप लगाया कि लालू प्रसाद की सरकार के कार्यकाल में यह संधि हुई थी, लेकिन उनकी ओर से इसका कोई विरोध नहीं किया गया.
गंगा रोटी भी देती है और बाढ़ का डर भी : बुलो मंडल
सांसद शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल ने कहा कि फरक्का जल संधि का असर बिहार पर पड़ा है. वे खुद इसके प्रभाव से प्रभावित रहे हैं. बांध टूटने पर उनके घर में भी बाढ़ का पानी घुस गया था. गंगा मैया जहां लोगों को रोजी-रोटी देती हैं, वहीं बाढ़ का डर भी बना रहता है. उन्होंने कहा कि आगे होने वाली संधि बिहार का भविष्य तय करेगी. इस संधि से युवा और किसान सभी प्रभावित हैं. वर्ष 2026 में आई बाढ़ के दौरान भीषण कटाव हुआ था.
दीप प्रज्वलित कर हुआ कार्यक्रम का उद्घाटन
कार्यक्रम का उद्घाटन राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा, प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा, ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल और प्रदेश उपाध्यक्ष संजय सिंह सहित अन्य ने दीप प्रज्वलित कर किया. इससे पहले संजय झा और उमेश सिंह कुशवाहा का स्वागत किया गया. राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष को मुकुट पहनाकर और अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया. टाउन हॉल पहुंचने के रास्ते में फूलों की बारिश भी की गई. कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष विवेकानंद गुप्ता ने की. इसमें युवा प्रदेश अध्यक्ष संतोष पटले, सांसद अजय मंडल, विधायक मनीष कुमार, पूर्व राज्यसभा सांसद कहकशां परवीण, पूर्व विधायक लक्ष्मीकांत मंडल, सुबोध राय, सुड्डू साई सहित अन्य मौजूद थे.



